संवाददाता
देहरादून। उत्तराखंड के 12वें मुख्यमंत्री की शपथ लेने के बाद युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहली ही कैबिनेट बैठक में ‘यूनिफार्म सिविल कोडÓ पर कमेटी बनाने के लिए कमेटी गठित कर अपने अंदाज को बयां कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पुष्कर सिंह धामी बड़े तीरंदाज हैं। वो जानते हैं की निशाना की ओर लगाना है जिससे एक तीर से कई निशाने साध सकें। मुख्यमंत्री ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में यह प्रस्ताव लाकर अपने चुनाव के दौरान किए वादे को पूरा करने की दशा में कदम बढ़ा दिया। धामी जानते हैं सरकार पूरे पांच साल चलाना टेढ़ी खीर है। जिस प्रकार से बड़े बड़े महारथियों को पछाड़कर मुख्यमंत्री बने हैं वो जानते हैं ये राजनीति के सुरमा धामी की एक गलती को ही पकड़कर लपेट देंगे। इसलिए धामी बड़े फैसले लेकर अपने को मजबूत करके चल रहे हैं। अभी धामी को चुनाव भी लडऩा हैं। भाजपा के बड़े दिग्गज धामी के पुनरू मुख्यमंत्री बनना पचा नहीं पा रहे हैं। धामी जानते हैं की ये महारथी कभी कभी उनको खंडूरी या त्रिवेंद्र बना सकते हैं और बीच में ही सत्ता से बेदखल कर सकते है इसलिए धामी बड़े फैसले लेकर देश की राजनीति में भी अपने को मजबूत बनाना चाहते हैं।
‘यूनिफॉर्म सिविल कोडÓ आरएसएस का पसंदीदा विषय है जिसे वह राममंदिर अ कश्मीर की धारा 37० की तरह पूरा कराना चाहते हैं। धामी ने यह निर्णय लेकर आरएसएस को भी अपने विश्वास में ले लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अब वो बड़े सलाहकार मिल गए हैं जो धामी को देश की राजनीति में स्थापित करना चाहते हैं। धामी को मुख्यमंत्री बनाना मात्र उत्तराखंड को अच्छा नेता देना मात्र नहीं है बल्कि देश की राजनीतिक भविष्य भी भाजपा के मजबूत हाथों में रहे उसको भी ध्यान में रखना है। यूं तो धामी के ये इरादे उत्तराखंड ने उनके अल्प कार्यकाल में ही देख चुका था। अब धामी का ‘विजन 2०25Ó अपने सफलतम मार्ग पर मजबूत कदमों के साथ बढ़ा दिया है। धामी बड़े सधे हुए नेता की तरह ही अपने कदमों को बढ़ा रहे हैं। यूं तो ‘यूनिफॉर्म सिविल कोडÓ लागू करना भी कोई आसान रास्ता नही है लेकिन धामी जानते हैं लोकप्रिय बनना है और मजबूत बनना है तो बड़े फैसले लेने ही पड़ेंगे। धामी अपने चुनाव में किए सभी वादे पूरे करने के संकल्प के साथ ही इस बार आगे बढऩे का रौडमैप तैयार कर चुके हैं। इस बार धामी मनचाही कैबिनेट मिलने से भी उत्साहित हैं। धामी को फैसले लेने में सामंजस्य बैठाने में दिक्कत नही आने वाली है। अपने छह माह के कार्यकाल में धामी को बड़ा अनुभव प्राप्त हुआ। उसके बाद धामी को जिस प्रकार चुनाव हरा दिया गया वो भी धामी के लिए बड़ी संजीवनी है या यह कह सकते हैं की धामी अब घायल शेर की तरह अपने दुश्मन को बेहतर तरीके से परास्त करने के लिए तैयार हो गया है। जिन फैसलों को लेकर धामी सरकार के सीनियर कैबिनेट मंत्री उनको आंखें दिखा दिया करते थे अब ऐसे कई बड़े मंत्रियों को कैबिनेट से बाहर रख धामी ने बड़ी जीत हासिल की है। ‘यूनिफॉर्म सिविल कोडÓ पर फैसला लेना हो या राज्य विकास के लिए अन्य किसी भी कड़े फैसले को लेना हो उसके लिए धामी पूर्ण रूप से स्वतंत्र स्थिति में आ चुके हैं। वर्तमान धामी कैबिनेट में कांग्रेस गोत्र के 1-2 मंत्री इस प्रकार के भी थे जो धामी को आंख दिखाने का काम अभी भी कर सकते थे लेकिन केंद्र के हस्तक्षेप के बाद अब कांग्रेस गोत्री नेता भी बेहतर तालमेल के साथ सरकार के साथ काम करेंगे। ‘यूनिफॉर्म सिविल कोडÓ पर कमेटी बनाने का फैसला साधारण फैसला नहीं है इसको लागू करना भी आसान नहीं है लेकिन कैबिनेट में लाकर प्रस्ताव पास करना अपने मजबूत इरादों को प्रदर्शित करना है। जिसका लाभ भविष्य में सीधे तौर पर पुष्कर सिंह धामी को मिलना तय है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह बता दिया है कि चुनाव के दरमियान उन्होंने जनता से जो वादे किए थे उनको पूरी तरीके से धरातल पर उतारने का काम करेंगे।
