सिर्फ सरकार नहींः बदलते उत्तराखण्ड की

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नई तस्वीर का नाम है ‘धुरंधर’
विकास, विश्वास और बदलाव की दिशा में दौड़ लगाता उत्तराखण्ड
जब विकास राजनीति का बने केन्द्र, तब बदलती है तस्वीर
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के युवा मुख्यमंत्री राज्य को नई पहचान दिलाने की जिस उड़ान पर उड़े हुये हैं उसके चलते उत्तराखण्ड की कहानी नई सोच, नये फैसले और दबंगता के साथ राजनीति कर रहे नेतृत्व पर जा टिकी है और राज्य की जनता युवा मुख्यमंत्री को ऊर्जावान मुख्यमंत्री मानकर उनकी कायल हो रखी है। उत्तराखण्ड की विकास यात्रा में धाकड से धुरंधर बनने वाले युवा मुख्यमंत्री की भूमिका अब देशभर में चर्चा का विषय बनती जा रही है क्योंकि उत्तराखण्ड के बदलते दौर की नई इबारत लिखने के लिए मुख्यमंत्री रात-दिन विकास की पिच पर जिस तरह से बडे-बडे शॉट लगाकर राज्य के हर जनपद को गुलजार करने में लगे हुये हैं उससे उत्तराखण्ड के अन्दर वह सुपर सीएम का ताज अपने सिर पर बंदवा चुके हैं। उत्तराखण्ड की बदलती तस्वीर और राज्य में आने वाले हर चुनौती को जिस हौसले के साथ मुख्यमंत्री कबूल करते हैं वह आवाम को खूब रास आ रही है।
राजनीति में कई चेहरे आते हैं, कई सरकारें बनती हैं, अनेक घोषणाएँ होती हैं और समय के साथ सब कुछ बदल जाता है। लेकिन कुछ दौर ऐसे भी आते हैं, जब किसी राज्य की दिशा बदलने की कोशिश स्वयं एक राजनीतिक विमर्श बन जाती है। उत्तराखण्ड में पिछले कुछ वर्षों के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कार्यकाल इसी चर्चा के केंद्र में रहा है। हिमालय की गोद में बसे इस राज्य की चुनौतियाँ हमेशा से कठिन रही हैं। एक ओर दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियाँ, दूसरी ओर पलायन, सीमित संसाधन, आपदाओं का खतरा और युवाओं की बढ़ती आकांक्षाएँ। ऐसे प्रदेश में विकास का अर्थ केवल नई सड़कें बनाना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करना है जो आने वाली पीढ़ियों को अवसर भी दे और भरोसा भी। धामी सरकार ने पर्यटन, निवेश, आधारभूत ढाँचे, कनेक्टिविटी, खेल, साहसिक पर्यटन और प्रशासनिक सुधार जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की बात कही है। राज्य को निवेश के लिए आकर्षक बनाने, पर्यटन को वर्षभर की आर्थिक गतिविधि से जोड़ने और विकास परियोजनाओं को गति देने के प्रयास इस सोच का हिस्सा रहे हैं। इन पहलों का असर कितना व्यापक और स्थायी होगा, इसका मूल्यांकन समय करेगा, लेकिन यह स्पष्ट है कि विकास को राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में रखने की कोशिश लगातार दिखाई देती है।
राजनीति में केवल भाषण नहीं, निर्णय नेतृत्व की पहचान बनाते हैं। मुख्यमंत्री धामी की कार्यशैली को लेकर समर्थक अक्सर कहते हैं कि वे प्रशासनिक मशीनरी को परिणाम आधारित तरीके से काम करने के लिए प्रेरित करने का प्रयास करते हैं। आपदा की घड़ी हो, निवेशकों के साथ संवाद हो या विकास परियोजनाओं की समीक्षाकृसरकार ने इन मोर्चों पर सक्रियता दिखाने की कोशिश की है। उत्तराखण्ड की असली परीक्षा अब भी बाकी है। पहाड़ों से पलायन रोकना, सीमांत क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा पहुँचाना, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना और विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखनाकृये ऐसे लक्ष्य हैं जिन पर निरंतर काम करना होगा। किसी भी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि वही होगी जो इन चुनौतियों के समाधान में दिखाई दे। फिर भी, यह स्वीकार करना होगा कि उत्तराखण्ड की राजनीति में पुष्कर सिंह धामी ने अपने नेतृत्व की एक अलग पहचान बनाने का प्रयास किया है। समर्थक इसे नए उत्तराखण्ड की परिकल्पना मानते हैं, जबकि आलोचक भी उनकी नीतियों और फैसलों पर गंभीर बहस करते हैं। किसी भी लोकतंत्र में यही सबसे महत्वपूर्ण बात होती है कि नेतृत्व चर्चा के केंद्र में हो और उसके काम का मूल्यांकन जनता करे।
इतिहास हमेशा पदों को नहीं, बल्कि प्रभाव को याद रखता है। उत्तराखण्ड की बदलती यात्रा का अंतिम निर्णय भी आने वाला समय और प्रदेश की जनता करेगी। लेकिन इतना अवश्य है कि विकास, निवेश, पर्यटन और सुशासन की चर्चा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का नाम आज राज्य की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल है। आने वाले वर्षों में यही तय होगा कि यह प्रयास उत्तराखण्ड के भविष्य को कितनी दूर तक नई दिशा दे पाता है।

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