देहरादून। उत्तराखण्ड सहित प्रदेश की अस्थाई राजधानी व आसपास के क्षेत्रों में भाई बहन के प्रेम का पर्व रक्षाबंधन धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। बहनों ने अपने भाईयों की कलाईयों में राखियां बांधकर जहां उनकी लम्बी उम्र की कामना की। वहीं बहनों ने भाईयों से सुरक्षा का वचन लिया।
उत्तराखंड में रक्षाबंधन का पर्व इस बार सिर्फ भाई की कलाई पर राखी बांधने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बेटियों और महिलाओं की सुरक्षा का मजबूत संकल्प भी बन गया। प्रदेशभर में रक्षाबंधन का पर्व धूमधाम, उल्लास और भावनाओं के साथ मनाया गया। बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सुरक्षित जीवन की कामना की। इस दौरान विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में कन्याओं ने राजनेताओं और अधिकारियों को राखी बांधकर उन्हें भाई का दर्जा दिया। राखी की इस डोर के साथ उनसे एक ऐसा वादा भी लिया गया, जिसकी जरूरत आज हर बेटी महसूस करती है घर से लेकर स्कूल तक और सड़क से लेकर समाज तक, हर कदम पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का संकल्प। रक्षाबंधन के मौके पर नेताओं और अधिकारियों ने भी कन्याओं को अपनी बेटियां बताते हुए उनकी सुरक्षा और सम्मान के लिए सदैव खड़े रहने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि बेटियों की सुरक्षा केवल परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज और शासन-प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रमों में यह संदेश भी दिया गया कि महिलाओं और बालिकाओं को ऐसा सुरक्षित माहौल मिले, जहां वे बिना किसी भय के घर से बाहर निकल सकें, स्कूल जा सकें और अपने सपनों को पूरा कर सकें। किसी भी तरह की अनहोनी को रोकने के लिए सतर्कता, संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई को प्राथमिकता देने की बात कही गई। राखी की इस डोर ने भाई-बहन के रिश्ते को एक नई सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ दिया। बहनों ने राखी बांधी तो भाइयों ने सिर्फ कलाई नहीं, बल्कि बेटियों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा का संकल्प लिया। रक्षाबंधन के इस संदेश ने साफ कर दिया कि उत्तराखंड में बेटियों की सुरक्षा केवल एक वादा नहीं, बल्कि समाज की साझा जिम्मेदारी है।
दून में धूमधाम से मनाया गया रक्षाबंधन पर्व
देहरादून(नगर संवाददाता)। प्रदेश की अस्थाई राजधानी देहरादून में भी रक्षाबंधन का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर बहनों ने भाईयों की कलाई में राखियां बांधकर अपनी सुरक्षा का वचन लिया और राखी बंाधने के साथ भाईयों ने बहनों को जहां सुरक्षा का वचन दिया वहीं भाईयों ने अपनी बहनों को उपहार भी दिए। वहीं दूसरी ओर पतंगों की दुकानों में युवाओं की जमकर भीड़ रही और उन्होंने पतंगें खरीदी।
इस दौरान युवाओं, लोगों व विशेष रूप से बच्चों ने जमकर पतंगबाजी का भी आनंद लिया और मिठाईयों की भी जमकर खरीददारी की गई। त्यौहार को लेकर काफी उत्साह दिखाई दिया और राखी के त्योहार में एक बार फिर भाईयों ने खुले आसमान में पतंगे उड़ाई और इस त्योहार में काफी आनन्द उठाया। मान्यता है और पंडितों के अनुसार कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने देवताओं की रक्षा के लिए कश्यप ऋषि की पत्नी अदिति के घर वामन अवतार लिया था और मान्यता है कि राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी, पृथ्वीलोक का राज्य बलि से छीन लिया।
इस दौरान मान्यता है कि उसे पाताल लोक भेजा और स्वयं भगवान पाताललोक के सभी दरवाजों के द्वारपाल बने। इस अवसर पर कहावत है कि नारद के कहने पर मां लक्ष्मी बैकुंठ से पाताल लोक गईं और राजा बलि से मिली। इस दौरान रक्षाबंधन का दिन यानी श्रावणी पूर्णिमा का दिन था। राजा को मां लक्ष्मी ने एक सूत्र बांधा और कहा कि आज से आप अमर हो गए हो। वहीं पंडितों की माने तो मान्यता है कि इस पर राजा बलि बोले, मेरी कोई बहन नहीं है। श्रावणी मास के दिन तुम आई हो, मुझे रक्षा सूत्र बांधा है। आज से तुम मेरी बहन हो, कुछ उपहार मांगों। रक्षाबंधन पर्व के साथ इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भी है। हालांकि भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में ग्रहण की दृश्यता न होने के कारण सूतक को लेकर भी अलग अलग मत है। पंडित शशि बल्लभ शास्त्री के अनुसार भारत में ग्रहण नहीं दिखाई देने से यहां सूतक मान्य नहीं होगा।