एक्शन मोड में अभिनव

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के इतिहास में किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री के शासनकाल में सरकार और पत्रकारों के बीच बेहतर सम्बन्ध देखने को नहीं मिले और इसका प्रमुख कारण सूचना विभाग में बैठे कुछ अफसरों की हिटलरशाही ही माना जाता रहा है जो सरकार और पत्रकारों को बांटने का खेल खेलते रहे हैं? सूचना महकमें के एक दो अफसर ऐसे हैं जो अपने दफ्तर में आने वाले अधिकांश पत्रकारों को अपना गुलाम समझकर उन्हें अपने सामने बैठने तक को नहीं कहते और ऐसे चंद अफसरों की सरकार में रहस्यमय पहुंच के चलते ही वह पत्रकारों को अपनी दबंगता दिखाते रहे हैं लेकिन अब मिलनसार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के शासनकाल में सूचना सचिव की जिम्मेदारी जब अभिनव कुमार जैसे बेहद ईमानदार अफसर को दी गई है तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार का विजन भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पर काम करना है। धामी की टीम के विशेष प्रमुख सचिव व सूचना सचिव ने पदभार संभालने के बाद अपना एक्शन शुरू कर दिया है और उनके राज में पत्रकारों को सरकार का साथ शत-प्रतिशत मिलेगा इसमें कोई शंका नहीं है और तो और अब राज्य में पत्रकारों के लिए बनाया गया पत्रकार कल्याण कोष पत्रकारों के लिए एक ख्वाब नहीं रहेगा? अभिनव कुमार खुद एक बेबाक पत्रकार भी हैं जिनके लेखों से शुद्ध पत्रकारिता देखने को मिलती रही है इसलिए इसमें कोई शंका नहीं कि धामी राज में कोई भी पत्रकारों के खिलाफ एक साजिश के तहत उन पर शिकंजा कसने की साजिश रच पायेगा?
उत्तराखण्ड से लेकर देश में अपनी स्वच्छ शैली के लिए अभिनव कुमार पहचाने जाते हैं और उन्होंने प्रतिनियुक्ति पर जिस तरह से कुछ महकमों में काम किया वहां उनकी प्रसिद्धी के किस्से हमेशा चर्चाओं में रहे और श्रीनगर में अपनी तैनाती के दौरान उन्होंने जिस तरह से बीएसएफ में रहते हुए आतंकवाद के खिलाफ मोर्चा खोला था उससे उनका विजन साफ था कि वह जिस महकमें में तैनात होते हैं वहां वह ईमानदारी के साथ अपने विजन को आगे बढाते हैं। अब उत्तराखण्ड में स्वच्छ प्रशासन देने वाले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की टीम में अभिनव कुमार शामिल हैं और उससे सरकार का विजन साफ नजर आ गया है कि सरकार शुद्ध तरीके से सत्ता चलाने के लिए आगे आयेगी। पुष्कर ंिसह धामी ने अभिनव कुमार को सूचना सचिव की जिम्मेदारी सौंपी है क्योंकि उत्तराखण्ड के बाइस साल के इतिहास में आज तक कोई भी पूर्व सूचना सचिव पत्रकारों व सरकार के बीच सेतु का काम नहीं कर पाया और उनकी हमेशा पत्रकारों से दूरी का परिणाम रहा कि अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में अधिकांश पत्रकारों व सरकार के बीच कोई तालमेल नहीं बना पाया और जिन चंद मीडिया सलाहकार व मीडिया कॉडिनेटरों को पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी टीम में शामिल किया उनमें से अधिकांश ने पत्रकारों व सरकार के बीच हमेशा एक बडी खाई पैदा की और बार-बार कुछ पत्रकारों के खिलाफ साजिशें रची गई और तो और यहां तक आशंकायें प्रबल होती थी कि सरकार को आईना दिखाने वाले कुछ पत्रकारों के मोबाइल नम्बर भी पूर्व सरकारों के इशारे पर लिसनिंग पर लिये जाते थे? अब सूचना सचिव अभिनव कुमार ने पदभार ग्रहण करते ही सूचना अफसरों की बैठक में सरकार के विजन को साफ किया उससे साफ दिखाई दे गया कि अभिनव कुमार एक्शन में आ गये हैं। हैरानी वाली बात है कि जिस पत्रकार कल्याण कोष की बैठकें लम्बे-लम्बे अर्से तक नहीं हो पाती थी उन बैठकों को हर माह आयोजित करने के लिए अभिनव कुमार ने आदेश दिये हैं। पुष्कर सिंह धामी जहां मीडिया से हमेशा मधुर सम्बन्ध बनाकर रखते हैं वहीं अभिनव कुमार जो कि खुद एक बेहतर सोच वाले पत्रकार हैं उनके सूचना सचिव बनने से पत्रकारों व सरकार के बीच कभी कोई दूरी बनेगी ऐसा सम्भव ही नहीं है। अब सरकार के विजन को धरातल पर उतारने के लिए मीडिया जरूर आगे रहेगी क्योंकि राज्य के मुख्यमंत्री जब पारदर्शिता के साथ सरकार चलाने का संकल्प ले चुके हैं तो उनके इस संकल्प में मीडिया भी अपनी आहूति जरूर देगी क्योंकि उत्तराखण्ड के पत्रकार नाकारात्मक सोच की रिर्पोटिंग करने के लिए कभी भी खुद पहल नहीं करते जब तक की उन्हें ऐसा करने के लिए सत्ता के कुछ लोगों द्वारा उकसाया नहीं जाता?

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