कैट का सहारा नहीं आया कामः सरकार ने पलट दी बाजी
शैलेश बगोली को राहत, जोशी-गर्ग की उम्मीदों पर ग्रहण!
देहरादून। उत्तराखंड की नौकरशाही और पुलिस महकमे में पिछले कई दिनों से सुर्खियों में चल रहे आई पी एस अधिकारियों अरुण मोहन जोशी और नीरू गर्ग के प्रतिनियुक्ति विवाद में आज सरकार ने बड़ी कानूनी बाजी मार ली। लंबे समय से सरकार के फैसलों को चुनौती देकर वापसी की उम्मीद लगाए बैठे दोनों अधिकारियों को आज उस वक्त तगड़ा झटका लगा, जब हाईकोर्ट ने गृह सचिव और डीजीपी की याचिका स्वीकार करते हुए कैट में चल रही अवमानना कार्यवाही को ही खारिज कर दिया। अदालत के इस फैसले की दिल्ली से देहरादून तक गूँजी सरकार की कानूनी जीत। अब सबकी नजरें इसी बात पर टिकी हुई हैं कि कैट में दोनो अफसरों के तबादले को लेकर चल रहा मामला अब आगे किस अंजाम तक पहुंचेगा?
उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व केन्द्र सरकार ने उत्तराखण्ड में तैनात आईपीएस अरूण मोहन जोशी और नीरू गर्ग को प्रतिनियुक्ति पर भेजने के लिए उत्तराखण्ड सरकार को आदेश दिया था। केन्द्र सरकार के आदेश के बाद उत्तराखण्ड सरकार ने दोनो अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए उत्तराखण्ड से कार्यमुक्त कर दिया था। कुछ समय पहले प्रतिनियुक्ति आदेश को चुनौती देते हुए दोनों अधिकारियों ने पहले उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लंबी बहस चली, लेकिन जब कोर्ट में बात बनती नहीं दिखी तो याचिका वापस लेकर मामला केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण यानी कैट दिल्ली पहुँचाया गया। वहाँ से दोनों अधिकारियों को अंतरिम राहत तो मिल गई, लेकिन उसके बाद उन्होंने सीधे उत्तराखंड सरकार के गृह सचिव शैलेश बगोली के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू कर दी थी।
बताया जा रहा है कि कैट में यह आरोप लगाया गया कि सरकार ने अंतरिम आदेश का पालन नहीं किया। इसके बाद गृह सचिव शैलेश बगोली को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का नोटिस जारी हुआ और आज दिल्ली में सुनवाई तय थी लेकिन ठीक उससे पहले सरकार ने ऐसा दांव चला जिसने पूरा खेल ही पलट दिया? उत्तराखंड सरकार की ओर से गृह सचिव शैलेश बगोली और डीजीपी दीपम सेठ ने हाईकोर्ट में विशेष याचिका दाखिल कर कैट की अवमानना कार्यवाही को चुनौती दे डाली। मामला चीफ जस्टिस और जस्टिस उपाध्याय की खंडपीठ के सामने पहुँचा जहाँ घंटों चली बहस के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। लंच के बाद जैसे ही आदेश आया, सरकारी खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई। हाईकोर्ट ने सरकार की याचिका स्वीकार करते हुए कैट में चल रही अवमानना कार्यवाही को निरस्त कर दिया और गृह सचिव शैलेश बगोली को व्यक्तिगत रूप से पेश होने से भी छूट दे दी।
कानूनी गलियारों में इस आदेश को सरकार की बड़ी रणनीतिक जीत माना जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ अरुण मोहन जोशी और नीरू गर्ग के लिए इसे बड़ा झटका बताया जा रहा है। जिन उम्मीदों के सहारे दोनों अधिकारी उत्तराखंड में वापसी और दोबारा कार्यभार संभालने के सपने देख रहे थे, आज उस उम्मीद को अदालत के आदेश ने गहरा धक्का दे दिया? राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि सरकार ने साफ संदेश दे दिया है कि प्रशासनिक फैसलों पर दबाव की राजनीति अब आसान नहीं होगी। वहीं दूसरी ओर इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दिखा दिया कि सरकार अपने वरिष्ठ अधिकारियों के बचाव में पूरी मजबूती से खड़ी है।
