उत्तराखण्ड में कांग्रेस के छत्रप बने राहुल के बब्बर शेर

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प्रमुख संवाददाता
देहरादून। लोकसभा में नेता विपक्ष ने देश के अन्दर एक नई कांग्रेस का जन्म कर दिया है और नई कांग्रेस के अन्दर जोश की जो ज्वाला राहुल ने भरी है उसी के चलते आज नई कांग्रेस राज्यों के अन्दर क्रांति की एक नई मसाल जलाने के लिए आगे बढ़ गई है। राहुल की नजर उत्तराखण्ड कांग्रेस के छत्रपों पर पड़ी तो उन्हें दो टूक संदेश दिया गया कि अब कांग्रेस में वही राजनेता राजनीति करेगा जो बब्बर शेर की तरह भाजपा के सामने खडा होने का साहस दिखायेगा। राहुल के इस संदेश के बाद राज्य के अन्दर एक नई कांग्रेस का जन्म होता दिखाई दे रहा है और अब कांग्रेस के तमाम छत्रप राहुल के बब्बर शेर बनकर सरकार के कार्यकाल में हो रहे भ्रष्टाचार पर उसे दहाडऩे के लिए सड़कों से लेकर राजभवन तक सरकार को ललकारने के लिए आगे आये तो उससे साफ नजर आ गया कि कांग्रेस के कई छत्रपों ने अब अपने ऊपर लगा मित्र विपक्ष का दाग धो दिया है।
उत्तराखंड की सियासत में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं पर लंबे समय से मित्र विपक्ष होने के आरोप लगते रहे हैं। कभी गुटबाजी, कभी आपसी खींचतान और कभी बड़े नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं ने कांग्रेस की एकजुटता पर सवाल खड़े किए। लेकिन अब राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी के भीतर बदलती राजनीतिक रणनीति को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। वर्ष 2०27 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के दिग्गजों को एक मंच पर लाने और भाजपा सरकार के खिलाफ साझा मोर्चा तैयार करने की कोशिशों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Óउत्तराखंड कांग्रेस में सबसे बड़ा सवाल हमेशा से उसके छत्रपों की आपसी एकजुटता का रहा है।Ó पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश के अन्य वरिष्ठ नेताओं और संगठन के बीच राजनीतिक तालमेल को लेकर समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं। अब राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी अनुशासन और सामूहिक नेतृत्व पर जोर दिए जाने को पुराने राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी के भीतर भविष्य में बगावत की कोई संभावना नहीं होने का दावा करना अभी जल्दबाजी होगी। Óप्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा की भूमिका भी 2०27 के चुनावी मिशन के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।Ó संगठन को मजबूत करने, वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय बढ़ाने और सरकार के खिलाफ जनहित के मुद्दों पर कांग्रेस की सक्रियता बनाए रखने की रणनीति चर्चा में है।
अंकिता भंडारी प्रकरण, भ्रष्टाचार के आरोप, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर कांग्रेस भाजपा सरकार से लगातार जवाब मांग रही है। कांग्रेस की कोशिश इन मुद्दों को विधानसभा चुनाव से पहले व्यापक राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाने की है। दूसरी ओर भाजपा सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी कार्रवाई और विकास कार्यों को प्रमुखता से सामने रखती रही है। Óअब सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल राहुल गांधी की भूमिका को लेकर है।Ó क्या वह उत्तराखंड विधानसभा चुनाव की तैयारियों में सीधे सक्रिय होंगे? क्या प्रदेश के दिग्गज नेता अपने पुराने मतभेद भुलाकर एकजुट रह पाएंगे? और क्या कांग्रेस सरकार के खिलाफ उठाए जा रहे मुद्दों को मजबूत संगठनात्मक अभियान में बदल पाएगी?
उत्तराखंड की राजनीति में इन सवालों के जवाब ही 2०27 के चुनावी मुकाबले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ताजा पुष्टि कांग्रेस ने 22 से 25 अक्टूबर तक न्याय यात्रा और 27 अक्टूबर को गैरसैंण विधानसभा घेराव का कार्यक्रम घोषित किया है। कुमारी शैलजा की अध्यक्षता में हुई बैठक में हरीश रावत, गणेश गोदियाल, यशपाल आर्य और प्रीतम सिंह सहित वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे। राहुल गांधी ने अंकिता भंडारी प्रकरण में राष्ट्रपति को पत्र लिखकर भी हस्तक्षेप किया है। हालांकि, सभी छत्रपों की बगावत असंभव होने या राहुल गांधी के स्वयं चुनावी कमान संभालने की आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली है।

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