राजेश शर्मा
देहरादून। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जिस तरह से अपने काम को अंजाम दे रहे हैं शायद ही कोई विपक्ष का नेता हो जिसके पास उनके ऊपर लगाने के लिए आरोप हों या फिर चर्चा के लिए कोई मुद्दा लेकिन आए दिन टीवी पर आ रहे सर्वे आखिरकार आ कहां से रहे हैं और इन सब को बनाने वाला कौन कारीगर है और वह किस हिसाब से सर्वे कर रहा है अब इसका जवाब उत्तराखंड की जनता भी मांग रही है। पहले ऐसा होता था कि सर्वे करने वाले कंपनी या न्यूज चैनल मतदान से पहले एक सर्वे करवाकर यह जानने की कोशिश करते थे कि आखिरकार जनता का मूड क्या है लेकिन टीवी चैनलों पर हर 15 दिन बाद आ रहे सर्वे और उन 15 दिनों के बाद जो समीकरण सर्वो में बदलते हुए दिखाई दे रहे हैं उससे अब यही लगता है कि यह सर्वे मैच किसी को भी ऊपर और किसी को भी नीचे दिखाने के लिए करवाए जा रहे हैं यह वही सर्वे वाले हैं जिन्होंने साल 2०17 में हरीश रावत को 4० से ज्यादा सीटें दिखा कर दोबारा मुख्यमंत्री बनता हुआ दिखाया था अब यही सर्वे एक बार फिर से पुष्कर सिंह धामी को नीचे और हरीश रावत को ऊपर दिखा रहे हैं। इन सर्वर पर कितना विश्वास किया जा सकता है इसका अंदाजा यही है कि इन 6 महीनों में चार बार सर्वे हुए हैं जिनमें त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री रहते हुए सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री दिखाया था उसके बाद तीरथ सिंह रावत के 1 महीने के कार्यकाल में उन्हें कुंभ के बाद लिए गए फैसले में सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री बता दिया था अब पुष्कर सिंह धामी जैसे ही मुख्यमंत्री बने तो शुरुआती दिनों में पुष्कर सिंह धामी को प्रदेश का सबसे बड़ा चेहरा बता कर 38 प्रतिशत लोकप्रियता में रखा गया था जबकि 22 प्रतिशत हरीश रावत को रखा गया था। तीन महीने गुजर जाने के बाद एक बार फिर से सर्वे हुए और उसमें प्रतिशत ओं का मार्जन फिर से ऊपर नीचे दिखाया गया। हैरानी की बात यह है कि इन सर्वे में तीसरे नंबर दूसरे नंबर और चौथे नंबर पर कभी-कभी उन नेताओं को भी दिखाया गया है जो सिर्फ दिल्ली से बैठ कर अपना काम कर रहे हैं सर्वे कंपनी को यह भी बताना चाहिए कि आखिरकार उन्होंने एक शहर में कितने लोगों से बातचीत की है अगर आप हमारी खबर पढ़ रहे हैं तो आप यकीन करें और बताएं कि क्या किसी सर्वे कंपनी ने आपसे संपर्क किया या आपके परिवार से संपर्क किया आप मन में यही सोचेंगे कि आज तक तो ऐसा हुआ नहीं तो आखिरकार यह सर्वे होते कहां हैं क्या यह सर्वे उन्हीं लोगों को ऊपर नीचे दिखाते हैं जिनसे सर्वे कंपनियों की सांठगांठ होती है या फिर यह सर्वे इसी कमरे में बैठकर 2-4 फोन कॉल लगाने से ही हो रहे हैं।
कल एक बार फिर से एक टीवी न्यूज चैनल ने सर्वे दिखाया जिसमें सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री का चेहरा हरीश रावत को दिखाया उसके बाद पुष्कर सिंह धामी को दिखाया फिर अनिल बलूनी को दिखाया और फिर अरविंद केजरीवाल को दिखाया सवाल यह खड़ा होता है कि आखिरकार यह सर्वे का सर्वर कौन से शहर में लगा हुआ है । सर्वे से याद आया कि यह वही सर्वे वाले हैं जिन्होंने कोलकाता में ममता बनर्जी को तीसरे नंबर की तो कभी दूसरे नंबर की पार्टी दिखाया था और बीजेपी को सबसे अधिक सीटों पर दिखाकर रोज सुबह शाम अपने टीवी स्टूडियो में बैठकर गाल बजा रहे थे और आखिरकार सभी के सभी सर्वे धरे के धरे रह गए और जीत उसी की हुई जिसने कोलकाता की नब्ज को पकड़ा कोलकाता के विकास को जाना काम किया अगर ममता बनर्जी इन सर्वे के भरोसे रहती तो शायद ही चुनाव में इतने मजबूत ढंग से उतरती सर्वे के बाद ना केवल ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बने बल्कि उपचुनाव में भी ममता बनर्जी की जीत हुई एक बार फिर से अब उत्तराखंड में सर्वे की दुकान लेकर नए-नए लोग आ रहे हैं अब देखना होगा कि इन लोगों का सर्वे सरवाइव करने लायक है या फिर नहीं?
