उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार हिंसक कुत्तों के आतंक से स्कूल बंद

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चार दिन की छुट्टी और कुत्तों को पकड़ने का बड़ा ऑपरेशन
प्रमुख संवाददाता
चमोली। उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिला है कि जिला प्रशासन को हिंसक कुत्तों के बढ़ते तांडव के चलते दस स्कूलों को चार दिन तक बंद रखने के के लिए मजबूर होना पड़ा है और इन हिंसक कुत्तों को पकड़ने के लिए जिला प्रशासन ने एक बडा ऑपरेशन चला रखा है जिससे कि सड़क पर निकलने वाले लोगों और स्कूली बच्चों को इन कुत्तों के आतंक से निजात दिलाई जा सके। जिला प्रशासन ने स्कूलों में छुट्टी कराकर ऑनलाइन कक्षा चलाने के निर्देश दिये हैं और आम जनमानस घर से बाहर हाथ में डंडे लेकर निकल रहा है जिससे कि अगर कोई भी हिंसक कुत्ता उन पर हमला करने के लिए आगे बढे़ तो वह अपनी रक्षा कर सके।
उत्तराखंड के चमोली जिले में आवारा और हिंसक कुत्तों का आतंक अब बच्चों की सुरक्षा तक पहुंच गया है। नारायणबगड़ क्षेत्र में लगातार सामने आ रहे कुत्तों के हमलों के बाद प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए 10 विद्यालयों में 20 से 23 अगस्त तक विद्यार्थियों के लिए अवकाश घोषित कर दिया है। इस दौरान बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन माध्यम से कराई जाएगी। कुत्तों के आतंक का आलम यह है कि स्थानीय लोग घरों से बाहर निकलते समय हाथों में डंडे लेकर चलने को मजबूर हैं। मुख्य शिक्षा अधिकारी चमोली आकाश सारस्वत की ओर से 19 अगस्त को जारी आदेश के मुताबिक, जिलाधिकारी गौरव कुमार के निर्देश पर नारायणबगड़ क्षेत्र के चिन्हित विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए चार दिन का अवकाश घोषित किया गया है। शिक्षकों को इस दौरान ऑनलाइन माध्यम से शिक्षण कार्य जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार रविवार और सोमवार को तीन लोगों पर हिंसक कुत्तों ने हमला किया। मंगलवार को स्कूली बच्चों समेत चार लोगों को कुत्तों ने काटा, जबकि बुधवार को चार अन्य लोगों पर हमले की सूचना सामने आई। इस तरह क्षेत्र में लगातार बढ़ती घटनाओं के बाद अभिभावकों में भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। अब तक 11 लोगों के कुत्तों के हमले में घायल होने की सूचना सामने आई है। लगातार हो रहे हमलों ने क्षेत्र में भय का माहौल पैदा कर दिया है। लोगों का कहना है कि रास्तों पर कुत्तों के झुंड दिखाई देने के कारण अकेले निकलना भी मुश्किल हो गया है। हिंसक कुत्तों को पकड़ने के लिए वन विभाग की क्विक रिस्पॉन्स टीम यानी क्यूआरटी को मैदान में उतारा गया है। टीम अब तक तीन कुत्तों को पकड़ चुकी है, जबकि अन्य हिंसक कुत्तों को पकड़ने के लिए अभियान जारी है।
पशुपालन विभाग की ओर से भी क्षेत्र में कुत्तों को रेबीज से बचाव के टीके लगाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि एक पागल कुत्ते ने दूसरे कुत्तों को काटा, जिसके बाद क्षेत्र में कुत्तों के आक्रामक होने का सिलसिला बढ़ा। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। नारायणबगड़ क्षेत्र के राजकीय आदर्श इंटर कॉलेज नारायणबगड़, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज नारायणबगड़, सरस्वती शिशु मंदिर नारायणबगड़, उत्तरांचल विद्या निकेतन, राजकीय प्राथमिक विद्यालय नारायणबगड़, श्री गुरुराम राय पब्लिक स्कूल पंती, राजकीय प्राथमिक विद्यालय नलगांव, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नलगांव, मॉडर्न चिल्ड्रेन एकेडमी नारायणबगड़ और उत्तराखंड विद्यालय निकेतन नारायणबगड़ में 20 से 23 अगस्त तक विद्यार्थियों के लिए अवकाश रहेगा।
हिंसक कुत्तों के आतंक के कारण स्कूल बंद किए जाने का मामला इससे पहले जम्मू-कश्मीर के राजौरी में भी सामने आया था। वहां कुत्तों के आतंक के चलते आठ ग्राम पंचायतों के विद्यालय एक दिन के लिए बंद किए गए थे। नारायणबगड़ में लगातार हो रहे हमलों के बाद अब 10 विद्यालयों को चार दिन के लिए बंद करने का फैसला लिया गया है। हालांकि, “भारत में दूसरी बार” होने के दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि किए बिना इसे निश्चित तथ्य के रूप में कहना उचित नहीं होगा। आवारा कुत्तों की समस्या उत्तराखंड के कई शहरों और कस्बों में लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन नारायणबगड़ में मामला अब सीधे बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा से जुड़ गया है। किसी क्षेत्र में कुत्तों के आतंक के चलते स्कूल बंद करने की नौबत आना बताता है कि समस्या को समय रहते नियंत्रित करना कितना जरूरी है।
प्रशासन ने फिलहाल बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्कूल बंद करने का फैसला लिया है, लेकिन असली चुनौती इससे आगे की है। क्यूआरटी के अभियान के बाद क्षेत्र में स्थिति कितनी सामान्य होती है और बच्चों को दोबारा सुरक्षित माहौल में स्कूल भेजने की स्थिति कब बनती है, इस पर सभी की नजर रहेगी। नारायणबगड़ की घटना ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया हैकृआवारा और हिंसक कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए आखिर हर बार किसी बड़े हादसे या लगातार हमलों का इंतजार क्यों किया जाता है? बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल बंद करने की नौबत आ गई है, ऐसे में अब अस्थायी कार्रवाई नहीं बल्कि स्थायी समाधान की जरूरत है।

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