शिक्षण संस्थानों के आसपास नहीं मंडरा पायेंगे मंचले
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। जनपद के पुलिस कप्तान ने स्कूल कॉलेजों के बाहर मंनचलों की नाक में नकेल डालने के लिए वहां सख्त निगरानी शुरू करवा रखी है जिससे कि कोई भी मनचला या असमाजिक तत्व किसी भी छात्रा के साथ अश्लीलता का तांडव न कर सके। पुलिस कप्तान ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर किसी ने भी राह चलती महिला या छात्रा के साथ अपनी अश्लीलता दिखाने का दुसाहस किया तो उसे इसका बडा खामियाजा भुगतना पडेगा। वहीं रक्षा बंधन पर डीएवी स्कूल की छात्राओं ने जब पुलिस कप्तान की कलाई पर राखी बांधी तो पुलिस कप्तान ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उनका यह भाई सड़कों पर हमेशा उनकी रक्षा करेगा और किसी भी बेटी को किसी अपराधी या असमाजिक तत्व से भय खाने की जरूरत नहीं है।
राजधानी देहरादून में स्कूल, कॉलेज और बड़े शिक्षण संस्थानों के बाहर छुट्टी के समय लगने वाले अनावश्यक जमावड़े पर पुलिस ने जिस तरह शिकंजा कसा है, उससे इन इलाकों की तस्वीर बदलती नजर आ रही है। पुलिस कप्तान के निर्देश पर पुलिस ने शिक्षण संस्थानों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए ऐसे तत्वों पर विशेष नजर रखनी शुरू की है, जो बिना किसी काम के वहां घूमते हैं और छात्र-छात्राओं के लिए परेशानी का कारण बनते हैं। खासकर स्कूल-कॉलेजों की छुट्टी के समय सड़क किनारे खड़े रहने, छात्राओं पर फब्तियां कसने, पीछा करने, अनावश्यक रूप से बाइक लेकर घूमने और भीड़ का फायदा उठाकर माहौल खराब करने वालों के खिलाफ पुलिस का रवैया अब पहले से कहीं ज्यादा सख्त दिखाई दे रहा है। पुलिस ने साफ कर दिया है कि शिक्षण संस्थानों के बाहर किसी भी तरह की अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस कप्तान प्रमेंद्र डोबाल की कार्यशैली में एक महत्वपूर्ण बात यह भी दिखाई देती है कि पुलिस को केवल घटना के बाद कार्रवाई तक सीमित रखने के बजाय प्रिवेंटिव पुलिसिंग पर जोर दिया जा रहा है। जिन स्थानों पर छुट्टी के समय भीड़ बढ़ती है, वहां पुलिस की मौजूदगी, गश्त और चेकिंग बढ़ाई गई है। संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के साथ ही जरूरत पड़ने पर युवकों से पूछताछ और वाहनों की जांच भी की जा रही है। इसका सीधा फायदा छात्राओं और उनके अभिभावकों को मिल रहा है। माता-पिता के लिए सबसे बड़ी चिंता यही होती है कि स्कूल या कॉलेज से घर लौटते समय उनकी बेटियां सुरक्षित रहें। ऐसे में शिक्षण संस्थानों के आसपास पुलिस की सक्रिय मौजूदगी अभिभावकों के भरोसे को मजबूत करने वाली पहल है।
पुलिस की सख्ती का एक और सकारात्मक असर यह है कि छुट्टी के समय अनावश्यक भीड़ और अव्यवस्थित यातायात को नियंत्रित करने में भी मदद मिल रही है। स्कूल-कॉलेजों के बाहर सड़क पर खड़े वाहनों और बेवजह घूमने वालों पर निगरानी से विद्यार्थियों के आवागमन को भी अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सकता है। पुलिस कप्तान प्रमेंद्र डोबाल की यह पहल केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि राजधानी में सुरक्षित और अनुशासित शैक्षणिक वातावरण तैयार करने की दिशा में उठाया गया कदम है। पुलिस का संदेश स्पष्ट है शिक्षण संस्थान पढ़ाई के लिए हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर असामाजिक और आवारा तत्वों का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा। देहरादून जैसे तेजी से बढ़ते शहर में स्कूलों और कॉलेजों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सतर्क रहना जरूरी है। यदि पुलिस इसी तरह संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर पहले से निगरानी रखती रही तो कई घटनाओं को होने से पहले ही रोका जा सकता है। कुल मिलाकर, स्कूल-कॉलेजों के बाहर पुलिस की सख्ती ने छात्राओं के साथ-साथ अभिभावकों को भी राहत का संदेश दिया है। पुुलिस कप्तान प्रमेंद्र डोबाल की यह नीति राजधानी में कानून-व्यवस्था के साथ-साथ महिला और बालिका सुरक्षा को लेकर पुलिस की गंभीरता को भी सामने रखती है। अब संदेश साफ हैकृस्कूल-कॉलेजों के बाहर माहौल बिगाड़ने वालों पर पुलिस की नजर है और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई तय है।