सीएम से नहीं बचेंगे बेलगाम अफसर
कानून का तराजू गरीब और अमीर के लिए हो एक जैसा
धामी के सुशासन की असली तस्वीर अफसर भी दिखायें
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री जिस तेजी से फैसले ले रहे हैं, अब उसी तेजी की जरूरत जमीन पर कार्रवाई में है। मुख्यमंत्री की मंशा साफ हो और आदेश सख्त हो, लेकिन नीचे बैठे अधिकारी अगर अपनी सुविधा के हिसाब से उसकी रफ्तार तय करें तो सवाल सरकार पर आता है। इसलिए अब धामी को एक कदम और आगे बढ़कर साफ कर देना चाहिए गलत काम करने वाला कितना भी ताकतवर क्यों न हो और उसे रोकने में लापरवाही करने वाला अधिकारी कितनी भी बड़ी कुर्सी पर क्यों न बैठा हो, कार्रवाई दोनों पर होगी।
प्रदेश में अतिक्रमण हो, अवैध खनन हो, नशे का कारोबार हो, सरकारी जमीनों पर कब्जा हो या जनता की शिकायतों की अनदेखी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को हर मामले में स्वयं आदेश देना पड़े, तो फिर जिलों में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की जरूरत क्या है? अवैध निर्माण जब शुरू होता है तभी क्यों नहीं रोका जाता? नदी में मशीन उतरने से पहले जिम्मेदार तंत्र क्यों नहीं जागता? नशे का बड़ा नेटवर्क तैयार होने के बाद छोटी बरामदगी दिखाकर कार्रवाई पूरी क्यों मान ली जाती है? सरकारी जमीन पर कब्जा वर्षों तक बढ़ता रहे और फिर अचानक बुलडोजर लेकर प्रशासन पहुंचे बीच के वर्षों का हिसाब कौन देगा? गलत काम पकड़ना अच्छी कार्रवाई है, लेकिन गलत काम को महीनों और वर्षों तक चलने देने वाले जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही तय करना उससे भी बड़ी कार्रवाई होगी। धामी यदि हर जिले में यह व्यवस्था लागू करा दें कि शिकायत मिलने के बाद निर्धारित समय में कार्रवाई नहीं हुई तो संबंधित अधिकारी से जवाब लिया जाएगा, तो जनता को मुख्यमंत्री तक फरियाद लेकर पहुंचने की जरूरत ही कम पड़ेगी।
प्रदेश की जनता मुख्यमंत्री से यही उम्मीद रखती है कि कानून की नजर में कोई छोटा-बड़ा नहीं होगा। गरीब का अतिक्रमण गलत है तो रसूखदार का भी गलत है। गरीब पर नियम लागू होगा तो वही फीता बड़े आदमी की दीवार पर भी चलेगा। यही वह जगह है जहां पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड में एक मजबूत मिसाल कायम कर सकते हैं। आवाम का मानना है कि धामी को अब अफसरशाही को दो टूक संदेश देना चाहिए सरकार का आदेश फाइल में रखने के लिए नहीं, जमीन पर उतारने के लिए है। जनता की शिकायत दबेगी तो जवाब देना होगा, कार्रवाई में भेदभाव हुआ तो जवाब देना होगा और आंखों के सामने गलत काम चलता रहा तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सामने से बल्लेबाजी कर रहे हैं। अब जरूरत इतनी है कि उनके पीछे खड़ा पूरा प्रशासन भी उसी रफ्तार से चले। जिस दिन मुख्यमंत्री के आदेश से पहले अधिकारी स्वयं अपनी जिम्मेदारी निभाने लगेंगे, उसी दिन उत्तराखंड में सुशासन की असली तस्वीर दिखाई देगी।