भाजपा में फिर विभीषणों की आहट

0
3

कौन लिख रहा ऋतु की हार की पटकथा?
पिता की हार के बाद अब निशाने पर बेटी!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड भाजपा में जब भी कोई बडा राजनेता पार्टी के कुछ नेताओं की आंखों में खटकता है तो उसकी सियासत का अंत करने के लिए पार्टी के कुछ विभीषण एक बडा चक्रव्यूह रचकर उन्हें चुनावी रणभूमि में ढेर करने की साजिश को अंजाम तक पहुंचा देते हैं। पौडी के कोटद्वार में जब भुवन चंद खण्डूरी चुनाव लडे तो उन्हें मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए एक साजिश के तहत उन्हें चुनाव हरवा दिया गया था और उसके बाद पार्टी की ओर से उन विभीषणों की तलाश कभी नहीं की गई जिन्होंने खण्डूरी के खिलाफ साजिश रची थी। वहीं उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री को पार्टी के ही कुछ विभीषणों ने उन्हें खटीमा विधानसभा चुनाव में हरवाने का खेल खेला था जिससे कि वह मुख्यमंत्री न बन सके लेकिन उनकी हार एक साजिश नजर आने पर भाजपा हाईकमान ने उन्हें ही मुख्यमंत्री का ताज पहनाया था। अब 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में कोटद्वार की विधायक को चुनावी रणभूमि में ढेर करने के लिए पार्टी के ही कुछ विभीषणों ने वहां ढेरा डाल लिया है और आशंका है कि वह कोटद्वार की विधायक व मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष की राजनीति का सूर्य अस्त करने का चक्रव्यूह रचने लगे हैं ऐसी आशंकायें राजनीतिक गलियारों में उठ रही हैं?
उत्तराखंड भाजपा की राजनीति में भीतरघात का मुद्दा एक बार फिर चर्चा का विषय बनता दिखाई दे रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी की कोटद्वार विधानसभा सीट से हार और वर्ष 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की खटीमा से चुनावी पराजय के बाद पार्टी के भीतर उठे सवाल आज भी राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा हैं। अब विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण को लेकर भी ऐसी आशंकाएं सामने आ रही हैं, जिनसे प्रदेश भाजपा की अंदरूनी राजनीति पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। उत्तराखंड की राजनीति में वर्ष 2012 का विधानसभा चुनाव आज भी महत्वपूर्ण माना जाता है। उस चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी को कोटद्वार विधानसभा सीट से पराजय का सामना करना पड़ा था। उनकी हार के बाद भाजपा के भीतर कथित भीतरघात की चर्चाएं लंबे समय तक होती रहीं। राजनीतिक गलियारों में सवाल उठे कि आखिर एक मुख्यमंत्री अपनी ही पार्टी के मजबूत संगठन के बावजूद चुनाव कैसे हार गया? हालांकि उनकी हार के पीछे किसी सुनियोजित भीतरघात की साजिश को निर्णायक रूप से प्रमाणित नहीं किया जा सका। इसके बाद वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उत्तराखंड में दोबारा सरकार बनाई, लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं खटीमा विधानसभा सीट से चुनाव हार गए। इस हार को लेकर भी पार्टी के भीतर कथित असहयोग और भीतरघात की चर्चाएं सामने आई थीं। हालांकि धामी की पराजय को पार्टी के नेताओं की साजिश का परिणाम बताने के लिए सार्वजनिक रूप से पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आए।
अब राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण बनती दिखाई दे रही हैं। ऋतु खंडूरी पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी की पुत्री हैं और कोटद्वार विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं। विधानसभा अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका और राजनीतिक सक्रियता के कारण उन्हें भाजपा के महत्वपूर्ण नेताओं में गिना जाता है। इसी बीच कुछ राजनीतिक हलकों में यह दावा किया जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए ऋतु खंडूरी के खिलाफ पार्टी के ही कुछ विभीषण उन्हें चुनावी रणभूमि में हरवाने के लिए साजिश का चक्रव्यूह रच रहे हैं? यहां तक चर्चा है कि कथित तौर पर चार लोगों की एक टीम को कोटद्वार में सक्रिय किया गया है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही ऐसी किसी टीम, उसके सदस्यों अथवा उसे भेजने वाले नेताओं की पहचान के प्रमाण उपलब्ध हैं। इसलिए इसे स्थापित साजिश के बजाय फिलहाल एक अपुष्ट राजनीतिक दावा ही माना जाना चाहिए। इसके बावजूद सवाल उठ रहा है कि क्या कोटद्वार की राजनीति में आगामी चुनाव से पहले भाजपा के भीतर नए समीकरण बन रहे हैं? क्या स्थानीय स्तर पर नेताओं के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है? और यदि भीतरघात की शिकायतें सामने आती हैं, तो क्या भाजपा संगठन उनकी निष्पक्ष जांच कराएगा?
उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। ऐसे में कोटद्वार विधानसभा सीट पर भी सभी दलों की निगाहें रहेंगी। ऋतु खंडूरी के सामने विपक्ष की चुनौती के साथ पार्टी संगठन और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को साधना भी महत्वपूर्ण होगा। भुवन चंद्र खंडूरी की वर्ष 2012 की हार और पुष्कर सिंह धामी की वर्ष 2022 की पराजय से जुड़ी राजनीतिक चर्चाओं के बीच अब ऋतु खंडूरी को लेकर उठ रही आशंकाओं ने एक नई बहस को जन्म दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कोटद्वार में वास्तव में भीतरघात की कोई राजनीतिक पटकथा लिखी जा रही है, या फिर यह आगामी विधानसभा चुनाव से पहले फैल रही अपुष्ट चर्चाओं का हिस्सा है? इसका जवाब ठोस प्रमाण और आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम से ही सामने आ सकेगा। उत्तराखण्ड के अन्दर ऋतु खण्डूरी का राजनीतिक इकबाल उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली तक बुलंद देखा जाता रहा है इसलिए वह पार्टी के ही कुछ नेताओं की आंखों की किरकिरी बनी हुई है यह किसी से छिपा नहीं है?

LEAVE A REPLY