बुजुर्गों की आवाज अब सीधे डोबाल तक

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अब पुलिस की नजर से दूर नहीं हांेगे बुजुर्ग
कप्तान ने बुजुर्गों को दिया सुरक्षा का भरोसा
देहरादून(संवाददाता)। उम्र के इस पड़ाव पर जब सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब अकेले रह रहे बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर पुलिस ने गंभीर पहल की है। विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस पर संयुक्त नागरिक संगठन की पहल पर आयोजित संवाद में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक परमेंद्र डोभाल ने साफ किया कि वरिष्ठ नागरिकों की समस्याएं अब सिर्फ शिकायतों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि पुलिस उनके साथ नियमित संवाद कर समस्याओं का समाधान करेगी।
एसएसपी ने आश्वासन दिया कि वरिष्ठ नागरिकों के साथ पुलिस विभाग के हर तीन माह में संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन बैठकों में बुजुर्गों की समस्याएं सुनी जाएंगी, उनके सुझाव लिए जाएंगे और जरूरत के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। यानी पुलिस और वरिष्ठ नागरिकों के बीच संवाद अब कभी-कभार होने वाला कार्यक्रम नहीं, बल्कि नियमित व्यवस्था का हिस्सा बनेगा। एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने भी बुजुर्गों को भरोसा दिलाया कि उनकी किसी भी परेशानी को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिक किसी भी कठिनाई की स्थिति में पुलिस से संपर्क कर सकते हैं और विभाग उनकी मदद के लिए हरसंभव कदम उठाएगा।
संवाद में वरिष्ठ नागरिकों ने भी पुलिस के सामने कई अहम सुझाव रखे। सबसे प्रमुख मांग उत्तराखंड माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण नियमावली-2011 के प्रावधानों के तहत थानावार वरिष्ठ नागरिकों के साथ मासिक बैठक आयोजित करने की रही। बुजुर्गों का कहना था कि समस्याओं का समाधान तभी प्रभावी होगा, जब पुलिस अधिकारी नियमित रूप से उनके बीच पहुंचकर उनकी वास्तविक परेशानियां सुनेंगे। सबसे अहम सुझाव एकल बुजुर्गों और अकेले रहने वाले बुजुर्ग दंपतियों की सुरक्षा को लेकर आया। इनके लिए पुलिस की निगरानी और तत्काल सहायता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से व्हाट्सएप ग्रुप बनाने का सुझाव दिया गया, जिस पर पुलिस अधिकारियों ने सहमति जताई।
दरअसल, अकेले रहने वाले बुजुर्गों के सामने सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है। परिवार के सदस्य दूर हों और किसी आपात स्थिति में तत्काल मदद उपलब्ध न हो तो छोटी समस्या भी गंभीर रूप ले सकती है। ऐसे में पुलिस का यह कदम बुजुर्गों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकता है। अब असली परीक्षा इन फैसलों को जमीन पर उतारने की होगी। थानावार बैठकें नियमित होती हैं या सिर्फ कागजों तक सीमित रहती हैं, व्हाट्सएप ग्रुप कितनी तेजी से सक्रिय होते हैं और बुजुर्गों की शिकायतों पर कितनी जल्दी कार्रवाई होती हैकृयही इस पहल की वास्तविक सफलता तय करेगा। संवाद में रणजीत सिंह कैंतूरा, विनोद प्रकाश नौटियाल, सुलोचना भट्ट, राधा तिवारी, डॉ. एस. स्वामी चंद्रा, जगमोहन मेहंदीरत्ता, उमेश्वर सिंह रावत, गिरीश चंद्र भट्ट, ताराचंद गुप्ता, डॉ. एस.एस. खेड़ा, दिनेश भंडारी, अवधेश शर्मा, खुशवीर सिंह, उमेश सक्सेना, मुकेश नारायण शर्मा, नरेश चंद्र कुलाश्री, एस.पी. नौटियाल सहित वरिष्ठ नागरिक मौजूद रहे।

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