चकराता की आरक्षित सीट पर नया विवाद!

0
12

जैनसरी समुदाय के चुनावी अधिकार को लेकर उठी आवाज
देहरादून। राजधानी के एक अधिवक्ता ने चकराता विधानसभा क्षेत्र संख्या-15 की अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट को लेकर भारत सरकार के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त तथा भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली को पत्र भेजकर गंभीर सवाल उठाए हैं। पत्र में जौनसार-बाबर क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति के प्रमाणपत्र जारी किए जाने से लेकर विधानसभा सीट के आरक्षण तक की व्यवस्था पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
अधिवक्ता विकेश नेगी का कहना है कि चकराता विधानसभा क्षेत्र में जिलाधिकारी देहरादून की ओर से क्षेत्र में निवास करने वाले लोगों को अनुसूचित जनजाति के प्रमाणपत्र जारी किए गए हैं। वहीं निर्वाचन आयोग की व्यवस्था के तहत चकराता विधानसभा क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित रखा गया है। पत्र में दावा किया गया है कि इसके बावजूद सामान्य वर्ग के लोग भी इस क्षेत्र से चुनाव लड़ते और निर्वाचित होते रहे हैं, जिसे लेकर संवैधानिक प्रावधानों के तहत स्थिति स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता है। पत्र में संविधान के अनुच्छेद 330 और 332 का हवाला देते हुए कहा गया है कि अनुसूचित जनजाति के लिए सीट आरक्षित किए जाने की व्यवस्था संविधान में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार होती है। अधिवक्ता ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में किसी क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति क्षेत्र घोषित किए जाने को लेकर भी सवाल उठाया है।
पत्र में भारत सरकार के आदेश संख्या-107 सीओ-78, दिनांक 24 जून 1967 तथा संविधान के अनुच्छेद 342 का उल्लेख करते हुए दावा किया गया है कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के संबंध में पांच समुदायों बुक्सा, राजी, थारू, जौनसारी और भोटिया को अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता प्राप्त है। पत्र में यह भी कहा गया है कि अधिसूचित जनजातियों में अपनी ओर से किसी उपजाति को जोड़कर अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा सकता। अधिवक्ता ने अपने पत्र के साथ सर्वोच्च न्यायालय के स्टेट ऑफ महाराष्ट्र बनाम मिलिंद मामले के निर्णय का भी हवाला दिया है। उनका कहना है कि अनुसूचित जनजाति की संवैधानिक सूची में किसी समुदाय या उपसमुदाय को मनमाने तरीके से शामिल नहीं किया जा सकता और इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का पालन आवश्यक है। पत्र में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों द्वारा आज तक जैनसरी समुदाय के लोगों को भारत सरकार एवं राष्ट्रपति की अधिसूचना के अनुरूप अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र जारी किए जाने के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।
अधिवक्ता ने भारत सरकार के रजिस्ट्रार जनरल और निर्वाचन आयोग से मांग की है कि चकराता विधानसभा क्षेत्र संख्या-15 की आरक्षण व्यवस्था तथा जैनसरी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों की जांच कर स्थिति स्पष्ट की जाए। पत्र में यह भी आग्रह किया गया है कि यदि जैनसरी समुदाय के लोग निर्धारित क्षेत्र में निवास करते हैं तो उन्हें संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार चुनाव लड़ने का अधिकार सुनिश्चित किया जाए। वहीं यदि संबंधित जनजाति की पात्रता अथवा क्षेत्र में निवास को लेकर स्थिति अलग है तो उसके आधार पर चकराता सीट की मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की भी समीक्षा की जाए। अब देखना यह होगा कि अधिवक्ता के पत्र पर भारत सरकार के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त और भारत निर्वाचन आयोग क्या रुख अपनाते हैं और चकराता विधानसभा क्षेत्र की एसटी आरक्षण व्यवस्था को लेकर उठाए गए इन सवालों पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आता है।

बाक्स
रजिस्ट्रार जनरल, भारत निर्वाचन आयोग को लिखा पत्र
रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त भारत सरकार नई दिल्ली
भारत निर्वाचन आयोग निर्वाचन सदन अशोक रोड नई दिल्ली
मा रजिस्ट्रार कार्यालय भारत सरकार सामाजिक अध्ययन प्रभाव सेवा भवन नई दिल्ली
जिलाधिकारी देहरादून
राज्य चुनाव आयोग उत्तराखंड देहरादून

LEAVE A REPLY