देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड में बाइस सालों से भ्रष्टाचार का युग इस कदर पनप चुका था कि उस पर कौन नकेल लगायेगा यह हमेशा एक चर्चा का विषय बना रहा और यह बहस भी होती रही कि आखिरकार सत्ता पर आसीन होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भ्रष्ट तंत्र पर प्रहार करने से क्यों अपने कदम पीछे खींचते रहे? हालांकि अब उत्तराखण्ड में भ्रष्ट युग का अंत करने के लिए उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जिस तेजी के साथ अपने कदम आगे बढाने शुरू किये हैं उससे बडे-बडे भ्रष्ट अफसरों की नींद उड गई है और वह इसी जुगत में लगे हुये हैं कि किसी तरह से वह प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली चले जायें? वहीं मुख्यमंत्री के लिए सबसे बडी चुनौती दर्जनों विभागों में चले आ रहे अटैचमेंट के खेल को नेस्तानबूत करने की भी रहेगी क्योंकि यह खेल इस कदर खेला जा रहा है जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता? हैरतअंगेज बात तो यह है कि उत्तराखण्ड की कुछ जेलों में तैनात कर्मचारी भी अटैचमेंट के इस खेल में जुडे हुये हैं इस पर अब मुख्यमंत्री को अटैचमेंट का खेल समाप्ति की ओर ले जाना होगा।
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी जो कि दस माह से पारदर्शिता के साथ सरकार चला रहे हैं और उन्होंने साफ संदेश दे रखा है कि उत्तराखण्ड को भ्रष्टाचारमुक्त करना उनकी पहली प्राथमिकता है इसी के चलते कुछ भ्रष्ट अफसरों पर कार्यवाही कर मुख्यमंत्री ने साफ संदेश दे दिया कि उनके शासनकाल में कोई भी भ्रष्टाचारी अफसर बच नहीं पायेगा। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों को साफ संदेश दे रखा है कि अगर कोई भी उनसे किसी विभाग में रिश्वत की मांग करे तो वह सीधे इसकी शिकायत विजिलेंस के पोर्टल पर करे जिससे भ्रष्टाचारी को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया जा सके। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के विभागों में चले आ रहे अटैचमेंट पर भी अपनी निगाह रखनी शुरू कर दी है और यह तय माना जा रहा है कि आने वाले समय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सभी विभागों में चल रहे अटैचमेंट की फाइलों को खंगालने का संदेश देंगे और जो भी कर्मचारी व अधिकारी अपनी मूल तैनाती पर जाने के बजाए अटैचमेंट वाली जगह पर तैनात होगा उसकी वहां से जरूर छुट्टी होगी?
