सरकारी दफ्तरों में लेटलतीफी पर लगे लगाम

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एंट्री से एग्जिट तक बायोमेट्रिक हो निगरानी
देहरादून। सरकारी दफ्तर जनता की सुविधा और सेवा के लिए होते हैं, लेकिन जब कर्मचारी और अधिकारी ही निर्धारित समय पर कार्यालय में मौजूद न मिलें तो सबसे ज्यादा परेशानी आम आदमी को उठानी पड़ती है। किसी छोटे से काम के लिए लोगों को कई-कई चक्कर लगाने पड़ते हैं, घंटों इंतजार करना पड़ता है और कई बार कर्मचारी के आने का इंतजार करते हुए पूरा दिन निकल जाता है। ऐसे में अब प्रदेश के सभी सरकारी कार्यालयों में बायोमेट्रिक हाजिरी को अनिवार्य किए जाने की जरूरत महसूस हो रही है।
व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि प्रत्येक सरकारी कर्मचारी और अधिकारी को सुबह कार्यालय पहुंचते समय बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठा लगाकर उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य हो और शाम को कार्यालय से निकलते समय भी बायोमेट्रिक मशीन पर निकासी दर्ज करनी पड़े। मशीन में आने और जाने का समय स्वतः रिकॉर्ड हो और यही रिकॉर्ड कर्मचारी की वास्तविक उपस्थिति का आधार बने। बायोमेट्रिक व्यवस्था सिर्फ इसलिए नहीं होनी चाहिए कि कर्मचारी ने मशीन पर अंगूठा लगा दिया और हाजिरी पूरी हो गई। इसके साथ समय की पाबंदी भी अनिवार्य होनी चाहिए। यदि किसी सरकारी कार्यालय का निर्धारित समय सुबह 10 बजे है तो कर्मचारी को 10 बजे तक अपनी बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करनी हो। इसके बाद आने वाले कर्मचारी की देरी रिकॉर्ड में साफ दिखाई दे। बिना स्वीकृत कारण के निर्धारित समय के बाद पहुंचने पर विभागीय नियमों के अनुसार लेट मार्क, वेतन संबंधी कार्रवाई अथवा गैरहाजिरी का प्रावधान होना चाहिए।
अक्सर चर्चा केवल सुबह की हाजिरी को लेकर होती है, जबकि कार्यालय छोड़ने का समय भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसलिए शाम को निर्धारित समय से पहले कार्यालय से निकलने पर भी बायोमेट्रिक निकासी रिकॉर्ड होनी चाहिए। यदि कार्यालय छोड़ने का निर्धारित समय शाम पांच बजे है तो कर्मचारी को पांच बजे से पहले बिना अनुमति कार्यालय नहीं छोड़ना चाहिए। समय से पहले निकासी की स्थिति में भी रिकॉर्ड तैयार हो और लगातार ऐसा करने वालों पर नियमों के मुताबिक कार्रवाई हो। यह व्यवस्था केवल सरकारी कार्यालयों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति भी इसी तरह अनिवार्य की जा सकती है। शिक्षक किस समय विद्यालय पहुंचे और किस समय विद्यालय से निकले, इसका डिजिटल रिकॉर्ड होना चाहिए। इससे विद्यालयों में समय की पाबंदी बढ़ेगी और अभिभावकों तथा विद्यार्थियों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा।
डिजिटल युग में सिर्फ उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर कराने की व्यवस्था अब पर्याप्त नहीं लगती। कागज के रजिस्टर में हस्ताक्षर होने से यह स्पष्ट नहीं होता कि कर्मचारी वास्तव में किस समय कार्यालय पहुंचा था। बायोमेट्रिक मशीन में एंट्री और एग्जिट दोनों का समय दर्ज होगा। जरूरत पड़ने पर अधिकारी किसी भी दिन की उपस्थिति की रिपोर्ट देख सकेंगे। इससे व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और कर्मचारी की उपस्थिति को लेकर विवाद की गुंजाइश भी कम होगी। सबसे जरूरी बात यह है कि सरकार केवल बायोमेट्रिक मशीनें लगाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी न समझे। मशीन से मिलने वाले रिकॉर्ड की नियमित मॉनिटरिंग भी जरूरी है। हर विभाग में साप्ताहिक या मासिक आधार पर रिपोर्ट तैयार हो कि कौन कर्मचारी समय पर आया, कौन लगातार देर से आया, किसने समय से पहले कार्यालय छोड़ा और कौन बिना अनुमति अनुपस्थित रहा। इसके बाद नियमों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सरकारी कर्मचारी के लिए कार्यालय का निर्धारित समय जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण उस कार्यालय में काम कराने पहुंचने वाले आम नागरिक का समय भी है। कोई व्यक्ति अपने जरूरी काम को छोड़कर सरकारी कार्यालय पहुंचता है तो उसे यह उम्मीद रहती है कि संबंधित कर्मचारी और अधिकारी अपने स्थान पर मौजूद मिलेंगे। सरकार यदि बायोमेट्रिक व्यवस्था को सख्ती और पारदर्शिता के साथ लागू करती है तो इसका असर सिर्फ कर्मचारियों की हाजिरी तक सीमित नहीं रहेगा। इससे सरकारी कामकाज में अनुशासन, समय की पाबंदी और जवाबदेही बढ़ सकती है। प्रदेश में सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए एक समान बायोमेट्रिक उपस्थिति व्यवस्था लागू करने पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। सुबह निर्धारित समय पर बायोमेट्रिक एंट्री, शाम को निर्धारित समय तक कार्यालय में उपस्थिति और दोनों का डिजिटल रिकॉर्डकृयह व्यवस्था हर विभाग में समान रूप से लागू होनी चाहिए। जो समय पर आए, उसकी हाजिरी दर्ज हो और जो बिना उचित कारण समय पर नहीं आए, उसके लिए नियम के मुताबिक गैरहाजिरी या कार्रवाई का प्रावधान हो। आखिर सरकारी दफ्तर जनता के पैसे से चलते हैं और इन दफ्तरों में बैठने वाले अधिकारी-कर्मचारी जनता की सेवा के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए अब जरूरत ऐसी व्यवस्था की है जिसमें हाजिरी सिर्फ अंगूठे का निशान न हो, बल्कि जिम्मेदारी और जवाबदेही का प्रमाण बने।

बायोमेट्रिक मशीन, सरकारी कार्यालय की कार्टून

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