तीन उपचुनाव के नतीजों ने बदला सियासी माहौल

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भाजपा के लिए चेतावनी की घंटी?
उत्तराखण्ड पर अब भाजपा हाईकमान की नजरें!

2027 से पहले बदलेगा चुनावी गणित?
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। देश के पांच राज्यों में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं और इसमें उत्तराखण्ड राज्य भी शामिल है। देश के तीन राज्यों में हुये उपचुनाव में आये नतीजों ने भाजपा हाईकमान की धड़कनें तेज कर दी हैं क्योंकि तीनों राज्यों में भाजपा की सरकार है लेकिन दो राज्यों में भाजपा के कब्जे से कांग्रेस और जनता सुराज पार्टी ने दो सीटें जीतकर समूची भाजपा के माथे पर चिंता की लकीरें डाल दी हैं। 2027 से पहले उपचुनाव में भाजपा को मिली शिकस्त से उत्तराखण्ड में भाजपा के अधिकांश दिग्गज राजनेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें पड़ गई हैं और इन नतीजों से कांग्रेसी नेताओं के हौसले बुलंद हैं। अब भाजपा हाईकमान को भी इस बात पर मंथन करना पडेगा कि उत्तराखण्ड होने वाले 2027 के चुनाव में कैसे तीसरी बार कमल खिलायें?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पांच साल से आवाम के बीच जाकर सरकार के विकास का उन्हें आईना दिखा रहे हैं और उनका मानना है कि राज्य में जिस तेजी के साथ विकास हो रहा है उससे राज्य की जनता 2027 में एक बार फिर भाजपा को प्रचंड बहुमत की सरकार बनाने का तोहफा देगी। हालांकि कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेताओं का मानना है कि राज्य के अन्दर दस साल से सरकार चला रही भाजपा से आवाम का मोह भंग हो गया है और राज्य में पेपर लीक, भ्रष्टाचार और घोटालों का खेल जिस अंदाज में खेला जा रहा है उसे देखते हुए आवाम ने तय कर लिया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में वह भाजपा को सत्ता से बाहर दिखाकर उसे सबक सिखाने के लिए तैयार है।
विधानसभा चुनावों में लगातार जीत का परचम लहराने वाली भारतीय जनता पार्टी के सामने अब उपचुनाव के नतीजों ने नए राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में तीन राज्यों में हुए विधानसभा उपचुनावों में भाजपा को मिश्रित परिणाम मिले। सबसे बड़ा झटका बिहार की बांकीपुर सीट पर लगा, जिसे लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता था। यह वही सीट थी जो भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई थी। पार्टी ने इस सीट पर जीत का पूरा भरोसा जताया था, लेकिन नतीजों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। वहीं गुजरात की मंजलपुर सीट भाजपा ने बरकरार रखी, जबकि मध्य प्रदेश की दतिया सीट कांग्रेस के खाते में चली गई। बांकीपुर की हार इसलिए भी राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है क्योंकि नीतिन नवीन लगातार पांच बार इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके थे और भाजपा इसे अपनी सबसे सुरक्षित सीटों में गिनती थी। ऐसे में अपने ही राजनीतिक गढ़ में मिली हार ने भाजपा के संगठन और चुनावी रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी ने भी परिणाम के बाद आत्ममंथन की बात कही है।
अब इन नतीजों के राजनीतिक मायने उत्तराखंड तक भी पहुंच रहे हैं। विपक्ष, खासकर कांग्रेस, इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के लिए चेतावनी मानकर अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने में जुट सकती है। हालांकि, केवल उपचुनावों के आधार पर 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव का परिणाम तय मान लेना जल्दबाजी होगी। उपचुनाव अक्सर स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों और क्षेत्रीय समीकरणों से भी प्रभावित होते हैं। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि उपचुनाव के इन नतीजों ने भाजपा को यह संदेश दे दिया है कि जीत की लय बनाए रखने के लिए संगठन, जनसंपर्क और स्थानीय नेतृत्व पर पहले से अधिक मेहनत करनी होगी। वहीं विपक्ष को भी लंबे समय बाद एक ऐसा मुद्दा मिल गया है, जिसके सहारे वह आगामी चुनावी रण में भाजपा को घेरने की कोशिश करेगा। 2027 की जंग अभी दूर है, लेकिन उपचुनाव के ये परिणाम राजनीतिक गलियारों में नई बहस जरूर छेड़ चुके हैं।

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चंद मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के दाग
सत्ता के माननीयों को खनन से असीम प्रेम?

सत्ता के विधायकों में अवैध खनन का चस्का
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भले ही पांच साल से पारदर्शी और स्वच्छता भरी राजनीतिक पारी खेल रहे हैं लेकिन पार्टी के कुछ मंत्रियों पर जिस तरह से बार-बार भ्रष्टाचार के दाग लग रहे हैं उससे आवाम के मन में भी एक नाराजगी दिखाई दे रही है उससे सड़कों पर उसका आक्रोश भले ही न दिखाई दे रहा हो लेकिन वह 2027 के चुनावी रण में ऐसे दागी मंत्रियों को सबक सिखाने के लिए अभी से ही कमर कस रहे हैं जो भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं माने जा सकते? वहीं एक दशक से यह आरोप भी लगते आ रहे हैं कि भाजपा के काफी माननीय खनन प्रेमी हैं और उन्होंने अवैध खनन करने के लिए जो गोपनीय सिंडिकेट बना रखा है वह किसी से छिपा नहीं है और ऐसे माननीयों के किस्से भाजपा हाईकमान के पास भी पहुंच चुके हैं और उसी से यह आशंका प्रबल हो रही है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा हाईकमान उन माननीयों को विधानसभा चुनाव में टिकट देने के लिए आगे आने से बचेगा जिनकी छवि राज्य के अन्दर दागदार दिखाई दे रही है?
उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने आवाम के दिलों में भले ही एक बडी जगह बना रखी हो लेकिन सत्ता के काफी विधायक ऐसे हैं जो आवाम के बीच रहना पसंद ही नहीं करते और वह अहंकार की राजनीति करने में ज्यादा विश्वास रखते हैं जिससे आवाम के मन में ऐसे विधायकों को लेकर बडी नाराजगी है लेकिन वह अपनी इस नाराजगी को 2027 के विधानसभा चुनाव में अपने वोट से दूर करने की मंशा मन में पाले हुये हैं?

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