हरदा के शासनकाल में एक जिले में चौबीस घंटे होता था अवैध खनन!

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में हरदा शासनकाल में नदियों की सफाई के नाम पर जिस तरह से पोकलैंड व जेसीबी मशीनों से रात-दिन नदियों का सीना चीरा जाता था उसकी आहट क्या कभी हरीश रावत को सुनाई नहीं दी थी? उत्तराखण्ड के हर जिले में अवैध खनन की हरीश राज में कौन राजनेता वसूली करता था यह किसी से छिपा नहीं है और उस शासनकाल में अवैध खनन का काला कारोबार इतने उफान पर था कि उसके खिलाफ आवाज उठाने की कोई हिम्मत नहीं जुटाता था और जब भी भाजपा अवैध खनन को लेकर शोर मचाती थी तो कांग्रेस यही राग अलापती थी कि अगर नदियों की सफाई न की गई तो उससे किसानों की खेती बर्बाद हो जायेगी। गजब बात तो यह है कि पुष्कर सिंह धामी ने मात्र पांच माह पूर्व सत्ता संभाली और उन्होंने अवैध खनन पर नकेल लगाने के लिए सबसे पहले वैध खनन को शुरू कराया तो कांग्रेस ने उन्हें खनन प्रेमी मुख्यमंत्री का तमका देना शुरू कर दिया जिससे सवाल खडे हो रहे हैं कि क्या धामी ने वैध खनन शुरू कराकर उत्तराखण्ड के अन्दर कोई बडा पाप कर दिया जिसके चलते उन्हें कांग्रेस खनन को लेकर उनकी घेराबंदी कर रही है?
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत पार्टी के सभी विधायकों व नेताओं ने विधानसभा के बाहर धरना देकर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को घेरने के लिए हाथों में तख्तियां लेकर उस पर संदेश लिखा हुआ था कि पुष्कर सिंह धामी खनन प्रेमी मुख्यमंत्री हैं। सवाल खडा हो रहा है कि हरीश रावत के शासनकाल में तो राज्य की नदियों के अलावा नालों में सफाई के नाम पर जिस तरह से रात-दिन अवैध खनन का तांडव मचता था और इस अवैध खनन का काम पर्दे के पीछे से पार्टी के एक बाहुबली नेता की देखरेख में होता था और उसकी वसूली भी वह करते थे ऐसे हमेशा आरोप उस राजनेता पर लगते रहे लेकिन हरीश रावत राज में कभी भी अवैध खनन का तांडव बंद नहीं हुआ था जिस कारण भाजपा हमेशा हरीश रावत सरकार को अवैध खनन पर घेरती रही। हैरानी वाली बात है कि भाजपा शासनकाल में त्रिवेन्द्र रावत की सत्ता के दौरान राज्य की नदियों से अवैध खनन का काला कारोबार लगभग चार साल तक चलता रहा और इस अवैध खनन पर हरीश रावत व कांग्रेसी नेताओं ने कोई आक्रामक रूख दिखाया हो ऐसा भी देखने को नहीं मिला। और तो और त्रिवेन्द्र रावत के एक रिश्तेदार का अवैध खनन को लेकर बडा स्टिंग हुआ और उस स्टिंग के उजागर होने के बाद राज्य में काफी भूचाल भी मचा लेकिन कांग्रेस के दिग्गज नेताओं की उस स्टिंग पर रहस्यमय चुप्पी हमेशा कई सवालों को जन्म देती रही। उत्तराखण्ड में पांच माह पूर्व पुष्कर सिंह धामी ने सत्ता संभाली और साफ संदेश दिया कि राज्य के अन्दर माफिया राज का अंत होगा तो अवैध खनन, भू-माफियाओं में खलबली मच गई और अवैध खनन पर लगाम के लिए धामी ने राज्य के अन्दर वैध खनन की शुरूआत कराई जिससे कि आम इंसान को रेत-बजरी महंगे दामों पर न मिले। इतना ही नहीं राज्य के मुख्य सचिव डा. एस.एस संधु ने सभी जिलों के प्रभारियों और राज्य के डीजीपी को पत्र लिखकर अवैध खनन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने के आदेश दिये थे।
हैरानी वाली बात है कि हरीश रावत व कांग्रेस के दिग्गज नेता जो कि त्रिवेन्द्र शासनकाल में अवैध खनन पर हमेशा मौन धारण किये रहते थे वह नेता पुष्कर ंिसंह धामी के बढते कदमों से इतने सहमें हुये दिखाई दे रहे हैं कि अब वह पुष्कर ंिसह धामी को खनन प्रेमी मुख्यमंत्री बताकर शोर मचा रहे हैं। सवाल खडे हो रहे हैं कि हरीश रावत के राज में एक जिले के अन्दर एक मंत्री चौबीस घंटे अवैध खनन का खुला तांडव कराते थे और वहां के डम्परों की अगर गनती करें तो वहां व्यक्तिगत वाहनों से अधिक डम्परों की संख्या होगी ऐसे में हरीश रावत का यह तर्क कि राज्य को लुटने नहीं देंगे अपने आप में एक हास्यपद जुमला ही नजर आता है।

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