धाामी की सख्ती का कमाल

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सड़कों पर विकास की चमक
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। किसी भी प्रदेश की तरक्की का असली चेहरा उसकी सड़कों पर दिखाई देता है। सड़कें केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने का माधयम नहीं होतीं, बल्कि वे विकास, व्यापार, पर्यटन और आम आदमी की उम्मीदों को जोड़ने वाली जीवनरेखा होती हैं। उत्तराखंड में मुख्यमं=ी पुष्कर सिंह धाामी ने सड़कों की दशा सुधाारने को जिस गंभीरता से अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है, उसने यह संदेश दिया है कि विकास केवल सरकारी फ़ाइलों में नहीं, बल्कि धारातल पर दिखाई देना चाहिए। मुख्यमं=ी अफ़सरों को जब भी काम करने के लिए एक समय सीमा देते हैं तो उसके बाद वह उस काम पर अपनी रडार लगा लेते हैं और वह इस बात को परखने के लिए गोपनीय रूप से आगे रहते हैं कि उनके आदेश का किस तरह से पालन हो रहा है। मुख्यमं=ी के शासनकाल में अफ़सरों में इतना दुसाहस नहीं कि वह अपने मुखिया की बात को हवा में उडा दें क्योंकि उन्हें इस बात का इल्म रहता है कि वह मुख्यमं=ी द्वारा दी गई समय सीमा में काम पूरा नहीं कर पायेंगे तो उन्हें इसका बडा खामियाजा भुगतना पडे़गा। मुख्यमं=ी की सख्ती का कमाल है कि उत्तराखण्ड की सड़कें मखमली हुई और उनमें विकास की चमक जो अवाम ने देखी उससे साफ़ नजर आ गया कि मुख्यमं=ी जो कहते हैं वो करते हैं।
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में सड़क निर्माण और उनका रखरखाव हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। कहीं दुर्गम पहाड़, कहीं भूस्खलन तो कहीं बरसात के कारण क्षतिग्रस्त मार्ग। इन परिस्थितियों के बावजूद मुख्यमं=ी धाामी ने सड़क सुधाार कार्यों में तेजी लाने और अधिाकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया है। प्रदेश की सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने के लिए निर्धाारित समयसीमा और लगातार समीक्षा की व्यवस्था उनके प्रशासनिक दृष्टिकोण की गंभीरता को दर्शाती है। मुख्यमं=ी धाामी की कार्यशैली की एक विशेषता यह रही है कि वह योजनाओं की घोषणा के साथ उनके क्रियान्वयन पर भी जोर देते हैं। सड़कों के मामले में भी उन्होंने संबंधिात विभागों को स्पष्ट संदेश दिया कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयब)ता से समझौता नहीं होना चाहिए। शासन स्तर पर अधिाकारियों द्वारा सुबह-सवेरे सड़कों का निरीक्षण किया जाना इस बात का संकेत है कि मुख्यमं=ी के निर्देशों को प्रशासनिक प्राथमिकता दी जा रही है। आज उत्तराखंड में बेहतर सड़क संपर्क का महत्व पहले से कहीं अधिाक बढ़ गया है। चारधााम यात्र हो, पर्यटन व्यवसाय हो, पहाड़ों से मैदानों तक कृषि उत्पाद पहुंचाने की व्यवस्था हो अथवा दूरदराज के गांवों में स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधााएंकृहर क्षे= की प्रगति मजबूत सड़क नेटवर्क पर निर्भर करती है। धाामी सरकार द्वारा सड़क सुधाार और संपर्क सुविधााओं पर दिया जा रहा जोर प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
मुख्यमं=ी पुष्कर सिंह धाामी ने यह समझने का प्रयास किया है कि जनता को विकास के लंबे-चौड़े भाषणों से अधिाक आवश्यकता ऐसी सड़कों की है, जिन पर वह सुरक्षित और सुविधााजनक यात्र कर सके। किसी गांव की सड़क सुधारती है तो किसान की मंडी तक पहुंच आसान होती है, किसी शहर का मार्ग बेहतर होता है तो व्यापार को गति मिलती है और किसी दुर्गम क्षे= की सड़क दुरुस्त होती है तो मरीज को अस्पताल पहुंचाने की राह सुगम बनती है। यह भी सच है कि पूरे उत्तराखंड की प्रत्येक सड़क को मखमली और गड्ढामुक्त घोषित कर देना अभी जल्दबाजी होगी। पहाड़ी क्षेत्रें की भौगोलिक परिस्थितियां और निर्माण की गुणवत्ता जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। लेकिन मुख्यमं=ी द्वारा निर्धाारित समयसीमा, निरीक्षण और जवाबदेही पर दिया गया जोर निश्चित रूप से सकारात्मक पहल है। इस अभियान की वास्तविक सफ़लता तभी मानी जाएगी, जब सुधाार कार्य लंबे समय तक टिकाऊ साबित हों और दूरस्थ क्षेत्रें तक उनका लाभ पहुंचे।
उत्तराखंड की सड़कों को मखमली बनाने का सपना केवल डामर बिछाने से पूरा नहीं होगा, बल्कि मजबूत निर्माण, ईमानदार निगरानी और निरंतर रखरखाव से साकार होगा। मुख्यमं=ी पुष्कर सिंह धाामी ने इस दिशा में प्रशासन को सक्रिय करने का जो संकल्प दिखाया है, वह सराहनीय है। अब इस संकल्प को प्रदेश की हर सड़क पर स्थायी परिणाम में बदलना ही उनकी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धिा होगी।

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