वनाग्नि की स्थिति से निपटने के लिए सरकार तैयार

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देहरादून(संवाददाता)। वन एवं पर्यावरण मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा है कि पृथ्वी के बढ़ते तापमान, लंबे समय तक सूखा, अनियमित मॉनसून, अल-नीनो और अन्य कारणों से उत्तराखण्ड के वनों में वनाग्नि की घटनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि वनाग्नि की स्थिति से निपटने के लिए सरकार पूरी तरह से तैयार है और शासन ने वर्ष 2००3 में वनाग्नि को दैवीय आपदा की श्रेणी में रखा गया है।
यहां राजपुर रोड स्थित मंथन सभागार में प़त्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में मौसम विज्ञान केन्द्र, देहरादून से जारी पूर्वानुमान के अनुसार उत्तराखंड राज्य में आगामी दिनों में तापमान में वृद्धि एवं सूखा दौर की सम्भावना है। विगत वर्षों की वनाग्नि घटनाओं के अनुसार हर एक-दो साल के अन्तराल बाद वनाग्नि घटनाओं में वृद्धि देखी गयी है। उनियाल ने कहा है कि वनाग्नि प्रबन्धन व नियंत्रण हेतु वन विभाग, उत्तराखंड शासन के साथ साथ विभिन्न संस्थाओं, एजेंसियों, स्थानीय स्तर पर जन जागरूकता अभियान, प्रचार-प्रसार एवं आम-जनमानस के सहयोग एवं समन्वय से वनाग्नि नियंत्रण के प्रयास एवं नवाचारों को अपनाने का कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया किउत्तराखण्ड वन विभाग के नियंत्रण में आरक्षित वनों का क्षेत्रफल 25138.1814 वर्ग किमी। चीड़ वन का क्षेत्रफल 389०.526 वर्ग किमी. (कुल वन क्षेत्र का 15.45 प्रतिशत), क्षेत्रीय एवं अक्षेत्रीय कुल वृत्त 11, वन प्रभाग 43, रेंज 283 एवं बीट 2393. कुल गठित वन पंचायतें 11,217 है। विगत 1० वर्षों में प्रदेश के अन्तर्गत कुल घटित वनाग्नि घटनाएं 14,638 कुल प्रभावित क्षेत्र 23682.77 हैक्टेयर है।,
उन्होंने कहा कि इन घटनाओं में मानव मृत्यु 35 व मानव घायल 76 हुए है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2०26 में वनाग्नि घटनायें 394, प्रभावित क्षेत्र 331.12 हैक्टयर, मानव क्षति एक हुई है। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर मुख्यालय स्तर पर क्रू-स्टेशनों की संख्या 1438, मास्टर कंट्रोल रूम 4० तथा वॉच टावर 174, वायरलैस सैट रिपीटर-45, बेस सेट-488, जीपीएस 15०7 वॉकी-टॉकी हैंडसेट-1548 मोबाईल सेट-248 एवं कुल फायर लाईन की लम्बाई 13०85.०3 किमी है। उन्होंने कहा कि फॉरेस्ट फायर रिस्क जोनेशन मैपिंग के अनुसार वनाग्नि के दृष्टिगत संवेदनशील जनपद अल्मोड़ा, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, नैनीताल और पिथौरागढ़ है और आईवीआरएस। टोल फ्री कॉल 1926, उत्तराखंड फॉरेस्ट फायर मोबाइल एप, शीतलाखेत मॉडल के आधार पर जड़धार मॉडल स्थापित किया। उनियाल ने कहा है कि आड़ा फूकान आदि को नियंत्रित करने हेतु ओण दिवस का प्रावधान किया गया है और चीड पिरूल एकत्रीकरण कार्य से स्थानीय जनता को सीधे जोडऩे तथा आजीविका में वृद्धि किये जाने के दृष्टिगत शासन द्वारा चीड़ पिरूल एकत्रीकरण के लिए दस रूपए प्रति किलोग्राम किया गया है। इस अवसर पर पत्रकार वार्ता में अनेक अधिकारी मौजूद रहे।

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