यमुना में अवैध खनन का काला खेल

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खनन पट्टे बंद तो यमुना नदी में कैसे दौड़ रही ट्रैक्टर-ट्रॉलियां
अवैध खनन के सिंडिकेट पर आखिर कौन है मेहरबान?
स्टाफ रिपोर्टर
पछवादून। मुख्यमंत्री अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश देते आ रहे हैं वहीं भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय के निदेशक राजपाल लेघा के स्तर से भी अवैध खनन पर अंकुश लगाने, फील्ड स्तर पर निगरानी मजबूत करने और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने पर जोर दिया जाता रहा है। इसके बावजूद पछवादून की यमुना नदी में सामने आ रही गतिविधियों ने स्थानीय प्रशासन और खनन विभाग के निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी वाली बात है कि नदियां उफान पर हैं और उसके बावजूद भी अगर पछवादून में नदियों का सीना चीरकर वहां अवैध खनन का तांडव हो रहा है तो उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अवैध खनन रोकने वाले महकमे किस कदर घृतराष्ट्र बने हुये हैं।
बरसाती सीजन के चलते यमुना क्षेत्र में खनन पट्टे बंद हैं और खनन के लिए रवन्ना जारी नहीं हो रहा है। इसके बावजूद नदी क्षेत्र में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही सामने आ रही है। 10 सितंबर को दोपहर करीब 12रू48 बजे रिकॉर्ड किए गए ताजा वीडियो में यमुना नदी क्षेत्र के भीतर कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियां दिखाई दे रही हैं। यही तस्वीर अब सवाल खड़ा कर रही है कि जब वैध खनन गतिविधियां बंद हैं तो नदी के भीतर इतनी संख्या में ट्रैक्टरों की मौजूदगी आखिर किस वजह से है? तस्वीरांे में दिखाई दे रही प्रत्येक गतिविधि को केवल तस्वीरों के आधार पर अवैध खनन घोषित नहीं किया जा सकता, लेकिन पट्टे बंद होने के दौरान नदी क्षेत्र में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की मौजूदगी प्रशासनिक जांच का पर्याप्त आधार जरूर बनती है। स्थानीय स्तर पर लगातार अवैध खनन होने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। ऐसे में प्रशासन से अपेक्षा है कि मौके की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे।
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू प्रशासन का निगरानी तंत्र है। बरसाती सीजन में खनन बंद होने के बाद नदी क्षेत्र की निगरानी सामान्य दिनों की तुलना में और अधिक प्रभावी होनी चाहिए। नदी तक पहुंचने वाले रास्ते और खनन संवेदनशील क्षेत्र विभागीय निगरानी के दायरे में हैं। ऐसे में दिनदहाड़े नदी में ट्रैक्टरों की आवाजाही सामने आना फील्ड मॉनिटरिंग पर सवाल खड़ा करता है। यदि प्रशासन का निगरानी तंत्र सक्रिय है तो नदी तक पहुंचने वाले वाहनों की गतिविधि समय रहते पकड़ में क्यों नहीं आ रही? संवेदनशील रास्तों पर कितनी नियमित गश्त हो रही है? फील्ड स्तर पर निरीक्षण का क्या रिकॉर्ड है और पट्टे बंद होने के बाद अब तक कितने वाहनों पर कार्रवाई की गई है? इन तथ्यों के सामने आने से निगरानी व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकती है। विकासनगर क्षेत्र में खनन गतिविधियों की निगरानी से जुड़े सहायक खनन पर्यवेक्षक की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। जब संबंधित क्षेत्र उनकी निगरानी के दायरे में आता है तो नदी क्षेत्र में नियमित निरीक्षण, संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पर मौके पर पहुंचना और अवैध खनन पाए जाने पर कार्रवाई सुनिश्चित करना स्थानीय निगरानी व्यवस्था का अहम हिस्सा है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बरसाती सीजन में पट्टे बंद होने के बाद यमुना क्षेत्र का कितनी बार स्थलीय निरीक्षण किया गया? किन रास्तों पर निगरानी की गई और कितने वाहनों के खिलाफ कार्रवाई हुई? यदि नियमित निगरानी हो रही है तो 10 सितंबर को दोपहर में सामने आई ट्रैक्टरों की गतिविधि की जानकारी संबंधित तंत्र को थी या नहीं, यह भी स्पष्ट होना चाहिए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध खनन के खिलाफ विभागीय