प्रचंड $ मजबूत $ अटूट त्र पुष्कर

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दिल्ली क्या गए, विरोधियों को लगने लगी मिर्चे
ऐतिहासिक निर्णयों ने बनाया धामी को लोकप्रिय
प्रमुख संवाददाता
रामायण का एक प्रसंग है जिसमे कि महाबली बालि का पुत्र रावण के दरबार में शांति प्रस्ताव लेकर जाता है, जहां वह चुनौती देता है कि यदि दरबार में कोई बलशाली हो उसका पैर जमीन से हटाकर दिखाए। समूचा दरबार कोशिश करके हार गया लेकिन कोई भी अंगद का पैर नहीं हटा पाया। आज हजारों वर्षाें के बाद भी मजबूती का उदाहरण जब भी दिया जाता है तो इस ही प्रसंग को आधार बनाया जाता है। इस प्रसंग के संदर्भ को थोड़ा उन विरोधियों को भी समझना चाहिए अनर्गल तरीके से अफवाहें उड़ाना शुरू कर देते हैं। उत्तराखण्ड में एक मजबूत सरकार सत्ता में है। सरकार के मुखिया पिछले मुखियाओं के मुकाबले काफी बेहतर काम कर रहें हैं। इसके बावजूद उनके विरोधी मिथ्या खबरें परचारित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहें। एक सवाल उन विरोधियों से भी है कि पिछले 25 वर्षाें में ऐसा कब नजर आया है कि हमारा उत्तराखण्ड भौगोलिक, राजनीतिक, समाजिक, और आर्थिक रूप से इतना समृद्ध दिखा हो? उत्तराखण्ड में पिछले कुछ वर्षाें में कुछ क्रांतिकारी बदलाव हुए हैं। जहां हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन होता था वहां पिछले दो बार से भाजपा की प्रचंड बहुमत की सरकार विराजमान है। बॉलीवुड के चर्चित सितारे अपनी फिल्मों की शूटिंग के लिए यहां की वादियों में आ रहे हैं और कुछ आने को बेकरार हैं। विकसित राज्य बनने की दिशा में इस कालखंड में उत्तराखण्ड नित नई उंचाईयों को छू रहा हैं। आवाम अपने आका से खुश है। फिर भी न जाने क्यों विरोध की घुट्टी पीने वाले कुछ भले मानस इसी मिथ्या प्रचार में लगे रहते हैं कि अब तो राज्य की राजनीति में कुछ बड़ा होने वाला है। देश में पिछले 11 सालों से नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार है जो जनहित में बढ़िया काम कर रही है। इसी तर्ज पर भाजपा शासित राज्यों में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। उत्तराखण्ड की पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने तो जनहित के साथ-साथ समाजहित को भी प्राथमिकता दे रखी है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण है राज्य में यूसीसी लागू करना। पुष्कर सिहं धामी की मजबूती का जिक्र तो अब देश के बड़े मीडिया संस्थानों की चर्चाओं तक में होने लगा है। कालजयी राष्ट्रवादी पत्रकार उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री धामी का उदाहरण देकर अपने कथनों में सार्थकता प्रदर्शित करते हैं। यहीं वो बातें है जो सीएम धामी के विरोधियो के गले नहीं उतरती और वह उनके हर दिल्ली पर हल्ला मचाने लगते हैं। मिर्चे लगनी तो स्वाभाविक हैं, क्योंकि इस धामी सरकार में उनकी दाल गल नहीं रही है। उत्तराखण्ड में जिस प्रचंडता, मजबूती और अटूटता के साथ शासन चल रहा है उसका श्रेय सिर्फ और सिर्फ सीएम पुष्कर सिहं धामी कोे ही जाता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विरोधी यह क्यों भूल जाते हैं कि जब उनके कानों को तो खबर दूर उनके सपने में भी नही था कि धामी भी मुख्यमंत्री बन सकता है, तब मात्र 2 बार के विधायक का अनुभव वाले 44 वर्षीय युवा विधायक को उत्तराखंड की जिम्मेदारी केन्द्रीय नेतृत्व ने सौंपी थी। जिसके बाद से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के ताबड़तोड़ फैसलों के कारण राज्य निर्माण के सपनों को पंख लगे। जल, जंगल, जमीन, पहाड़ और पलायन के साथ साथ रोजगार पर अब तक कि सबसे सफल योजनाओं को बनाने वाले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंघ धामी को किस आधार पर हटाये जाने की चर्चा करते है ये विरोधी लोग। भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करते हुए घोटालेबाज सरकारी कर्मचारियों तक को जेल में डालने से नही हिचकते है मुख्यमंत्री पुष्कर सिंघ धामी। लगातार नकल माफियाओं से दागदार उत्तराखंड को किसी ने मुक्त कराया है तो उसका श्रेय भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंघ धामी को ही जाता है। पूरी तरह से ऐसे लोगो की कमर ही नही तोड़ी, उनको भी जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया है। कैसे भूल जाते हैं ये विरोधी लोग जब बढ़ते पलायन और बढ़ते लैंड जिहाद पर सबकी आंखे बंद थी तब उत्तराखंडियों का मसीहा ही बनकर आए है मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। हर उस जमीन को बुलडोजर चलवाकर मुक्त कराया जो जेहादियों के कब्जे में थी। जिनके कदम लगातार पहाड़ पर बढ़ रहे थे। पलायन करते युवाओं को राज्य विकास की मुख्यधारा में शामिल कर स्वरोजगार का बड़ा लक्ष्य निर्धारित कर , सोलर रोजगार, होम स्टे, जैविक खेती, साहसिक पर्यटन और सुखद तीर्थाटन के क्षेत्र में बड़े उदाहरण स्थापित कर चुके हैं। आज उत्तराखंड का सेब हो या ब्रोकली विदेशों में उत्तराखंड के नाम को रोशन कर रही हैं। यहाँ का अदरक, आलू, खीरा, चावल और राजमा तो विदेश निर्यात में देश की जीडीपी में बड़ा प्रभावित सिद्ध हो चुका है। राज्य में आने वाले पर्यटकों के लिए सैंकड़ों ऐसे योजनक्रम बनाये जा रहे हैं जिससे सैलानियों के आर्कषण उत्तराखंड बन सके और बन भी रहा हैं। उत्तराखंड के योग और वेलनेस संस्थानों के कारण बड़ी संख्या में विदेशी सैलानियों के रुख किसी ने मोड़ा है तो उस कामयाबी में भी कड़ी मेहनत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंघ धामी की ही हैं। उत्तराखंड की जैविक खेती का आइडिया लेकर कई प्रदेशों ने प्रेरणा ली है। राज्य की आमदनी का बड़ा श्रोत चार धाम यात्रा, बाबा निमकरोली धाम, हरिद्वार, कुम्भ मेला, कैलाश मानसरोवर यात्रा जैसे अनगिनत देवालयों की यात्राओं को सुगम बनाने के लिए ग्राउंड जीरो पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंघ धामी जाकर कार्य कर रहे हैं। लगातार आपदाओं की चपेट में रहने वाले इस पहाड़ी राज्य की चुनौतियों में भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हर बार ग्राउंड जीरो पर रहकर स्तिथियों को संभाला है। जिसके उदाहरण सिलक्यारा टनल हादसा से लेकर हरिद्वार मनसा देवी मंदिर हादसा हो या उत्तरकाशी या चमोली आपदा हो ऐसे कितने ही मामले हैं जहाँ विलंभ किये बिना मुख्यमंत्री पुष्कर सिंघ धामी घटना स्थल पर पहुंच कर सभी स्तिथियों को प्रवास कर संभालते है। उत्तराखंड ने वह भी देखा जब राजधानी तक भी नही छोड़ते थे राज्य के मुख्यमंत्री पद पर विराजे नेता।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्यशैली में कोई परिवर्तन नही होता है उन्ही का कुशल नेतृत्व है कि नगर निकायों में भाजपा को मिली एक तरफा सफलता के बाद पंचयात चुनाव में भी सुपर हिट सफलता मुख्यमंत्री पुष्कर सिंघ धामी के ही कारण भाजपा की झोली में आई हैं।
अब जब किसी मुख्यमंत्री का रिपोर्ट कार्ड इतना शानदार हो तो, उसके विरोधियों को मिर्चे लगा तो स्वभाविक है। वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इन्हीं अच्छे कार्याें ने उन्हें जनता के बीच लोकप्रिय बनाया है।

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