भ्रष्टाचार के नाम से धुरंधर को नफरत

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सेटिंगबाजों की नाक में सीएम ने डाली नकेल
मोदी के भ्रष्टाचारमुक्त भारत के विजन को पंख लगाते धामी
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। सैनिक पुत्र ने राजनीति की एबीसीडी का ज्ञान अपने पिता से लिया था क्योंकि उनके पिता ने यही पाठ पढाया था कि राजनीति एक सेवा है न कि मेवा। पिता की बात को मन में धारण करके ही युवा मुख्यमंत्री अपनी स्वच्छ राजनीति के बल पर ही आगे बढते चले गये और कम उम्र में ही उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली तो उन्होंने देश के प्रधानमंत्री के भ्रष्टाचारमुक्त भारत के विजन को पंख लगाने के लिए जो उडान भरी उसे देखकर जहां भाजपा की बडी लीडरशिप उन्हें बडे विजन वाला राजनेता मान गई तो वहीं राज्य की जनता भी मुख्यमंत्री से उम्मीद बांधे हुये है कि वही राज्य को गुलजार करने के लिए आगे आ रखे हैं। चार साल से मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार और घोटालेबाजों से खुली नफरत करते हुए दिखाई दे रहे हैं तो वहीं सचिवालय से लेकर अधिकांश सरकारी महकमों में सेटिंग-गेटिंग करने वालों की नाक में नकेल डालने का जो हुनर मुख्यमंत्री ने दिखाया उसी के चलते उन्हें राज्य की जनता अब धुरंधर मुख्यमंत्री के रूप में देखने लगी है। प्रधानमंत्री की उम्मीदों पर हमेशा खरा उतरते आ रहे मुख्यमंत्री से राज्य की जनता उम्मीद बांधे हुये है कि डबल इंजन की सरकार से ही उत्तराखण्ड का विकास सम्भव है और चार साल में मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड को विकास के पथ पर ले जाने के लिए जो जज्बा दिखाया है उसी के चलते वह चार सालों से देश के प्रधानमंत्री के सखा और लाडले बने हुये हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चार साल पहले जब मंच से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी तो उसी दिन उन्होंने मंच से ऐलान कर दिया था कि उत्तराखण्ड को एक नया उत्तराखण्ड बनाना उनका पहला विजन है। मुख्यमंत्री ने दो टूक चेतावनी दी थी कि राज्य के अन्दर एक लम्बे दशक से भ्रष्टाचार और घोटाले करने वाले अब संभल जायें और अगर उन्होंने उनके राज में घोटाले या भ्रष्टाचार करने का दुसाहस किया तो उन्हें इसका बडा खामियाजा भुगतना पडेगा। भ्रष्टाचारियों से खुली नफरत करने वाले राज्य के मुख्यमंत्री ने अपने शासनकाल में जिस तरह से एक के बाद एक छोटे से लेकर बडे भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाने का काम किया उससे वह उत्तराखण्ड के अन्दर एक कडक शासक के रूप में भी अपनी पहचान बना चुके हैं। धाकड से धुरंधर बने मुख्यमंत्री ने आवाम को यह दिखा रखा है कि अगर किसी राजनेता में भ्रष्टाचार और घोटाले का अंत करने की इच्छाशक्ति हो तो एक भी भ्रष्टाचारी और घोटालेबाज राज्य के अन्दर अपने धंधे को अंजाम नहीं दे पायेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का मुख्यमंत्री के रूप में चार साल का राजनीतिक सफर आवाम को खूब रास आ रहा है और जनता भी यह चाहती है कि राज्य के मुख्यमंत्री को अभी लम्बा समय उत्तराखण्ड को गुलजार करने के लिए मिलना चाहिए जिससे उत्तराखण्ड एक नया उत्तराखण्ड बन सके।
उत्तराखण्ड के खटीमा से विधायक रहे पुष्कर सिंह धामी को जब भाजपा हाईकमान ने मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन किया था तो राज्यवासी से लेकर बडे-बडे राजनेता भी हैरान हो गये थे कि जिस राजनेता को भाजपा ने कभी मंत्री तक नहीं बनाया उन्हें आखिरकार कैसे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन कर दिया गया? मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन होने के बाद पुष्कर सिंह धामी ने 20-20 क्रिकेट मैच की तरह राजनीतिक पिच पर हर बॉल पर चौके-छक्के लगाने के लिए उन्होंने एक रणनीति के तहत काम किया और वह पारदर्शिता के साथ सरकार चलाने के लिए जब आगे बढने लगे तो आवाम को भी यह इल्म हो गया था कि पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड की एक बडी उम्मीद हैं। मुख्यमंत्री ने सरकार मे आसीन होने के बाद सीधा संदेश दिया था कि वह जनसेवक बनकर आवाम की रक्षा करेंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सादगी और उनका हमेशा फ्लावर वाला रूप आवाम को खूब रास आने लगा और उन्हें यह विश्वास होता आ रहा है कि उन्हें एक ऐसा दिल अजीज मुख्यमंत्री मिला है जो कभी भी छोटे-बडों मे भेदभाव नहीं करता और सबको साथ लेकर चलने मे ही वह विश्वास दिखाते हैं। उत्तराखण्ड को एक नया उत्तराखण्ड बनाने के लिए पुष्कर सिंह धामी ने आवाम के सामने एक बडा संकल्प लिया था और उस संकल्प को पूरा करने के लिए वह रात-दिन उत्तराखण्ड से लेकर दिल्ली मे विकास की नई पटकथा लिखते हुए नजर आ रहे हैं। सबसे अह्म बात यह है कि मुख्यमंत्री ने अपनी किचन टीम मे एक से एक धाकड अफसरों को तैनात किया हुआ है जिन पर कभी भ्रष्टाचार का कोई दाग नहीं लगा है और वह सरकार को सही दिशा मे ले जाने के लिए हमेशा अगली पक्ति मे खडे हुये नजर आते हैं।
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री को अपना सखा और छोटा भाई सिर्फ इसलिए मान रखा है क्योंकि मुख्यमंत्री धामी ने सल्तनत चलाने के लिए अपने आपको गंगाजल की तरह पवित्र रखा हुआ है और वह भ्रष्टाचार व घोटाले का नाम सुनते ही आग बबुला हो जाते हैं। मुख्यमंत्री अपने आपको सल्तनत का सिपाही मानकर उसकी रक्षा करने के लिए आगे आ रखे हैं और उनका मानना है कि जनता ने उन्हें जीताकर मुख्यमंत्री बनाया हुआ है इसलिए उनके हर सपने को पूरा करने का काम उनका है। उत्तराखण्ड मे जहां बाइस सालों से सडकों पर आंदोलनकारी से लेकर कई विभागों के कर्मचारी आंदोलन करने के लिए आगे बढते हुए दिखाई देते थे वह मुख्यमंत्री की स्वच्छ राजनीति को एक आदर्श मानकर अब आंदोलन की राह पर चलने के लिए इसलिए आगे नहीं बढते क्योंकि मुख्यमंत्री सबका साथ सबका विकास के एजेंडे पर काम कर रहे हैं। आवाम के दिलों को जीतकर उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर मुख्यमंत्री सरकार चलाने के लिए हमेशा अगली पक्ति मे खडे दिखाई दे रहे हैं।

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