फरियादियों मंे भरोसा जगा रहे कप्तान
थानों में फरियादियों का सम्मानः अपराधियों की उल्टी गिनती
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड की राजधानी में आवाम का दिल जीतने का जो पुलिस कप्तान ने मात्र कुछ माह में ही करिश्मा कर दिखाया है उसको देखते हुए राजधानी की जनता मुख्यमंत्री को एक सफल मुख्यमंत्री का ताज पहनाने में पीछे नहीं हट रही। राजधानी में पुलिस कप्तान के रूप में तैनात हुये आईपीएस ने जबसे कार्यभार संभाला है तबसे अपराधियों में उनका खौफ देखा जा रहा है और फरियादियों में पुलिस कप्तान को लेकर एक बडा भरोसा बन गया है कि उनके होते हुए कोई भी पुलिस का अफसर या दरोगा उनके साथ अन्याय नहीं कर सकता। कप्तान ने दो टूक संदेश दे रखा है कि जनपद में आवाम को न्याय में कभी भी देरी नहीं होगी और अपराधियों पर पुलिस कभी नरम नहीं होगी। मुख्यमंत्री के विजन को धरातल पर उतारने के लिए पुलिस कप्तान ने जनपद के थानों में फरियादियों का सम्मान कराने का जहां दो टूक संदेश दे रखा है वहीं थानों में अपराधियों की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है क्योंकि पुलिस कप्तान ने अपराधियों और माफियाओं से सीधी जंग का ऐलान कर रखा है।
किसी भी जिले की असली तस्वीर उसके पुलिस तंत्र से झलकती है। सड़क पर चलता आम आदमी तब खुद को सुरक्षित महसूस करता है जब उसे यह भरोसा हो कि मुसीबत की घड़ी में पुलिस उसके साथ खड़ी मिलेगी और कानून तोड़ने वाला कितना भी शातिर क्यों न हो, वह कानून के शिकंजे से बच नहीं पाएगा। देहरादून में पुलिस कप्तान प्रमेंद्र सिंह डोबाल के नेतृत्व में पुलिस की कार्यशैली को इसी सोच के साथ आगे बढ़ाने का प्रयास दिखाई देता है। पुलिस का कहना है कि जनपद के सभी थाना प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि थाने में आने वाला कोई भी फरियादी निराश होकर वापस नहीं लौटना चाहिए। उसकी शिकायत को गंभीरता से सुना जाए, उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कानून के अनुरूप त्वरित कार्रवाई की जाए। पुलिस व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत केवल हथियार नहीं, बल्कि जनता का विश्वास है और यही विश्वास हर पुलिसकर्मी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी है।
बीते समय में दून पुलिस ने नशा तस्करी, वाहन चोरी, साइबर अपराध, अवैध हथियार, फरार अपराधियों की गिरफ्तारी, सार्वजनिक स्थानों पर हुड़दंग, खतरनाक ड्राइविंग और कानून-व्यवस्था से जुड़े अनेक मामलों में लगातार कार्रवाई की है। कई मामलों में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और शिकायतों पर भी त्वरित संज्ञान लेकर कार्रवाई की गई। इन अभियानों का उद्देश्य केवल मुकदमे दर्ज करना नहीं, बल्कि यह संदेश देना भी है कि कानून का पालन करने वालों की सुरक्षा और कानून तोड़ने वालों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई, दोनों पुलिस की प्राथमिकता हैं। आज अपराध का स्वरूप बदल चुका है। साइबर ठगी से लेकर नशे के नेटवर्क और संगठित अपराध तक पुलिस के सामने नई चुनौतियां हैं। ऐसे समय में केवल गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं होती, बल्कि समय पर प्रतिक्रिया, तकनीक का उपयोग, मजबूत खुफिया तंत्र, जनता से संवाद और थाना स्तर पर जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी होती है। दून पुलिस का प्रयास इसी दिशा में दिखाई देता है कि पुलिसिंग केवल वर्दी की ताकत से नहीं, बल्कि सेवा, संवेदनशीलता और कानून के निष्पक्ष पालन से पहचानी जाए।
एक पुलिस कप्तान की सबसे बड़ी सफलता तब मानी जाती है जब अपराधी कानून का नाम सुनकर कदम पीछे खींचे और पीड़ित व्यक्ति यह विश्वास लेकर थाने पहुंचे कि उसकी आवाज अनसुनी नहीं होगी। यदि थाना आम नागरिक के लिए न्याय की पहली चौखट बन जाए और अपराधी के लिए कानून का सबसे मजबूत दरवाजा, तो यही किसी भी पुलिस नेतृत्व की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। देहरादून जैसे तेजी से विकसित हो रहे जनपद में पुलिस के सामने चुनौतियां हर दिन नई हैं, लेकिन एक बात हमेशा स्थायी रहती है। जनता का विश्वास। यही विश्वास पुलिस की सबसे बड़ी पूंजी है। यदि यह भरोसा लगातार मजबूत होता है और कानून का निष्पक्ष पालन उसी दृढ़ता से जारी रहता है, तो दून की पहचान केवल राजधानी के रूप में नहीं, बल्कि मजबूत कानून-व्यवस्था और जनविश्वास वाली पुलिसिंग के उदाहरण के रूप में भी स्थापित हो सकती है।