देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का अंदाज चुनाव के बाद ही वैसे ही नजर आ रहा है जैसा चुनाव से पूर्व उनका अंदाज देखने को मिलता था। पुष्कर के अंदाज से राज्य के अन्दर यह बहस भी छिडी हुई है कि राज्य में पुष्कर सिंह धामी की 2०-2० मैच की तरह चली धाकड राजनीति के चलते राज्य में एक बार फिर भाजपा सम्भवत: सत्ता वापसी की ओर अपने कदम आगे बढा सकती है? सीएम चुनाव के बाद से ही आश्वस्त हैं कि उत्तराखण्ड में आयेगी तो भाजपा ही? यकीन के साथ पुष्कर सिंह धामी का यह अंदाज कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की नींद उडाये हुये हैं और यही कारण है कि वह कभी ईवीएम तो कभी बैलेट पेपर को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए नजर आ रही है। सत्ता की चाबी किसके हाथ में होगी इसको लेकर काउंट डाउन शुरू हो रखा है और मुख्यमंत्री आये दिन राज्य के अधिकांश जिलों में अपनों से मुलाकात कर रहे हैं और आज सुबह धामी से मुलाकात करने के लिए तिब्बत के सांसद से लेकर टिहरी की सांसद और उत्तराखण्ड के पूर्व कैबिनेट मंत्री उनके आवास में पहुंचे और वहां कई मुद्दों को लेकर गहन चिंतन मनन हुआ तो भी पुष्कर वहां आश्वस्त दिखाई दिये और उनके माथे पर चिंता की ऐसी कोई लकीर देखने को नहीं मिली जिससे कि उनके मन में इस बात को लेकर कोई भय बना हो कि आखिर दस मार्च को क्या होने वाला है?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य के पहले ऐसे सीएम दिखाई दे रहे हैं जो पदभार ग्रहण करने के बाद से एक दिन भी चैन से नहीं बैठे और उन्होंने राज्यभर के दौरे कर वहां के विकास को लेकर बडा खाका तैयार करने में ही अपना हर पल बिताया। मात्र छह माह के भीतर उन्होंने बीस साल से चली आ रही गढवाल व कुमांऊ की एक बडी खाई को पाटते हुए साफ संदेश दिया था कि अब राज्य में गढवाल-कुमांऊ में कोई भेदभाव नहीं रखा जायेगा और उत्तराखण्ड के अन्दर दोनो राज्य हैं तो फिर विकास की गंगा दोनो मण्डलों में ही समान रूप से बहेगी। उत्तराखण्ड में सिर्फ और सिर्फ मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी की राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है और उनका राजनीतिक भविष्य यह विधानसभा चुनाव तय करेगा लेकिन इसके बावजूद भी पुष्कर सिंह धामी को अपने छह माह के कार्यकाल पर पूर्ण विश्वास है कि राज्य की जनता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उत्तराखण्ड विजन को देखते हुए एक बार फिर राज्य में भाजपा की सत्ता में वापसी के लिए कमल वाले बटन पर जरूर अपना विश्वास जताया है। पुष्कर सिंह धामी की राजनीति जहां दांव पर लगी हुई है वहीं उन्होंने एक बार भी ऐसी नाराजगी नहीं दिखाई कि चुनाव के दौरान पार्टी के अन्दर भीतरघात किया गया है। पुष्कर सिंह धामी तो पहले दिन से ही पार्टी की जीत का दम भर रहे हैं और वह हर मंच से लेकर हर समारोह में एक ही उम्मीद जता रहे हैं कि भाजपा को आवाम ने साठ पार का आशीर्वाद इस बार दे दिया है। हैरानी वाली बात है कि एक ओर तो राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को राज्य में भाजपा की पुन: सत्ता वापसी का पूरा विश्वास है वहीं पार्टी के ही कुछ पूर्व मंत्री व विधायक यही रोना रो रहे हैं कि उनके साथ भीतरघात हुआ है। ऐसे पूर्व मंत्री व विधायकों को कौन सा ऐसा दृश्य दिखाई दे गया जिससे कि वह यही राग अलापते रहे कि उनके साथ भीतरघात हुआ है जबकि राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को विश्वास है कि राज्य में किसी भी पूर्व मंत्री व विधायक के साथ कोई भीतरघात नहीं हुआ है। चुनाव सम्पन्न होने के बावजूद भी पुष्कर सिंह धामी राज्य के अन्दर अपने नेताओं व कार्यकर्ताओं से मिलकर मन्दिरों में पार्टी की जीत का आशीर्वाद मांगते हुए दिखाई दे रहे हैं और उनके मन में सत्ता वापसी को लेकर जो विश्वास पनप रखा है उसने कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को बेचैन कर रखा है। आज सुबह मुख्यमंत्री आवास में धर्मशाला के निर्वासित तिब्बती सांसद तेनजिन जिदगल और तिब्बती वैलफेयर के संयुक्त सचिव ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की वहीं टिहरी की सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह ने भी आज सुबह मुख्यमंत्री आवास में पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर राज्य के विकास को लेकर मंथन किया तो वहीं उत्तराखण्ड के पूर्व कैबिनेट मंत्री बिशन सिंह चुफाल ने भी मुख्यमंत्री आवास में पुष्कर सिंह धामी से एकांत में मुलाकात कर उनके साथ कई मुद्दों को लेकर मंथन व चिंतन किया और राज्य में सरकार की वापसी को लेकर भी मंथन किया।
