चुनावी रण में सीएम की हुंकारः विकास बनाम विपक्ष की सियासत
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आवाम की नब्ज को पहचानकर दिलेरी के साथ सरकार चलाने का जो रूतबा विपक्ष को दिखाया है उससे विपक्ष के माथे पर चिंता की लकीरें हैं क्योंकि मुख्यमंत्री ने अपनी स्वच्छ छवि के चलते अपने ऊपर पांच साल में एक भी दाग नहीं लगने दिया और वह बेदाग होकर सरकार चलाने में ही विश्वास रखते आ रहे हैं। हर क्षेत्र में विकास की जिस उडान को उडने के लिए उन्होंने अपने पंख फैलाये वह आवाम को खूब भा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के हाथ से दो बार सत्ता छीनी और अब इस साल के अंत में एक बार फिर विधानसभा चुनाव होना है और मुख्यमंत्री ने संकल्प ले रखा है कि वह आवाम के बीच जाकर उन्हें डबल इंजन सरकार के विकास से रूबरू कराकर इस बार भी राज्य के अन्दर कमल खिलायेंगे और कांग्रेस का सरकार में आने का सपना एक बार फिर वह धडाम कर देंगे।
उत्तराखंड की राजनीति में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले पांच वर्षों के दौरान अपनी कार्यशैली, तेज निर्णय क्षमता और लगातार जनता के बीच सक्रिय रहकर एक अलग पहचान बनाई है। उनके समर्थकों का दावा है कि उन्होंने सत्ता को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि विकास, सुशासन और जवाबदेही को सरकार की पहचान बनाने का प्रयास किया। यही वजह है कि भाजपा अब आगामी विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व और सरकार की उपलब्धियों को सबसे बड़ा चुनावी आधार मानकर मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मुख्यमंत्री धामी ने अपने कार्यकाल में कई ऐसे निर्णय लिए, जिन्होंने राज्य की राजनीति में अलग संदेश दिया। समान नागरिक संहिता (यूसीसी), नकल विरोधी कानून, भू-कानून में बदलाव, धर्मांतरण विरोधी कानून, निवेश को बढ़ावा, सड़क और स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार, पर्यटन विकास तथा चारधाम यात्रा को बेहतर बनाने जैसे कदमों को भाजपा अपनी बड़ी उपलब्धियों के रूप में जनता के सामने रख रही है। समर्थकों का यह भी कहना है कि पांच वर्षों के कार्यकाल में मुख्यमंत्री ने अपनी व्यक्तिगत छवि को विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों से दूर रखते हुए सरकार का नेतृत्व किया।
आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा अब गांव-गांव और शहर-शहर जाकर डबल इंजन सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों को जनता तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी का मानना है कि पिछले वर्षों में हुए विकास कार्य, केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय तथा मुख्यमंत्री धामी की कार्यशैली जनता का विश्वास दोबारा जीतने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। दूसरी ओर कांग्रेस भी बेरोजगारी, महंगाई, पलायन, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य जनसरोकारों को लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठा रही है। ऐसे में आने वाला विधानसभा चुनाव विकास बनाम विपक्ष के आरोपों के बीच एक बड़ा राजनीतिक मुकाबला माना जा रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि उत्तराखंड का आगामी चुनाव मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व, भाजपा की विकास यात्रा और विपक्ष की चुनावी रणनीति की सबसे बड़ी परीक्षा होगा। अब यह तय जनता को करना है कि वह सरकार के विकास के दावों पर भरोसा जताती है या विपक्ष के मुद्दों को प्राथमिकता देती है। आने वाले महीनों में चुनावी सरगर्मी और तेज होने के साथ राज्य की राजनीति का पूरा फोकस जनता के जनादेश पर रहेगा।