उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत का सूर्याधार झील प्रोजेक्ट भ्रष्टाचार का पिटारा

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के वरिष्ठ पत्रकार उमेश कुमार ने एक बार फिर उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत पर सूर्याधार झील प्रोजेक्ट को लेकर उन पर बडा प्रहार करते हुए कहा कि त्रिवेन्द्र रावत का यह प्रोजेक्ट भ्रष्टाचार का पिटारा है और अभी सरकार को इसकी जांच की और आवश्यकता है तथा कईयों को जेल जाना पडेगा।
पत्रकार उमेश कुमार ने कहा कि सूर्याधार झील त्रिवेन्द्र सिंह रावत का ड्रीम प्रोजेक्ट नहीं था और अपने निजी हितों के लिए अपनों को लाभ पहुंचाने के लिए यह प्रोजेक्ट बनाया गया था। उन्होंने कहा कि 2019 और जनवरी 2020 में भी उन्होंने दिल्ली और दून में पत्रकार वार्ता करके बताया कि सूर्याधार लेक घोषित करने से पहले त्रिवेन्द्र सिंह रावत के करीबी लोगों ने वहां औने-पौने दामों में जमीने खरीदी। उसके बाद वहां पर इस प्रोजेक्ट को लॉच कराया जिससे जमीनों की कीमतें आसमान छूने लगे और उनके करोडो के वारे न्यारे हो सके। उमेश कुमार ने कहा कि यह प्रोजेक्ट घोटालों का पिटारा है और अगर इसमें पूरी जांच करेंगे तो यह उत्तराखण्ड की जनता के साथ बहुत बडा खिलवाड है। उन्हांेने कहा कि इन लोगों ने जब त्रिवेन्द्र रावत 18 मार्च 2017 को सीएम बने थे तो मई 2017 में सभी रजिस्ट्रियां संजय गुप्ता और इनके सहयोगी साथियों की थी इसमें धीरेन्द्र पंवार और त्रिवेन्द्र रावत के मीडिया सलाहकार रहे रमेश भट्ट का नाम भी आ रहा था तथा कुछ और के नाम भी सामने आ रहे थे। उमेश कुमार ने कहा कि कुछ रजिस्ट्रियां दिखाई थी कि किन-किन लोगों ने सूर्याधार के आस-पास जमीन खरीदी और उन्होंने एक स्टिंग ऑपरेशन भी जारी किया था और उसमें संजय गुप्ता कह रहे थे कि सीएम ने इसका उद्घाटन इसलिए नहीं किया था कि जमीनों की कीमतें आसमान न छूने पायें और वे जमीने खरीद लें। उमेश कुमार ने कहा कि ये बहुत बडा भ्रष्टाचार का पिटारा है और अभी सरकार को इसमें और जांच करनी चाहिए जिससे कई लोगों को जेल जाना होगा।

 

 

वरिष्ठ पत्रकार उमेश कुमार द्वारा जारी स्टिंग पर लगी मुहर
उत्तराखंड। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के ड्रीम प्रोजेक्ट सूर्यधार झील निर्माण में वित्तीय गोलमाल ,भ्र्ष्टाचार और नियमों के उल्लंघन के मामले में सरकार ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
आपको बता दें कि सबसे पहले इस भ्रष्टाचार के मामले को उठाने वाले वरिष्ठ पत्रकार उमेश कुमार ने उसी वक्त एक स्टिंग जारी करते हुए इस ड्रीम प्रोजेक्ट की पोल खोलकर रख दी थी। इस स्टिंग के बाद बौखलाए तत्कालीन सीएम त्रिवेन्द्र रावत ने उमेश कुमार पर ही झूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार तक करवा दिया था। जिसमें बाद में न्यायालय के माध्यम से उमेश कुमार की जीत हुई और तत्कालीन मुख्यमंत्री को मुंह की खानी पड़ी। सूत्रों के अनुसार अब झील निर्माण से जुड़े छह इंजीनियरों को चार्जशीट दी जा रही है। सूर्यधार झील के निर्माण की प्राथमिक जांच में अनियमितताओं की पुष्टि हो चुकी है।
सूर्यधार में बड़ी अनियमितताएं पाई गई। तय बजट से 12 करोड़ रुपये अधिक का खर्च किए गए । कार्यों की दरों में विसंगतियां पाई गई। डीपीआर बनाने वाली कंपनी को 27 लाख रुपये का गलत भुगतान किया गया। झील की डीपीआर भी त्रुटिपूर्ण पाई गई। यहाँ तक कि तकनीकी परीक्षण में घोर लापरवाही पाई गई। बैराज की ऊंचाई बढ़ाने को लेकर अनुमति भी नहीं ली गयी। तकनीकी सलाहकार की नियुक्ति मनमाने तरीके से कर दी गयी। यानी कि दर्जनों भ्रष्टाचार के मामले इस ड्रीम प्रोजेक्ट में पाए गए हैं। आपको बता दें कि वरिष्ठ पत्रकार उमेश कुमार ने कई भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर किया है जिसकी वजह से कई बार उनपर मुकदमे भी हुए लेकिन अंत मे जीत सत्य की हुई और अब भ्रष्टचारियों पर कार्यवाही होनी तय है।

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