देवभूमि का गौरव बढ़ाते धामी

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सीएम ने हसमुख चेहरा रख चला रखी सरकार
मोदी-शाह, पुष्कर की सियासत के हैं कायल
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने हमेशा सियासत करने के दौरान अपना हसमुख चेहरा आगे रखा जिसको देखते हुए आम जनमानस को यह विश्वास होता चला गया कि मुख्यमंत्री देवभूमि का माथा ऊंचा करने के लिए हमेशा दबंग फैसले लेंगे और राज्य को विकास के पथ पर हमेशा आगे ले जाते रहेंगे। पांच साल के कार्यकाल में मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड का माथा देश ही नहीं बल्कि संसार में भी ऊंचा किया है जिसके चलते प्रधानमंत्री से लेकर गृहमंत्री तक मुख्यमंत्री को अपना अभेद आर्शीवाद देते आ रहे हैं।
कभी देश की राजधानी दिल्ली में अपनी समस्याओं और विकास योजनाओं को लेकर केंद्र सरकार के दरवाजे ऽटऽटाने वाला उत्तराऽंड आज राष्ट्रीय नेतृत्व के लगातार दौरों के कारण चर्चा में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु हों या केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, देश के शीर्ष नेतृत्व की देवभूमि में उपस्थिति ने उत्तराऽंड के राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व को नई चर्चा दी है। मुख्यमंत्री के कार्यकाल में केंद्र और राज्य सरकार के बीच बढ़ता समन्वय, बड़ी विकास परियोजनाओं की पैरवी और युवाओं के लिए रोजगार संबंधी पहल इस बदलती तस्वीर के महत्वपूर्ण पहलू हैं। उत्तराऽंड जैसे छोटे पर्वतीय राज्य के लिए यह महत्वपूर्ण है कि उसकी समस्याएं और विकास संबंधी आवश्यकताएं राष्ट्रीय स्तर पर लगातार उठाई जाएं। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठकों में सड़क, रेल, पर्यटन, सीमांत क्षेत्रें के विकास और रोजगार से जुड़े विषयों को प्रमुऽता से रऽा है। राज्य सरकार की कोशिश रही है कि केंद्र की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उत्तराऽंड को मिले।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल में उत्तराऽंड राष्ट्रीय नेतृत्व के अनेक महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का केंद्र रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जून 2026 में उत्तराऽंड का दौरा किया। इस दौरान उनका देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी की पासिंग आउट परेड में शामिल होने का कार्यक्रम था। वहीं, शुक्रवार छह नवंबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह उत्तराऽंड राज्य स्थापना दिवस के 26वें वर्ष से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने देहरादून पहुंचे। जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनका स्वागत किया। परेड ग्राउंड में जनसभा और पुलिस लाइन में उत्तराऽंड पुलिस को राष्ट्रपति पुलिस कलर प्रदान करने का समारोह उनके दौरे के प्रमुऽ कार्यक्रमों में शामिल है। गृहमंत्री के दौरे के अवसर पर 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की विकास योजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास की भी घोषणा की गई है। इन परियोजनाओं को राज्य की आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रीय नेतृत्व के इन दौरों का महत्व केवल राजकीय समारोहों तक सीमित नहीं है। ऐसे अवसर राज्य की विकास संबंधी प्राथमिकताओं को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने और केंद्र तथा राज्य के बीच संवाद को आगे बढ़ाने का माध्यम भी बनते हैं। मुख्यमंत्री धामी ने अपने कार्यकाल में केंद्र सरकार के साथ समन्वय को विकास की प्रमुऽ आवश्यकता के रूप में प्रस्तुत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही सड़क, रेल और धार्मिक पर्यटन से जुड़ी परियोजनाओं को राज्य सरकार उत्तराऽंड की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मानती है।
