चुनाव परिणाम से पहले मचा शोर कौन बनेगा मुख्यमंत्री!

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में हुये विधानसभा चुनाव के परिणाम भले ही ईवीएम में कैद हैं और दस मार्च को ही पता चलेगा कि राज्य के अन्दर किस राजनीतिक दल की सरकार पांच साल तक सत्ता पर राज करेगी। वहीं चुनाव परिणाम से पहले राज्य के गलियारों में एक शोर मचा हुआ है कि उत्तराखण्ड का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? राज्यवासी यह गुणा-भाग भी कर रहे हैं कि अगर भाजपा व कांग्रेस में से किसी भी राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत न मिला और उसे अन्य दल व निर्दलीय विधायकों की जरूरत पडी तो वह कौन चेहरे होंगे जो अपनी सरकार बनाने के लिए दूसरे दल व निर्दलीय विधायकों को अपने साथ शामिल करा पायेगा? उत्तराखण्ड के अन्दर यह शोर क्यों और किसने मचवा रखा है कि किसी भी बडे राजनीतिक दल को सम्भवतः पूर्ण बहुमत नहीं मिल पायेगा और सरकार बनाने के लिए किस तरह से भाजपा व कांग्रेस के एक-दो बडे नेता बी-प्लान के तहत अपनी रणनीति को अमलीजामा पहनाने के मिशन में आगे बढे हुये हैं?
उल्लेखनीय है कि उत्तराखण्ड में डबल इंजन की सरकार के साढे चार साल की सत्ता से भले ही राज्यवासियों के मन में एक बडी नाराजगी पनपती रही और उसी के भरोसे कांग्र्रेस के मन में राज्य के अन्दर अपनी सरकार बनने के हिकोले मारती रही लेकिन आखिरी के छह माह के कार्यकाल में जिस तरह से भाजपा हाईकमान ने एक बडा फैसला लेते हुए दो बार के विधायक पुष्कर सिंह धामी को राज्य की सत्ता सौंपी तो उन्होंने राज्यवासियों के मन में साढे चार साल से चली आ रही नाराजगी को अपने सत्ता चलाने के अंदाज से भाजपा की ओर आकर्षित करने का मिशन पूरा किया उसने कांग्रेस के चंद दिग्गज नेताओं की हमेशा धडकनें बढा कर रखी और जब विधानसभा चुनाव आये तो पुष्कर सिंह धामी चुनावी रणभूमि में अपनी विधानसभा सीट की परवाह किये बगैर समूचे राज्य मंे अपने प्रत्याशियों की जीत के लिए वहां प्रचार प्रसार मंे डटे रहे और उन्होंने चुनाव को जिस चाणक्य नीति से 20-20 मैच की तर्ज पर खेला उसने तो कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की नींद उडाकर रख दी? चुनाव के बाद हरीश रावत ने ऐलान किया कि राज्य में उनकी सरकार सत्ता में आ रही है लेकिन उनके मन में ईवीएम व बैलेट पेपर को लेकर जो डर दिखाई दे रहा है उससे भाजपा को उम्मीद नजर आ रही है कि राज्य में भाजपा की सत्ता एक बार फिर पांच साल तक राज करेगी? वहीं उत्तराखण्ड में इस बात को लेकर चुनाव के बाद से शोर मच रहा है कि आखिरकार उत्तराखण्ड का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?

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