हम कर लेंगे आत्मदाह
सरकारी लैब पर फिर ‘ठेके’ की आहट
देहरादून(स्टाफ रिपोर्टर)। मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट संघ ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा है कि वह 135 दिन से अपनी मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और दो बार वह मुख्यमंत्री आवास कूच कर चुके हैं तो एक बार सचिवालय कूच कर उन्होंने शासन को जगाने का काम किया लेकिन मुख्यमंत्री के आश्वासन के बावजूद भी कुछ अफसरों ने अपने ही मुखिया के आदेश को हवा में उडा दिया और उनके साथ सरकार ने दावा किया था कि सरकारी लैब को ठेके पर नहीं दिया जायेगा उसकी हवा अब निकल रही है क्योंकि सरकारी लैब को ठेके पर देने की तैयारी में जुट गई है। संघ ने दो टूक कहा है कि अगर सरकार ने उनकी मांग न मानी तो वह कोई भी घातक कदम उठा सकते हैं और उन्होंने आत्मदाह करने तक की चेतावनी देकर सरकार को ललकार दिया है।
सरकारी अस्पतालों की लैब को लेकर उत्तराखंड में एक बार फिर ‘सरकारी बनाम निजी’ की लड़ाई तेज हो गई है। मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट संघ उत्तराखंड का आरोप है कि जिस निजीकरण को खत्म करने का आश्वासन दिया गया था, अब एनएचएम के जरिए उसी दिशा में दोबारा निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष आशीष चंद्र और महासचिव मयंक राणा ने सरकार से सीधा सवाल किया जब प्रदेश में प्रशिक्षित लैब तकनीशियन नौकरी के लिए 135 दिनों से धरने पर बैठे हैं, तो सरकारी पद भरने के बजाय लैबों को निजी एजेंसियों के हवाले करने की तैयारी आखिर क्यों? संघ का दावा है कि सरकारी लैबों को मजबूत कर जांचें इन-हाउस कराने के लिए समिति तक बनाई गई थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि उस प्रक्रिया का क्या हुआ और अब निविदा की जरूरत क्यों पड़ी?
संघ के अध्यक्ष ने कहा कि 26 साल में न तो हमारे सर्विस रुल बन पाये हैं और न ही सेवा नियमावली बन पाई है। उन्होंने कहा कि जबकि उत्तराखण्ड राज्य में लगातार 1995 से यूपी के टाईम की नियमावली आज भी चली आ रही है और तबसे ही यह कोर्स चल रहा है। उन्हांेने कहा कि आज भी उत्तराखण्ड के अन्दर बीएससी मल्टी कोर्स चल रहा है लेकिन सर्विस रुल नहीं है न ही सेवा नियमावली है। भर्ती में आने का कोई रास्ता बीएससी मल्टी धारकों के लिए नहीं है। सरकार लगातार मान्यता दे रही है चाहे वह निजी संस्थान हो चाहे प्रदेश के चार-चार मेडिकल कॉलेज हो वहां पर भी यह कोर्स कराये जा रहे हैं। संघ के अध्यक्ष ने कहा कि दो बार सीएम आवास कूच करने के लिए मुख्यमंत्री ने उन्हें वार्ता के लिए आमंत्रित किया था हमारी वार्ता हुई थी। सीएम साहब हमारी बात को समझने का प्रयास किया और जो हमारे अधिकारियों को निर्देशित किया कि इसमें त्वरित जो भी कार्यवाही की जा सकती है वह की जाये। उन्होंने साफ कहा कि सरकार की वादाखिलाफी की जा रही है और दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारे स्वास्थ्य मंत्री एक ओर तो हमने आपकी एक महत्वपूर्ण बात तो मान ली है कि जो प्राइवेविटेशन किया जा रहा है उसे बंद कर रहे हैं हम सभी जांचों को इनहाउस करेगे इन प्राईवेट कंपनियों को ठेका नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि खेल देखे कि कुछ दिन पूर्व एनएचएम के माध्यम से दुबारा से टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा रही है और यह हमारे साथ सरकार का दोहरा मापदंड है। सरकारी अपनी ही बात पर नहीं रह रही है। हम इसका विरोध करते हैं। उन्हांेने कहा कि यदि सरकार हमारी मांग को नहीं मानती है तो हम बहुत त्रस्त आ चुके हैं जो भी हर संभव प्रयास थे हमने कर लिये। सरकार न सुनने को तैयार है और न समझने को इसलिए अब हमारे पास कुछ ऐसे कदम उठाने के अलावा कोई चारा नहीं है जो संविधान से भी परे हों। इस बार हमने तय किया है कि सीएम आवास कूच के साथ ही आत्मदाह कर लेंगे या फिर कुछ ऐसे प्रयास करंेगे जिससे कुछ तो सरकार को हमारी सुध लेगी।
तकनीशियनों का आरोप है कि मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद शासन स्तर की बैठकें बार-बार टल रही हैं। उन्होंने आईपीएचएस मानकों के अनुसार पद सृजन, नियमित भर्ती, वर्षवार मेरिट, पात्र अभ्यर्थियों को एकमुश्त आयु छूट और सरकारी प्रयोगशालाओं के निजीकरण पर रोक की मांग की है। एक तरफ 135 दिन से धरना दूसरी तरफ ठेके की तैयारी का आरोप! यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल है डिग्री हाथ में लेकर बेरोजगार युवा सड़क पर बैठें और सरकारी लैब निजी एजेंसियां चलाएं तो नियमित भर्ती कब होगी? संघ ने चेतावनी दी है कि निविदा प्रक्रिया नहीं रोकी गई तो आंदोलन और तेज होगा। अब सरकार को जवाब देना होगा सरकारी लैब मजबूत होंगी, युवाओं को नौकरी मिलेगी या फिर व्यवस्था ठेके के भरोसे चलेगी?