धामी राज में अपराधियों की ‘शामत’

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पुलिस के एक्शन से बिलों में घुसते क्रिमनल
देहरादून (संवाददाता)। मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड को अपराधमुक्त बनाने के लिए जो हुंकार लगाई थी उसके चलते राज्य में अपराधियों की शामत आ रखी है क्योंकि अगर कोई भी अपराधी अपराध करके फरार होता है तो उसे पुलिस उसके बिल से भी खोज लेती है और उसके बाद पुलिस व अपराधियों के बीच आमने-सामने की होने वाली मुठभेड़ में धामी राज में सैकडों अपराधी पुलिस की गोलियां लगने से अस्पताल पहुंचे हैं और कुछ बडे़ अपराधी मुठभेड़ में ढेर हुये हैं। आज हालात यह हैं कि पुलिस के एक्शन से क्रिमनल बिलों में घुस गये हैं। राजधानी और हरिद्वार की पुलिस अपराधियों पर ताबड़तोड़ एक्शन करके उन्हें यह सबक सिखा रही है कि अगर उन्होंने यहां अपराध करने का दुसाहस किया तो उन्हें मिट्टी में मिला दिया जायेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिह धामी ने आवाम को खुला संदेश दे रखा है कि उन्हें अपराधियों और माफियाओं से घबराने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि पुलिस चौबीस घंटे अपराधियों और माफियाओं पर अपनी रडार लगाये हुये है और किसी भी अपराधी या माफिया ने आम जनमानस के साथ कोई भी तांडव करने का दुसाहस किया तो उन्हें इसका वो खामियाजा भुगतना पडे़गा जिसकी उन्होंने कोई कल्पना भी नहीं की होगी।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने सत्ता संभालते ही प्रदेश को अपराध और नशे से मुक्त करने का जो संकल्प लिया था, अब वह जमीन पर दिखाई देने लगा है। अपराधियों को साफ संदेश दिया जा रहा है कि उत्तराखंड की शांत फिजा को बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के लिए कानून का शिकंजा किसी भी कीमत पर ढीला नहीं पड़ेगा।
मुख्यमंत्री के अपराध और नशामुक्त उत्तराखंड के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए पुलिस महकमे ने अपराधियों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। पुलिस की सक्रियता का असर यह है कि संगठित अपराध से लेकर लूट, हत्या, नशे और अन्य गंभीर वारदातों में शामिल बदमाश लगातार पुलिस की रडार पर आ रहे हैं। अपराध करने के बाद भागने वाले आरोपियों के पीछे पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं और उन्हें कानून के कटघरे तक पहुंचाया जा रहा है। प्रदेश की राजधानी देहरादून से लेकर हरिद्वार तक पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ अभियान तेज किया है। पुलिस पर हमला करने या मुठभेड़ की स्थिति पैदा करने वाले बदमाशों के खिलाफ पुलिस ने जवाबी कार्रवाई भी की है। ऐसे मामलों में घायल बदमाशों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जिससे अपराध की दुनिया में यह संदेश गया है कि पुलिस को चुनौती देना भारी पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री के संकल्प को मजबूती देने में पुलिस नेतृत्व की रणनीति भी अहम रही है। अपराधियों के खिलाफ लगातार दबाव बनाने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने, नशे के नेटवर्क पर प्रहार करने और फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस स्तर पर लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। इसका असर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। अपराधियों के खिलाफ लगातार हो रही कार्रवाई से आम जनता के बीच यह भरोसा मजबूत हुआ है कि पुलिस उनके साथ खड़ी है और कानून तोड़ने वालों को किसी भी कीमत पर खुली छूट नहीं मिलेगी। उत्तराखंड की पहचान शांत और सुरक्षित प्रदेश की रही है। अब पुलिस की कार्रवाई ने अपराधियों को यह एहसास करा दिया है कि इस पहचान को चुनौती देने वालों के लिए कानून का शिकंजा लगातार कसता जाएगा। मुख्यमंत्री के अपराधमुक्त उत्तराखंड के संकल्प को अगर यही रफ्तार मिली तो आने वाले समय में प्रदेश को अपराध के खिलाफ और मजबूत सुरक्षा कवच मिलने की उम्मीद है।

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