निराले हैं योगी बाबा

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माफिया को इनमें दिखता साक्षात काल
सांता क्लॉस समझता हर बाल-गोपाल
उत्तराखण्ड के लाल ‘अदित्यनाथ’, सबके हितैषी, सबके साथ
ख्याति उनकी इतनी महान की देश के प्रत्येक राज्य का मुखिया उनकी कार्यशैली का अनुसरण करने की चेष्टा करता है। प्रशासन करने की क्षमता उनकी इतनी कलात्मक है कि उनके शासन में राज्य का साकारात्मक कायाकल्प लगातार हो रहा है। अपराधियों और माफियाओं के दिलों में उनका इतना खौफ है कि मौजूदा समय में वह अपराध करने का ख्वाबघ् तक नहीं देख पा रहे है। युवाओं से लेकर नौनिहालों में उनके प्रति इतना है स्नेह कि कोई खुद को उनका भक्त कहता है तो, कोई उनसे नादानी भरी मांग रख देता है, ‘चिप्स चाहिए’…
देहरादून। देवभूमि उत्तराखण्ड को वीरों की धरती भी कहा जाता है। इस पावन धरा पर सदियों से कई वीर सपूतों ने जन्म लिया है। हरेक का उल्लेख करने लगे तो संभवतः ‘अनंत’ शब्द की परिभाषा भी बेमानी ही साबित होगी। पिछले कुछ दशकों में उत्ताखण्ड में कई ऐसी शख्सियतों ने जन्म लिया है जिन्होंने सेना से लेकर राजनीति तक में एक ऐसी पहचान बनाई है जो प्रासंगिता की एक नई कहानी को बयां करती हैं। भारत एक ऐसा देश है जहां चुनाव शायद कभी खत्म नहीं होते। कभी इस राज्य में चुनाव तो कभी उस राज्य में चुनाव। चुनाव में जीत उसी राजनीतिक दल की होती है जिसके नेताओं पर आवाम को विश्वास होता है। मौजूदा समय में देश के अधिकांश राज्यों में भाजपा और भाजपा के साथ मिलकर उसके घटक दलों की सरकारें हैं। ऐसा इसलिए ही संभव हो पाया क्योंकि भाजपा के पास सुपरस्टार नेताओं की फौज है। केन्द्रीय नेतृत्व से इतर यदि राज्यों की बात की जाए तो दर्जनों ऐसे नेता और राज्यों के मुख्यमंत्री हैं, जिनकी एक आवाज पर जनता अपना मन भाजपा के पक्ष में मतदान करने के लिए बना लेती है। राजनीतिक विश्लेषकों ने भाजपाई नेताओं के इस समूह को एक सेना बताया है और उनका मानना है कि इस सेना के सेनापति और कोई नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। उत्तर भारत से लेकर पूर्व-पश्चिम यहां तक कि मध्य भारत में भी मुख्यमंत्री योगी की सभाओं में उमड़ने वाली भीड़ इस बात का प्रमाण देती है कि उनकी ख्याति कितनी दूर तक फैली है। 2024 में हुए लोकसभा चुनाव के बाद जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए, वहां भाजपाध्एनडीए ने प्रचंड बहुमत की सरकारें बनाई और इसका श्रेय जहां केन्द्रीय नेतृत्व का जाता है तो उसका एक बड़ा अंश भाजपा के स्टार प्रचारकों के सेनापति योगी आदित्यनाथ को भी जाता है क्योंकि हर प्रदेश की जनता चाहती है कि उनके राज्य में भी उत्तर प्रदेश जैसा शासन हो।
उल्लेखनीय है कि एक दौर ऐसा भी था जब लोग अपराध, आरजकता, माफियागिरी का नाम सुनते थे तो उन्हें एक ही राज्य याद आता था, उत्तर प्रदेश। हालांकि वह दौर दूसरा था और आज का दौर उसके ठीक विपरीत है। आज लोगों से जब कोई पूछता है कि सुशासन, भ्रष्टाचारविहीन, परिपक्व कानून व्यवस्था, नारी सुरक्षा, इत्यादि का उदाहरण कौन सा राज्य है तो आज लोग कहते हैं, उत्तर प्रदेश। लोगों के मन में यह विचार इसलिए बन गया है क्योंकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने कुशल नेतृत्व के दम पर उत्तर प्रदेश को एक ऐसे राज्य में परिवर्तित किया है, जिसमें उपर्युक्त सभी विशेषताएं हैं। राजनीतिक के कुछ जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काफी सख्त मिजाज के हैं और वे सदैव ही गुस्से में रहते हैं। हालांकि उनका यह मानना काफी हद तक सही माना जा सकता है लेकिन वास्तव में यह पूर्ण रूप से सत्य भी नहीं है। पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक रील वायरल हुई थी जिसमें बाबा योगी आदित्यनाथ एक अबोध बालक से उसकी इच्छा पूछते हैं तो, बालक थोड़ा सा संकोच करके कहता है, ‘चिप्स चाहिए’। उस बालक के इतना कहने मात्र से ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर एक मासूम से मुस्कान उभर आती है। ऐसे ही निराले हैं योगी बाबा, जिनके अंदर राम और परशुराम, दोनों ही बसते है। जहां एक ओर हर बाल-गोपाल उन्हें सांता क्लॉस समझता है, जो उनकी हर ’विश’ को पूरा करेगा तो, वहीं दूसरे अपराधियों और माफियाओं को इनमें अपना काल दिखता है। सही मायने में कहा जाए तो उत्तराखण्ड के लाल योगी अदित्यनाथ, सबके हितैषी है, सबके साथ हैं और जो चीज उन्हें नहीं पसंद है वह है अपराधियों का फन उठाना। ऐसे फनों को कुचलने के लिए बाबा हमेशा तैयार रहते हैं।

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