राजधानी में हर्षोल्लास से मना रक्षाबंधन का त्यौहार

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देहरादून(नगर संवाददाता)। राजधानी में रक्षाबंधन का त्यौहार आज हर्षोल्लास से मनाया गया और इस दौरान रक्षा बंधन के उपलक्ष्य में भाई और बहन का पवित्र रिश्ता ओर भी मजबूत बना, जिसमे बहनों ने अपने भाईयों की कलाई में राखियां बांधकर जहां उनकी लम्बी उम्र की कामना की वहीं दूसरी ओर उन्होंने भाईयों से सुरक्षा का वचन लिया। इस दौरान लोगों व विशेषकर बच्चों ने जमकर पंतगबाजी का भी आनंद लिया और मिठाईयों की भी जमकर खरीददारी की गई।
यहां उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी में भी रक्षा बंधन का त्यौहार हर्षोल्लास से मनाया गया। इस अवसर पर बहनों ने भाईयों की कलाई में राखियां बांधकर अपनी सुरक्षा का वचन लिया और राखी बंाधने के साथ भाईयों ने बहनों को जहां सुरक्षा का वचन दिया वहीं भाईयों ने अपनी बहनों को तोहफे भी दिए। इस दौरान राखी बांधने के समय से भले ही बहने परेशान दिखी क्योंकि आज के दिन राखी बांधने का शुभ मुहूर्त पूरे दिनभर रहा। राजधानी में इस त्यौहार को लेकर काफी कोरोना वायरस कोविड 19 के चलते हुए उत्साह दिखाई दिया और राखी के त्यौहार में एक बार फिर भाईयों ने खुले आसमान में पतंगे उड़ाई और इस त्यौहार में काफी आनन्द उठाया।
पंडितों की मानें आज पूरे दिन शुभ मुहूर्त रहा और कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने देवताओं की रक्षा के लिए कश्यप ऋषि की पत्नी अदिति के घर वामन अवतार लिया था। राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी, पृथ्वीलोक का राज्य बलि से छीन लिया। उसे पाताल लोक भेजा और स्वयं भगवान पाताललोक के सभी दरवाजों के द्वारपाल बने। कहावत है कि नारद के कहने पर मां लक्ष्मी बैकुंठ से पाताल लोक गईं और राजा बलि से मिली। रक्षाबंधन का दिन यानी श्रावणी पूर्णिमा का दिन था। राजा को मां लक्ष्मी ने एक सूत्र बांधा और कहा कि आज से आप अमर हो गए हो।
पंडितों की माने तो मान्यता है कि इस पर राजा बलि बोले, मेरी कोई बहन नहीं है। श्रावणी मास के दिन तुम आई हो, मुझे रक्षासूत्र बांधा है। आज से तुम मेरी बहन हो, कुछ उपहार मांगों। पंडितों ने बताया कि लक्ष्मी बोली, भाई मेरे पास तो सब कुछ है राजपाठ, धन संपदा, लेकिन कोई द्वारपालक रक्षक नही है। इस अवसर पर पंडितों के अनुसार कि आप मेरे भाई हो, अपना द्वारपाल मुझे दे दो। ऐसे में पुराणों के अनुसार भी रक्षाबंधन का महत्व माना जाता है। पंडितों की माने तो रक्षाबंधन पर्व पर आज कोई भ्रदा नहीं है और पूरे दिन राखी में शुभ मुहूर्त है। पंडितों के अनुसार के अनुसार शूभ मुहूर्त के अनुसार राखी पहनाई गई। वहीं दूसरी ओर बाजार में मिष्ठान्न भंडारों में भी काफी भीड़ देखने को मिली, जिसके सापेक्ष मिष्ठान भंडारों द्वारा अपने यहां मिठाईयों के भावों को भी बढ़ाया गया और बाजारों में कई स्थानों पर कोरोना की गाइडलाइन का पालन भी नहीं किया गया।

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