दबंगता से सरकार चला रहे धामी

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देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड की डेढ़ करोड जनता ने मन में यह धारणा बना ली थी कि अब उत्तराखण्ड का कोई ऐसा मुख्यमंत्री राज करने के लिए नहीं आयेगा जो उनका रक्षक बनकर उनके साथ खडा होगा। जनता का उस समय भ्रम टूट गया जब उत्तराखण्ड के युवा मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों को वचन दिया कि वह उनका परिवार है और उनके परिवार पर जब भी कोई संकट आकर खडा होगा तो वह संकट का सामना अटल होकर करेंगे और संकट के दौर में कभी मुंह छिपाकर नहीं रहेंगे। चार साल में राज्य के अन्दर जितनी भी बडी-बडी आपदायें आई उन आपदाओं को देखकर उसका दर्द दिल में समाते हुए मुख्यमंत्री हमेशा मौके पर ही मोर्चा संभालने के लिए अटल होकर वहां डटे रहे और आपदा पीडितों की आंखों से निकलने वाले आसूओं का दर्द उन्होंने महसूस करते हुए उन्हें वचन दे रखा है कि इस संकटकाल में वह उनके साथ खडे हैं और उन्हें इस संकट की घडी से वह बाहर निकालने में कोई कसर नहीं छोडेंगे। मुख्यमंत्री निडर और दबंगता के साथ सरकार चला रहे हैं और किसी भी आपदा के बाद उन्हें यह इल्म रहता है कि जनता में यह आशंका रहती है कि उन्हें कहीं सरकार इस संकट में अकेला न छोड दे लेकिन मुख्यमंत्री जनता के बीच जाने के लिए आतुरता से प्रोटोकॉल तोडने से भी नहीं चूके उससे साफ दिखाई दे गया कि मुख्यमंत्री के दिल में आपदा का दर्द बसा हुआ है और इस संकटकाल में वह आपदा पीडितों के साथ अटल होकर खडे हुये हैं।
उत्तराखण्ड के अन्दर पुष्कर सिंह धामी पहले ऐसे मुख्यमंत्री देखने को मिले हैं जो छोटे से लेकर बडी आपदा में खुद मोर्चा संभालने के लिए अपनी टीमों के साथ मौके पर डेरा डाल लेते हैं। हाल ही में उत्तरकाशी के धराली और चमोली के थराली में जब बादल फटने से बडी आपदा आई तो मुख्यमंत्री ने अपने सारे कामकाज छोडकर युद्ध स्तर पर आपदा स्थलों पर बचाव व राहत कार्य के लिए बडा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने का मोर्चा संभाला। मुख्यमंत्री आपदा प्रभावितों के दर्द को महसूस करते हुए खुद उत्तरकाशी और चमोली पहुंचे थे और उन्होंने वहां आपदा पीडितों की आंखों से आंसू पोछने के लिए जो भावुकता दिखाई उसे देखकर हर कोई यह कहने से नहीं चूका कि उत्तराखण्ड को आज के दौर में एक ऐसा मुख्यमंत्री मिल गया है जो डेढ करोड जनता का रक्षक बनकर उनकी रक्षा करने के लिए हमेशा आगे खडा रहता है। मुख्यमंत्री ने आपदा पीडितों को तत्काल जिस तरह से पांच-पांच लाख रूपये की आर्थिक सहायता देने का आदेश दिया उससे आपदा पीडितों को विश्वास हो चला कि मुख्यमंत्री इस आपदा की धडी में उनके साथ खडे हैं।
उत्तराखण्ड के इतिहास में अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्री का दिल्ली में हाईकमान से ज्यादा नाता रहता था क्योंकि बडे-बडे फैसले लेने के लिए उन्हें दिल्ली की मंजूूरी लेनी होती थी और उसके बाद ही किसी फैसले पर पूर्व मुख्यमंत्रियों की मोहर लगा करती थी जिसको लेकर हमेशा राज्य के अन्दर यह बहस चलती थी कि आखिरकार उत्तराखण्ड के अधिकांश पूर्व मुख्यमंत्री अपने आप कोई भी फैसला लेने के लिए क्यों आगे नहीं बढते हैं जिसके चलते उन्हें अपने आलाकमान के पास जाकर फैसला लेना पडता है। उत्तराखण्ड के अधिकंाश पूर्व मुख्यमंत्री जब दिल्ली में अपने आलाकमान से मिलने के लिए जाया करते थे तो उसके बाद राज्य के गलियारां में यह सवाल उठने लगते थे कि कहीं राज्य की राजनीति में कोई ऐसा भूचाल तो नहीं आने वाला जिसके चलते बार-बार कुछ पूर्व मुख्यमंत्रियों को वहां जाना पडता है। उत्तराखण्ड की कमान संभालने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुरूआती दौर में ही यह साफ कर दिया था कि वह दबंगता के साथ सरकार चलायेंगे और उन्होंने सरकार चलाने के लिए जिस विजन के साथ आगे बढना शुरू किया उसे देखकर राज्यवासियों को समझ आ गया था कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा हाईकमान जेपी नड्डा ने मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी को खुली छूट दे दी है कि वह राज्यहित में खुद फैसले लें और उन्हें फैसले लेने के लिए दिल्ली आने की कोई जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री ने राज्य के अन्दर हर फैसला दबंगता के साथ लिया और उन्होंने बडे-बडे फैसलों को राजधानी में ही हरी झंडी देकर यह साफ कर दिया था कि भाजपा हाईकमान की उम्मीदों पर वह हमेशा खरा उतरने के लिए सही फैसले लेंगे। उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता कानून को लागू करने के लिए उन्होंने खुद ही एक बडी कमेटी का गठन कर उस पर एक बडी पहल कर दी थी और एक समयावधि में उन्होंने समान नागरिक संहिता कानून को लेकर अपना जो वायदा निभाने की दिशा में अपने आपको आगे रखा है उससे दिल्ली में बैठे भाजपा के दिग्गज नेताओं को यह विश्वास होता चला गया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तराखण्ड की राजनीति के वो उभरते हुए सितारे हैं जो उत्तराखण्ड को एक नया उत्तराखण्ड बनाने की दिशा में उस उडान पर निकल चुके हैं जिस उडान पर बाइस सालों में कोई भी पूर्व मुख्यमंत्री नहीं उड पाया था।

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