कार्रवाई कई बार एक-दो ट्रैक्टर पकड़ने तक सीमित रह जाती है, जबकि कुछ समय बाद नदी क्षेत्र में गतिविधियां फिर दिखाई देने लगती हैं। इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि अवैध खनन की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं तो कार्रवाई का दायरा केवल वाहन पकड़ने तक सीमित रखने के बजाय पूरी कड़ी पर निगरानी जरूरी है। अवैध खनन यदि हो रहा है तो सवाल केवल यह नहीं है कि नदी में ट्रैक्टर कौन चला रहा है। यह भी जांच का विषय है कि खनिज कहां से उठाया जा रहा है, किस रास्ते से बाहर निकाला जा रहा है और आखिर पहुंच कहां रहा है।
स्थानीय लोगों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यमुना नदी क्षेत्र से निकलने के बाद ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए आसपास के क्षेत्रों में कथित रूप से बिना रॉयल्टी खनन सामग्री पहुंचाई जा रही है। यदि यह दावा सही पाया जाता है तो मामला केवल अवैध खनन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का भी गंभीर विषय बनेगा। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि इस तरह के कथित परिवहन से सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व की हानि हो सकती है। हालांकि वास्तविक नुकसान का आंकड़ा विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। बड़ा सवाल यह है कि जब पट्टे बंद हैं और रवन्ना जारी नहीं हो रहा तो नदी से निकलने वाले खनिज से भरे वाहनों को रास्ते में रोकने और पकड़ने के लिए प्रशासन का निगरानी तंत्र कितना सक्रिय है? नदी से बाहर निकलने वाले रास्तों पर प्रभावी निगरानी की जाए तो यह भी स्पष्ट हो सकता है कि कितने वाहन नदी क्षेत्र से निकल रहे हैं और सामग्री कहां पहुंचाई जा रही है।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि नदी क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी देने अथवा स्थिति के संबंध में पूछने के लिए संबंधित स्तर पर फोन करने पर कई बार कॉल रिसीव नहीं होती। इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी यह प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल है कि अवैध खनन की तत्काल सूचना देने के लिए स्थानीय नागरिकों के पास प्रभावी और जवाबदेह माध्यम क्या है। यदि कोई व्यक्ति नदी में संदिग्ध गतिविधि देखता है तो उसकी सूचना पर कितनी जल्दी प्रतिक्रिया होती है, टीम कितनी देर में मौके पर पहुंचती है और शिकायत पर क्या कार्रवाई हुईकृइसकी जवाबदेही तय होना भी प्रभावी निगरानी का हिस्सा है। बरसाती सीजन में यमुना नदी के भीतर वाहनों और लोगों की गतिविधि सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर विषय है। ऊपरी क्षेत्रों में बारिश के कारण नदी का जलस्तर तेजी से बदल सकता है। ऐसे में नदी क्षेत्र में अनियंत्रित गतिविधियां किसी हादसे का कारण बन सकती हैं।
इसलिए मामला केवल सरकारी राजस्व या खनिज चोरी के आरोपों तक सीमित नहीं है। यदि बंद अवधि में नियमों के विपरीत नदी से खनिज उठाया जा रहा है तो पर्यावरणीय प्रभाव के साथ वहां मौजूद लोगों और वाहन चालकों की सुरक्षा भी प्रशासन की चिंता का विषय होनी चाहिए। किसी बड़ी अनहोनी के बाद जांच और कार्रवाई करने के बजाय समय रहते निगरानी मजबूत करना जरूरी है। आज की तस्वीरें सामने आने के बाद प्रशासन को नदी क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने, तस्वीरों में दिखाई दे रहे स्थान की जांच कराने और नदी से बाहर निकलने वाले रास्तों पर प्रभावी चेकिंग सुनिश्चित करने की जरूरत है। यदि अवैध खनन पाया जाता है तो कार्रवाई एक-दो ट्रैक्टरों तक सीमित न रहकर पूरी कड़ी तक पहुंचनी चाहिए। बरसाती सीजन में खनन पट्टे बंद होने के बावजूद अवैध खनन की शिकायतें और नदी में ट्रैक्टरों की तस्वीरें सामने आना स्थानीय निगरानी तंत्र के लिए गंभीर सवाल है। मुख्यमंत्री की सख्ती और निदेशक के निर्देशों का असर तभी माना जाएगा, जब प्रशासन का निगरानी तंत्र यमुना के घाटों और संवेदनशील रास्तों पर भी उतनी ही मजबूती से दिखाई दे।

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