धामी राज में जिंदा होगा लोकायुक्त!

0
10

2027 के चुनाव से पहले सीएम पर सबकी निगाहें
कांग्रेस के हाथ से मुद्दा छीन सकते हैं धुरंधर!
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने राज्य के अन्दर लोकायुक्त के गठन को लेकर अपनी आवाज बुलंद कर रखी है और उसका दो टूक कहना है कि राज्य में जिस तरह से भ्रष्टाचार का खेल लम्बे अर्से से चल रहा है उसे नेस्तनाबूत करने के लिए लोकायुक्त की नियुक्ति होना जरूरी है और राज्य में कांग्र्रेस की सरकार बनते ही मजबूत लोकायुक्त का गठन किया जायेगा। वहीं कुछ संगठन भी राज्य के अन्दर लोकायुक्त के गठन को लेकर आक्रोशित हैं और वह सड़कों पर धरना प्रदर्शन कर लोकायुक्त का गठन करने को लेकर अपनी आवाज तेजी से बुलंद कर रहे हैं। उत्तराखण्ड के अन्दर लोकायुक्त को लेकर जो सियासत चल रही है उसे देखते हुए यह संभावनायें प्रबल हो रही हैं कि मुख्यमंत्री कांग्रेस के हाथ से इस मुद्दे को चुनाव से काफी पहले छीनकर राज्य के अन्दर लोकायुक्त को जिंदा करने के लिए अपना मास्टर स्ट्रोक खेल सकते हैं? अगर मुख्यमंत्री ने लोकायुक्त बनाने को लेकर बडी पहल की तो उससे कांग्रेस को बडा झटका लग सकता है।
उत्तराखण्ड के अन्दर पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खण्डूरी के मन में राज्य को भ्रष्टाचार और घोटालों से मुक्त करने का एक बडा साहस देखने को मिलता था और उनके मन में हमेशा एक पीडा रहती थी कि जिस राज्य को आंदोलन करके हासिल किया गया वहां भ्रष्टाचार और घोटालों का अंत होना ही चाहिए। वहीं स्वर्गीय पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खण्डूरी ने अपने शासनकाल में राज्य के अन्दर जब एक सशक्त लोकायुक्त का गठन किया था तो उस लोकायुक्त की धूम समूचे देश के अन्दर देखने को मिली थी और लोकायुक्त के पक्षधर अन्ना हजारे ने भी भुवन चंद खण्डूरी के लोकायुक्त को एक मजबूत लोकायुक्त बताकर उनकी पीठ थपथपाई थी। स्वर्गीय भुवन चंद खण्डूरी के द्वारा बनाया गया लोकायुक्त पास होने के बावजूद उनके बाद आई कांग्र्रेस व भाजपा की सरकारों को आखिरकार भुवन चंद खण्डूरी के लोकायुक्त को देखकर क्यों करंट लगता रहा है जिसके चलते वह इस लोकायुक्त को राज्य में हरी झण्डी देने को कभी तैयार ही नहीं दिखी? उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 2025 तक राज्य को भ्रष्टाचार और घोटालेमुक्त बनाने का संकल्प लिया है और उन्हांेने राज्य में भ्रष्टाचार से हुई भर्तियांे को लेकर नकल विरोधी कानून बनाया तो वहीं उन्होंने राज्य मंे सामान नागरिक सहिता कानून बनाने को लेकर एक कमेटी का गठन भी किया हुआ है लेकिन राज्य की जनता के मन मंे आज भी एक पीडा है कि आखिरकार उनका अपना उत्तराखण्ड कब भ्रष्टाचारियों के चंगुल से आजाद हो पायेगा?
उत्तराखण्ड में आज भी काफी राजनेता और अफसर ऐसे हैं जिन्हांेने भ्रष्टाचार से बेनामी और अकूत सम्पत्तियों का साम्राज्य खडा कर रखा है? सरकार के पास ऐसा कोई मजबूत तंत्र अभी तक मौजूद नहीं है जिससे वह भ्रष्ट राजनेताओं और अफसरों की काली कमाई का सारा राज बेनकाब करने के लिए एक बडे मिशन के साथ कोई ऑपरेशन चलाकर उन्हें बेनकाब कर सकें? उत्तराखण्ड के अन्दर यह सवाल भी खडे हो रहे हैं कि जब राज्य को भ्रष्टाचारमुक्त करने का संकल्प लिया जा रहा है तो फिर खण्डूरी के लोकायुक्त को जिंदा कर सरकार के मुखिया भ्रष्टाचारियांे और घोटालेबाजों को संदेश क्यों नहीं दे रहे कि अब लोकायुक्त ही भ्रष्टाचार पर प्रहार करेगा?
उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचार और घोटालों के खिलाफ अपना रूख साफ करने वाले राज्य के मुख्यमंत्री ने नकल विरोधी कानून बनाने से लेकर सामान नागरिक सहिता कानून को राज्य में लागू करने के लिए अपने कदम आगे बढा रखे हैं लेकिन राज्य में फैले भ्रष्टाचारियों और बेनामी सम्पत्तियों का किला खडा करने वाले भ्रष्ट राजनेताओं व अफसरों पर नकेल लगाने के लिए सरकार के पास अभी तक ऐसा कोई तंत्र नहीं है जिसके सहारे वह ऐसे भ्रष्ट चेहरों को बेनकाब कर सके? बहस चल रही है कि पुष्कर सरकार को राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भुवन चंद खण्डूरी के बनाये लोकायुक्त को जिंदा कर उसे मजबूती के साथ खडा करे जिससे राज्य को बाइस सालों से लूटते आ रहे सफेदपोशों और भ्रष्ट अफसरों की बेनामी सम्पत्तियों और उनके द्वारा भ्रष्टाचार से कमाई गई सम्पत्तियांे का काला राज उत्तराखण्ड की जनता के सामने आ सके? मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 2027 में होने वाले चुनाव से पहले लोकायुक्त का गठन कर विपक्ष को एक बडा झटका दे सकते हैं।

LEAVE A REPLY