रेखा आर्य की सम्पत्ति का खोला चिट्ठा!
तो कंपनी में मंत्री के एक सौ दस करोड़ के हैं शेयर
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच सामने आए आरोप-प्रत्यारोप ने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। मामला अब पारिवारिक मतभेदों तक सीमित नहीं रह गया है। गिरधारी लाल साहू ने एक वीडियो में मंत्री के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार और 210 करोड़ की अवैध संपत्ति रखने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से निष्पक्ष जांच की मांग की है। साहू का दावा है कि वह प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कोठियों, फैक्ट्रियों और अन्य संपत्तियों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करेंगे। हालांकि, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या इन आरोपों को निराधार बता चुकी हैं और जांच के लिए तैयार होने की बात भी कह चुकी हैं। ऐसे में अब दोनों पक्षों के दावों की सत्यता दस्तावेजों और जांच के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगी।
गिरधारी लाल साहू ने वीडियो में दावा किया कि उनकी पत्नी करीब दस वर्षों से उत्तराखंड सरकार में मंत्री हैं और इस दौरान वह लगातार उनके विभागों में कथित भ्रष्टाचार को लेकर आपत्ति जताते रहे। साहू के मुताबिक, उन्होंने कई बार मंत्री से कहा कि भ्रष्टाचार पर रोक लगनी चाहिए और अनावश्यक धन-संपत्ति जुटाने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। साहू ने दावा किया कि इस मुद्दे पर दोनों के बीच कई बार कहासुनी भी हुई। उन्होंने अपने 40 वर्षों के जमीन कारोबार और बरेली में स्थापित व्यवसाय का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके पास पहले से पर्याप्त संसाधन हैं। 210 करोड़ की संपत्ति का दावा, कोठी कहां और फैक्ट्री कहांकृसब बताने की चुनौती! इस विवाद का सबसे गंभीर पहलू 210 करोड़ की कथित अवैध संपत्ति का आरोप है। साहू ने दावा किया कि वह उत्तराखंड में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके संपत्तियों का स्थान और उनसे जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करेंगे। उनका कहना है कि वह बताएंगे कि कहां कोठियां हैं, कहां फैक्ट्रियां हैं और अन्य संपत्तियां किस स्थान पर मौजूद हैं।
यहां सबसे बड़ा मुद्दा आरोप की रकम नहीं, बल्कि उसका प्रमाण है। क्या साहू कथित संपत्तियों के स्वामित्व, खरीद और धन के स्रोत से जुड़े दस्तावेज पेश करेंगे? और यदि दस्तावेज सामने आते हैं तो क्या संबंधित जांच एजेंसियां उनकी सत्यता की पड़ताल करेंगी? फिलहाल 210 करोड़ की कथित अवैध संपत्ति का दावा स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं हुआ है। गिरधारी लाल साहू ने कंपनी से जुड़े शेयर और इस्तीफे के मामले में भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि उन्होंने करीब आठ महीने पहले विधिवत इस्तीफा दिया था, लेकिन अब उनके हस्ताक्षरों और इस्तीफे को लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है। साहू ने 110 करोड़ की शेयरिंग और कंपनी में 80 प्रतिशत हिस्सेदारी से संबंधित दावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने इस विवाद को चुनाव लड़ने की परिस्थितियों से जोड़ते हुए अपने खिलाफ दबाव बनाए जाने का आरोप लगाया। साहू ने मुख्यमंत्री और जांच एजेंसियों से संबंधित दस्तावेजों तथा हस्ताक्षरों की फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की है। वीडियो में साहू ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पूरे प्रकरण की जांच कराने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यदि उनके आरोपों में सच्चाई नहीं मिलती तो वह कठोरतम सजा भुगतने को तैयार हैं। साहू ने दावा किया कि वह कथित भ्रष्टाचार से संबंधित जानकारी और सूची जांच एजेंसियों को सौंप सकते हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार का कोई मंत्री भ्रष्टाचार में संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
दूसरी ओर, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने अपने ऊपर लगाए गए 210 करोड़ की अवैध संपत्ति के आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने अपनी संपत्तियों का विवरण आयकर रिटर्न में दर्ज होने की बात कही है और जांच के लिए सहमति जताई है। इस स्थिति में आरोप लगाने वाले और आरोपों का सामना कर रही मंत्री, दोनों की ओर से जांच की बात सामने आना महत्वपूर्ण है। हालांकि, किसी संपत्ति का आयकर रिटर्न में उल्लेख होना अपने आप में सभी आरोपों का अंतिम निस्तारण नहीं है। इसी तरह केवल आरोप लगाने से कोई संपत्ति अवैध साबित नहीं होती। उत्तराखंड की राजनीति से जुड़े इस प्रकरण में कई गंभीर पहलू सामने आए हैं। एक ओर मंत्री के पति करोड़ों रुपये की कथित अवैध संपत्ति का दावा कर रहे हैं, तो दूसरी ओर मंत्री आरोपों को नकारते हुए जांच के लिए तैयार होने की बात कह रही हैं। अब साहू की प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस, संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज, कंपनी के शेयर रिकॉर्ड, इस्तीफे के हस्ताक्षर और संबंधित जांच एजेंसियों की कार्रवाई इस मामले में महत्वपूर्ण होंगे। 210 करोड़ की कथित संपत्ति का हिसाब, दस वर्षों के भ्रष्टाचार के आरोप और कंपनी के दस्तावेजों का विवाद इन तीनों मुद्दों की निष्पक्ष पड़ताल से ही तय होगा कि आरोपों में कितना दम है।


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