सत्ता का इंतजार होगा खत्म

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में हुये विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस व भाजपा दोनो बडे राजनीतिक दल भले ही अपनी-अपनी जीत को लेकर बडे-बडे दावे कर रहे हों और चुनाव परिणाम को लेकर आये एग्जिट पोल ने राज्यवासियों को सकते में डाल रखा हो लेकिन चुनाव परिणाम से कुछ घंटे पहले दोनो बडे राजनीतिक दलों से लेकर सभी प्रत्याशियों की जान हलक में फंसी हुई है? उत्तराखण्ड के अन्दर लगभग बीस सीटें ऐसी हैं जिन पर दोनो राजनीतिक दलों के दिग्गज चुनाव लड रहे हैं और चुनाव के बाद से ही जिस तरह से भीतरघात का शोर मचा है उससे काफी प्रत्याशियों की धडकनें भी तेज हो रखी हैं। वहीं आम आदमी पार्टी भी राज्य में कोई करिश्मा करेगी ऐसा बिलकुल भी दिखाई नहीं दे रहा है जिससे उत्तराखण्ड के अन्दर आम आदमी पार्टी का भविष्य उज्जवल नजर नहीं आ रहा है? चुनाव परिणाम आने में मात्र कुछ घंटे बचे हैं लेकिन यह भी सच है कि आज रात किसी भी राजनीतिक दल व निर्दलीय प्रत्याशी को नींद नहीं आयेगी और कल दोपहर तक साफ हो जायेगा कि उत्तराखण्ड की जनता ने पांच साल के लिए किसे जनादेश दिया है?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड में हुआ विधानसभा चुनाव इस बार काफी रोमांचक, रहस्यमय बना हुआ है। भाजपा के कई दिग्गजों ने जिस तरह से पांच साल तक अहंकार में सत्ता चलाई उससे उनकी विधानसभा के लोग भी उनसे बेहद खफा दिखाई दिये और उनके मन में इस बात को लेकर बडी नाराजगी थी कि जिस राजनेता को उन्होंने पांच साल तक सत्ता सुख दिया उसने अंहकार की राजनीति करते हुए आवाम को नजर अंदाज कर दिया था। आवाम की ऐसी नाराजगी से भाजपा के आधा दर्जन से अधिक दिग्गज नेताओं को अपनी जीत को लेकर इस बार डर के साये में जीने के लिए मजबूर होना पड रहा है। राजधानी में ही भाजपा के चंद दिग्गज पूर्व विधायक ऐसे हैं जिनसे उनके इलाके की जनता काफी खफा रही और उन्होंने पार्टी प्रत्याशी को अपने वोट की ताकत का उन्हें एहसास कराने का मन बनाकर अपना मत डाला है जिसके चलते ऐसे प्रत्याशियों की हर दिन नींद उडी हुई है? उत्तराखण्ड का जनादेश किस राजनीतिक दल को मिलेगा इसका खुलासा तो कुछ घंटों के बाद से ही होना शुरू हो जायेगा लेकिन इस बार जिस तरह से मतदाताओं ने खामोशी के साथ मतदान किया है उससे दोनो बडे राजनीतिक दलों के माथे पर चिंता की लकीरें पडी हुई हैं हालांकि दोनो राजनीतिक दल अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं और दोनो राजनीतिक दलों के चंद बडे-बडे नेता पूर्ण बहुमत न आने की स्थिति से निपटने के लिए बी-प्लान पर अपनी रणनीति को रात-दिन अमलीजामा पहनाने में लगे हुये हैं। वहीं इस बात को लेकर भी चिंतन और मनन चल रहा है कि इस बार महिलाओं ने मतदान अधिक मात्रा में किया है और अगर महिलाओं ने महंगाई को मुद्दा मानकर अपना मतदान किया है तो भाजपा की हार का खतरा बढ़ता हुआ नजर आयेगा और अगर महिलाओं ने देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उत्तराखण्ड विकास के विजन को देखते हुए अपना मतदान किया है तो फिर भाजपा की जीत के सफर को कांग्रेस रोक नहीं पायेगी? उत्तराखण्ड में कांग्रेस व भाजपा के लगभग बीस दिग्गज नेताओं का राजनीतिक भविष्य दांव पर लगा हुआ है और चुनाव परिणाम से पूर्व जिस तरह से उनके इलाकों से खबरे छनकर बाहर आ रही हैं उससे उनकी जान हलक में फंसी हुई है? उत्तराखण्ड में 2०22 का चुनाव यह संदेश तो दे ही गया कि जो भी राजनेता विधायक बनकर आवाम को अपनी सत्ता की हनक दिखायेगा उसे आवाम सत्ता से बाहर का रास्ता जरूर दिखायेगी? कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को जहां विश्वास है कि उनको पूर्ण बहुमत मिल रहा है और वह सरकार बनायेंगे वहीं सरकार के मुखिया पुष्कर सिंह धामी भी आश्वस्त हैं कि राज्य में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिलेगा और एक बार फिर राज्य में भाजपा की सरकार सत्ता में आयेगी। यहां यह भी सवाल उठ रहे हैं कि अगर भाजपा फिर सत्ता में आई तो यह जीत देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की होगी क्योंकि उन्होंने चुनाव के अन्तिम दौर में जिस तरह से तीन रैलियां कर उत्तराखण्ड के विकास को लेकर अपना विजन आवाम के सामने रखा था उससे उत्तराखण्ड की महिलायें राज्य के विकास को लेकर मोदीमय दिखाई दे रही थी?

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