बद्रीनाथ चढ़ावा प्रकरण

0
22

आस्था, जवाबदेही और राजनीति आमने-सामने
गोदियाल और हेमंत के बीच चल रहा वॉकयुद्ध
देहरादून। बद्रीनाथ चढ़ावा प्रकरण की जांच एसआईटी कर रही है और अब तक उसने चंद गुनाहगारों को अपने शिकंजे में भले ही ले लिया हो लेकिन राजनीतिक गलियारों में ही बहस छिडी हुई है कि क्या एसआईटी के हाथ उन बडे मगरमच्छो तक भी पहुंच पायेंगे जो कहीं न कहीं इस कथित प्रकरण में अभी पर्दे के पीछे खडे ही नजर आ रहे हैं? बद्रीनाथ मन्दिर चढावा प्रकरण में उत्तराखण्ड से लेकर देशभर में सियासत गर्माई हुई है तो वहीं इस प्रकरण को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष और बीकेटीसी अध्यक्ष के बीच खुलकर वॉकयुद्ध चल रहा है। बद्रीनाथ धाम प्रकरण ने राजनीतिक तूल पकड रखा है और मन्दिर में जिम्मेदार लोगों पर भी खुलकर सवाल खडे हो रहे हैं। चढ़ावा विवाद पर सियासी संग्राम मचा हुआ है और जवाबदेही को लेकर पक्ष-विपक्ष सामने आ रखा है। वहीं भाजपा व कांग्रेस के बयानवीरों के बीच चल रहे शब्दबाणों से सियासी तपिश खुलकर देखने को मिल रही है और आस्था के केन्द्र पर विवाद ने अब जवाबदेही की कसौटी पर कई सवाल खडे कर दिये हैं।
उल्लेखनीय है कि जबसे बद्रीनाथ मन्दिर में चढावा प्रकरण सामने आया है तबसे कांग्रेस के प्रदेश अध्यख गणेश गोदियाल ने सरकार और बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी पर खुलकर प्रहार कर रखा है और उनका दो टूक कहना है कि इस मामले की जांच न्यायालय के रिटायर्ड जज से होनी चाहिए जिससे इस चढ़ावा प्रकरण का सारा राज आवाम के सामने खुलकर आ सके। सरकार ने इस मामले की जांच रिटायर्ड जज से न कराकर एसआईटी से कराने को हरी झंडी दी थी जिसके बाद एसआईटी ने अपनी जांच को आगे बढ़ाते हुए इस मामले में अब तक चंद लोगों पर एक्शन लिया है। हालांकि सवाल यह भी तैर रहे हैं कि जब इस मामले में बीकेटीसी अध्यक्ष पर आरोप लग रहे हैं तो फिर वह अपने पद से इस्तीफा क्यों नहीं दे रहे क्योंकि उनके पद पर रहते हुए कैसे यह जांच निष्पक्ष तरीके से हो पायेगी यह अपने आपमें कई सवाल खडे कर रहा है। मन्दिर चढावा प्रकरण में पिछले काफी समय से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के बीच खुलकर वॉकयुद्ध चल रहा है। चंद दिन पूर्व गणेश गोदियाल ने हेमंत द्विवेदी से इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस करने की चुनौती स्वीकार करी थी और वह खुद प्रेस क्लब पहुंचे थे लेकिन हेमंत द्विवेदी वहां आने से बचे जिसको लेकर उन पर सवाल खडे हुये थे कि जब उन्होंने खुद गणेश गोदियाल को चुनौती दी थी तो फिर वह चुनौती देकर प्रेस क्लब क्यों नहीं पहुंचे थे?
बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। इस मुद्दे पर लगातार बयानबाजी तेज होती जा रही है और जवाबदेही तय करने की मांग भी मुखर होने लगी है। इसी क्रम में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। हेमंत द्विवेदी ने कहा कि बद्रीनाथ मंदिर, राम जन्मभूमि ट्रस्ट की फ्रेंचाइजी नहीं है। दोनों संस्थाओं की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था अलग-अलग है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया।
वहीं, मामले में जिम्मेदारी तय करने और नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग को लेकर भी विपक्ष हमलावर है। विपक्ष का कहना है कि आस्था से जुड़े इतने बड़े मामले में सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि स्पष्ट जवाबदेही तय होनी चाहिए। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष का कहना है कि मामले की जांच चल रही है और जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। बद्रीनाथ धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में इस प्रकरण को लेकर प्रदेश की जनता की नजरें जांच एजेंसियों और सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। अब सभी की निगाह इस बात पर है कि जांच के निष्कर्ष क्या सामने आते हैं और दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।

LEAVE A REPLY