अंकिता हत्याकांड पर कांग्रेस का रणघोष

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दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर सियासी तूफान
इंसाफ दिलाने को कांग्र्रेस ने खाई सौगंध
प्रमख संवाददाता
देहरादून। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उत्तराखण्ड की बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए खुद कमान संभाल रखी है और इसी के चलते उन्होंने अंकिता के माता-पिता के साथ दिल्ली में इंडिया गेट के सामने रातभर कांग्रेसी नेताओं के साथ मिलकर धरना दिया था। राहुल की पहल पर उत्तराखण्ड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा और राज्य के तमाम कांग्रेसी छत्रपों ने सौगंध खाई है कि जब तक वह अंकिता भंडारी को न्याय नहीं दिला देंगे तब तक चौन से नहीं बैठेंगे। कांग्रेस के छत्रपों ने अंकिता को इंसाफ दिलाने की जो जंग सड़कों पर अब शुरू की है उससे भाजपा के अन्दर बेचौनी का माहौल है। अब अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की लडाई जो उत्तराखण्ड से शुरू हुई थी वह देश के कई राज्यों में शुरू हो गई है और इस मामले में कथित वीआईपी दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाये जाने पर अपना आंदोलन सड़कों पर तेज कर दिया है उससे यह बात तो साफ हो गई है कि कांग्रेस अब अंकिता को न्याय दिलाने की जंग से अपने पैर पीछे खींचने वाली नहीं है।
उत्तराखण्ड की बेटी अंकिता भंडारी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई अब पहाड़ों की सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र तक पहुंचती दिखाई दे रही है। इस संवेदनशील हत्याकांड को लेकर कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ राजनीतिक मोर्चा तेज कर दिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की सक्रियता और उत्तराखण्ड कांग्रेस के नेताओं के आक्रामक तेवरों ने इस मामले को एक बार फिर बड़े सियासी टकराव के केंद्र में ला खड़ा किया है। कांग्रेस अब कथित वीआईपी की भूमिका की निष्पक्ष जांच और अंकिता के परिजनों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर पीछे हटने के मूड में दिखाई नहीं दे रही है।
राहुल गांधी ने अंकिता भंडारी के परिजनों की न्याय की मांग को प्रमुखता से उठाया है। दिल्ली के इंडिया गेट पर अंकिता के माता-पिता के साथ रातभर धरने में शामिल होने का दावा भी सामने आया है। हालांकि इस धरने में राहुल गांधी की व्यक्तिगत मौजूदगी की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। कांग्रेस इस मुद्दे को केवल उत्तराखण्ड तक सीमित रखने के बजाय राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की रणनीति अपनाती दिखाई दे रही है। उत्तराखण्ड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने अंकिता को न्याय दिलाने की मांग पर संघर्ष जारी रखने का संकल्प जताया है। कांग्रेस नेताओं के आक्रामक बयानों और प्रदर्शनों ने प्रदेश की राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया है। पार्टी का आरोप है कि इस मामले में कथित प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका को लेकर उठे सवालों का संतोषजनक जवाब मिलना अभी बाकी है। दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के निर्णय का विरोध कर रहे कांग्रेस नेताओं और संगठनों ने उनकी नियुक्ति पर पुनर्विचार की मांग उठाई है। प्रदर्शनकारियों की ओर से उनका नाम कथित वीआईपी के संदर्भ में लिया जा रहा है। हालांकि किसी व्यक्ति के खिलाफ राजनीतिक आरोप लगना उसके अपराध में शामिल होने का प्रमाण नहीं है। ऐसे में जांच के निष्कर्ष सामने आने से पहले किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर लगातार उठ रही आवाजें भाजपा के लिए राजनीतिक चुनौती बन सकती हैं। कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार से जवाबदेही मांग रही है, जबकि पूरे प्रकरण में आरोपों और तथ्यों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना भी आवश्यक है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच एजेंसियां कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों पर क्या तथ्य सामने लाती हैं। उत्तराखण्ड से उठी न्याय की मांग को कांग्रेस व्यापक राजनीतिक अभियान का रूप देने में जुटी है। राहुल गांधी की सक्रियता, प्रदेश कांग्रेस के प्रदर्शनों और दुष्यंत गौतम की नियुक्ति को लेकर विरोध ने इस प्रकरण को फिर राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है। कांग्रेस के तेवर संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तराखण्ड की राजनीति में और अधिक तीखा हो सकता है। 14 अक्टूबर को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने इंडिया गेट पहुंचकर अंकिता के माता-पिता के धरने में हिस्सा लिया। उनके जाने के बाद भी प्रदर्शन जारी रहा। 15 अक्टूबर की सुबह करीब चार बजे दिल्ली पुलिस ने अंकिता के माता-पिता और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। इस कार्रवाई पर राहुल गांधी और कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार को घेरा।
अब यह राजनीतिक टकराव उत्तराखण्ड और दिल्ली से आगे सिक्किम तक पहुंच गया है। गंगटोक में भी कांग्रेस ने दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति के विरोध में प्रदर्शन करते हुए सीबीआई जांच पूरी होने तक उन्हें राज्यपाल पद से वापस बुलाने की मांग उठाई है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया हैकृक्या अंकिता के माता-पिता द्वारा उठाए गए कथित वीआईपी की भूमिका संबंधी सवालों का जवाब जांच से मिलेगा, या यह मामला आने वाले दिनों में और बड़े राजनीतिक संघर्ष का रूप लेगा? गौरतलब है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा हो चुकी है। दुष्यंत गौतम के खिलाफ परिजनों ने आरोप लगाए हैं, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उनका नाम अभी किसी आरोपपत्र में अभियुक्त के रूप में दर्ज नहीं है।

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