सरदार पटेल की जयंती पर हुंकार

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नेताओं की गुलामी छोड़ें अफसर
उत्तराखण्ड की नौकरशाही पर तीखा प्रहार
जनता के लिए लड़ने वाले चाहिए अफसर
देहरादून। उत्तराखंड की नौकरशाही को लेकर राजधानी देहरादून से एक ऐसी आवाज उठी है, जो सत्ता के गलियारों से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली तक गंभीर सवाल खड़े करती है। सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने दो टूक कहा कि प्रदेश को ऐसे अधिकारियों की जरूरत है, जो राजनेताओं की गुलामी करने के बजाय संविधान के प्रति निष्ठावान रहकर जनता के हित में फैसले लेने का साहस दिखाएं। अफसरों की जवाबदेही जनता के प्रति होनी चाहिए, न कि राजनीतिक आकाओं के प्रति।
आज पटेल पार्क में संयुक्त नागरिक संगठन के तत्वावधान में आयोजित श्देशभक्त को देशभक्तों के श्रद्धासुमनश् कार्यक्रम में सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वक्ताओं ने उत्तराखंड की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में नौकरशाही का काम सत्ता की इच्छाओं को पूरा करना नहीं, बल्कि संविधान और कानून के अनुरूप निष्पक्ष निर्णय लेना है। वक्ताओं ने कहा कि सरदार पटेल ने जिस मजबूत और स्वतंत्र प्रशासनिक व्यवस्था की नींव रखी थी, उसका मूल उद्देश्य अधिकारियों को राजनीतिक दबाव से मुक्त रखकर देशहित में निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करना था। आज आवश्यकता इस बात की है कि उत्तराखंड के अधिकारी अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को समझें और जनता की समस्याओं के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि प्रशासनिक अधिकारी राजनीतिक प्रभाव में निर्णय लेने लगेंगे तो आम जनता को न्याय कैसे मिलेगा? ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों को निर्भीक होकर काम करने का वातावरण मिलना चाहिए। अफसरों को यह समझना होगा कि उनकी कुर्सी किसी नेता की कृपा नहीं, बल्कि जनता की सेवा और संविधान के प्रति जवाबदेही का दायित्व है। वक्ताओं ने सरदार पटेल के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद संविधान सभा में जब भारतीय सिविल सेवाओं की निष्ठा पर सवाल उठे थे, तब पटेल ने इन सेवाओं का मजबूती से समर्थन किया था। उनका विश्वास था कि मजबूत लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और साहसी प्रशासनिक व्यवस्था अनिवार्य है। संयुक्त नागरिक संगठन के प्रतिनिधियों ने बताया कि संगठन पिछले दस वर्षों से राष्ट्रीय एकता, सांप्रदायिक सौहार्द, सामाजिक सद्भाव और जनहित के मुद्दों पर विभिन्न संस्थाओं को एक मंच पर लाने का कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम में डॉ. मुकुल शर्मा, कैप्टन पदम सिंह थापा, डॉ. एस. स्वामी चंद्रा, मुकेश नारायण शर्मा, डॉ. राकेश डंगवाल, मोहन सिंह खत्री, डॉ. महावीर सिंह बिष्ट, गिरीश चंद्र भट्ट, पद्मेंद्र सिंह बर्थवाल, सुशील त्यागी, सुशील भंडारी, नरेश चंद्र कुलाश्री, राजीव खनसाली, दिनेश भंडारी, उमेश्वर सिंह रावत, अवधेश शर्मा, प्रकाश नागिया, शांति प्रसाद नौटियाल, पिंकी बिष्ट, गीता चौधरी, अंकित सिंह, डॉ. ऊर्जा आहूजा, वैद्य साक्षी मित्तल, कृष्ण गोदियाल, राजेंद्र श्रीवास्तव, नीरज उनियाल और गोविंद सिंह गुसाईं सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में उत्तराखंड आंदोलनकारी मंच की सुलोचना भट्ट के पति के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। संयुक्त नागरिक संगठन के सचिव अवधेश शर्मा ने कहा कि सरदार पटेल के आदर्शों को वास्तविक श्रद्धांजलि तभी मिलेगी, जब प्रशासनिक व्यवस्था में निष्पक्षता, ईमानदारी और जनता के प्रति जवाबदेही सर्वोपरि होगी।

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