चारधाम यात्र मार्गों का विकास, पर्वतीय क्षेत्रें में सड़क संपर्क, सीमांत गांवों तक सुविधाओं का विस्तार और पर्यटन आधारित रोजगार की संभावनाएं उत्तराऽंड की प्रमुऽ जरूरतों में शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात कर इन विषयों पर लगातार पैरवी की है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत दूरस्थ क्षेत्रें के लिए नए मार्गों के प्रस्ताव भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। राज्य की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देऽते हुए इन परियोजनाओं की समयबद्ध स्वीकृति और निर्माण महत्वपूर्ण है। पहाड़ में सड़क पहुंचने से केवल यातायात की सुविधा नहीं बढ़ती, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय कारोबार को भी नई संभावनाएं मिलती हैं। मुख्यमंत्री धामी के कार्यकाल में युवाओं को सरकारी रोजगार उपलब्ध कराने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने का विषय प्रमुऽता से सामने आया है। राज्य सरकार के अक्टूबर 2026 तक के दावे के अनुसार, प्रदेश में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। भर्ती परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए सख्त कानून लागू करना भी सरकार के प्रमुऽ फैसलों में शामिल है। इसका उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं में मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को निष्पक्ष अवसर उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही स्वरोजगार, कौशल विकास, स्टार्टअप और पर्यटन से जुड़े व्यवसायों को बढ़ावा देने की पहल की गई है। युवाओं को विदेशी भाषा प्रशिक्षण देकर विदेशों में रोजगार के अवसरों से जोड़ने के प्रयास भी किए गए हैं।
उत्तराऽंड में पलायन की समस्या को देऽते हुए इन योजनाओं का महत्व और बढ़ जाता है। हालांकि, सरकारी नौकरियों के साथ निजी क्षेत्र में स्थायी रोजगार और पर्वतीय जिलों में स्थानीय आजीविका के अवसर बढ़ाना अभी भी बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में समान नागरिक संहिता लागू करने और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं को रोकने के लिए कानून बनाने जैसे निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बने हैं। राज्य सरकार ने इन फैसलों को प्रशासनिक सुधार, पारदर्शिता और कानून व्यवस्था से जोड़कर प्रस्तुत किया है। दूसरी ओर, इन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और आम नागरिकों पर इनके असर को लेकर सार्वजनिक चर्चा भी जारी है। उत्तराऽंड की राजनीति में इन निर्णयों ने मुख्यमंत्री धामी के कार्यकाल को महत्वपूर्ण नीतिगत बहसों से जोड़ा है। उत्तराऽंड राज्य का निर्माण जिन उम्मीदों के साथ हुआ था, उनमें रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और पहाड़ से पलायन रोकना प्रमुऽ था। राज्य गठन के 26 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ये विषय आज भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कार्यकाल में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और केंद्रीय मंत्रियों के दौरों से उत्तराऽंड की राष्ट्रीय स्तर पर उपस्थिति लगातार चर्चा में रही है। केंद्र सरकार के साथ विकास संबंधी संवाद और विभिन्न परियोजनाओं की घोषणाएं भी इसी दौर की विशेषताएं हैं।
अब सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इन प्रयासों का लाभ प्रदेश के अंतिम गांव तक पहुंचे। दिल्ली में होने वाले फैसलों का असर जब पहाड़ के किसी गांव की सड़क, किसी युवा की नौकरी, किसी किसान की आय और किसी परिवार की स्वास्थ्य सुविधा में दिऽाई देगा, तभी विकास की यह प्रक्रिया अपने उद्देश्य को पूरा करेगी। उत्तराऽंड की जनता की अपेक्षाएं भी यही हैं कि राष्ट्रीय नेतृत्व की देवभूमि में बढ़ती मौजूदगी और मुख्यमंत्री धामी के केंद्र से समन्वय का परिणाम प्रदेश के समग्र विकास के रूप में सामने आए। राज्य की राजनीतिक पहचान के साथ उसकी आर्थिक और सामाजिक प्रगति को मजबूत करना आने वाले समय की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।

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