रातभर सुबह होने का करते रहे इंतजार
सीएम ने खराब मौसम की परवाह किये बिना मौके पर डाला डेरा
टनल हादसे से दहल गये पुष्कर
चमोली/देहरादून(संवाददाता)। चमोली जनपद के मायापुर (पीपलकोटी) स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में मलबा और पानी भरने से वहां काम कर रहे सात श्रमिकों की दुखद मौत से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विचलित हो गये और टनल में फंसे मजदूरों को बडा ऑपरेशन चलाकर निकालने के लिए वह रातभर बेचौन नजर आये और उन्होंने इस दुखद घटना को लेकर झारखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से बातचीत की और उन्हें दूरभाष पर भरोसा दिलाया कि मलबे में दबे श्रमिकों को बचाने के लिए वह खुद मोर्चा संभाले हुये हैं। रातभर बेचौन रहे मुख्यमंत्री ने जब सुबह चमोली जाने के लिए तैयारी की तो उन्हें खराब मौसम होने की जानकारी दी लेकिन मुख्यमंत्री ने बेहद खराब मौसम के बीच वहां जाने का जोखिम उठाया और वह सीधे पीपलकोटी पहुंचे और उन्होंने रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी टीमों को दो टूक संदेश दिया कि प्रत्येक श्रमिक को सुरक्षित निकालना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सभी श्रमिकों को सकुशल बचाया जाये। मुख्यमंत्री ने पीपलकोटी में खराब मौसम के बीच पहुंचकर यह संदेश दिया कि वह हर आपदा में अपनों को बचाने के लिए उनके साथ खडे हैं और एक बार फिर उन्होंने अपनी देखरेख में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर वहां फंसे श्रमिकों का सफल रेस्क्यू ऑपरेशन कराकर एक बार फिर अपनी धमक दिखाई है।
मायापुर (पीपलकोटी) स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में मलबा और पानी भरने की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। हादसे में सात श्रमिकों की मौत से जहां उनके परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी घटना के बाद से लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी में जुटे रहे। घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री ने राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए। टनल में फंसे श्रमिकों को निकालने के लिए चल रहे अभियान की वह रातभर जानकारी लेते रहे। श्रमिकों में दूसरे राज्यों के लोग होने के कारण मुख्यमंत्री ने झारखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से भी दूरभाष पर बातचीत कर उन्हें स्थिति और बचाव अभियान की जानकारी दी। सुबह खराब मौसम के बावजूद मुख्यमंत्री पीपलकोटी पहुंचे और ग्राउंड जीरो पर रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा लिया। उन्होंने बचाव कार्य में लगी एजेंसियों और अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि फंसे प्रत्येक श्रमिक तक पहुंचना सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके लिए उपलब्ध सभी संसाधनों का इस्तेमाल किया जाए।
पीपलकोटी पहुंचकर मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों और श्रमिकों को यह संदेश देने की कोशिश की कि संकट की इस घड़ी में सरकार उनके साथ खड़ी है। पहाड़ में जब मौसम चुनौती बना हुआ था और टनल के भीतर हालात मुश्किल थे, तब मुख्यमंत्री का स्वयं मौके पर पहुंचकर अभियान की निगरानी करना प्रशासनिक अमले के लिए भी साफ संदेश था आपदा की घड़ी में राहत और बचाव कार्य में किसी स्तर पर ढिलाई नहीं चलेगी। हालांकि सात श्रमिकों की मौत ने इस अभियान को गहरे मातम में बदल दिया। अब हादसे के कारणों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच भी उतनी ही जरूरी है, ताकि यह सामने आ सके कि निर्माणाधीन टनल में सुरक्षा के इंतजाम पर्याप्त थे या नहीं और ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।