देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के इतिहास में कभी ऐसा देखने को नहीं मिला कि पंचायत चुनाव में मतदान का मैदान युद्ध में बदल गया हो? नैनीताल में जिस तरह से कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेसी नेताओं ने पार्टी के पांच सदस्यों के अपहरण का खुला आरोप लगाकर अपने साथ हुई मारपीट का खुला आरोप लगाते हुए पुलिस महकमे को कटघरे में खडा किया तो वहीं सोशल मीडिया पर बेतालघाट में चुनाव मतदान के दौरान फायरिंग और भगदड़ की घटना ने पुलिस महकमे को कटघरे में लाकर खडा कर दिया और सोशल मीडिया पर इन दोनो प्रकरणों को लेकर जो शोर मचा हुआ है उसको लेकर यह सवाल भी दागे जा रहे हैं कि क्या उत्तराखण्ड बिहार बन गया है जिसके चलते चुनाव मतदान में सरेआम गोली चलाना कोई मायने नहीं रखता? चुनावी युद्ध को देखकर खूब सवाल उठ रहे हैं कि आखिरकार पुलिस हाकिम कहां हो? पुलिस हाकिम का इन मामलों को लेकर अभी तक मीडिया के सामने कोई रूख न आना कई सवालों को जन्म दे गया है?
आज सुबह जब नैनीताल में पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए मतदान होना था तो वहां एक बडा बखेडा खडा हुआ और सोशल मीडिया पर एक वीडियो ने तो पुलिस और सिस्टम पर सवालिया निशान लगा दिये कि आखिरकार शांत उत्तराखण्ड में ऐसा कैसे हो गया कि सरेआम युद्ध जैसा मैदान सजा दिया गया? कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने मीडिया के सामने खुला आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के पांच जिला पंचायत सदस्यों का अपहरण कर लिया गया है और उनके साथ मारपीट की गई तो कुछ और के साथ भी मारपीट की गई है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है जिसमें कांग्रेस के एक सदस्य डीकर मेवाडी को पुलिस के सामने ही कुछ लोग घसीटते हुए ले जा रहे थे। वहीं जिला पंचायत अध्यक्ष पद की भाजपा प्रत्याशी दीपा दर्मवाल ने तल्लीताल थाना अध्यक्ष को लिखित शिकायत दी कि कांग्रेसी नेताओं ने उनके साथ मारपीट की है और चार अन्य जिला पंचायत सदस्यों को गायब करने का प्रयास किया है। वहीं नैनीताल के बेतालघाट में चुनाव प्रक्रिया के दौरान सडक पर जिस तरह से एक युवक द्वारा सरेआम गोलियां चलाई गई उससे पुलिस की इस पूरे मामले में दिखी खामोशी पर कांग्रेस काफी नाराज दिखाई दी। नैनीताल पंचायत चुनाव का मामला उच्च न्यायालय पहुंचा तो न्यायालय ने एसएसपी को पांच अपहृत सदस्यों को तलाश कर वोट करवाने को कहा। नैनीताल के जिला पंचायत और उपाध्यक्ष के लिए आज 27 चयनित सदस्य मतदान करने वाले थे इसी बीच सुबेरे कुछ सदस्यों का अपहरण करने का नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगा दिया इस बात को लेकर कांग्रेस समर्थित पक्ष न्यायालय पहुंचा। न्यायालय ने सुरक्षा में दस सदस्यों को पोलिंग बूथ पर ले जाने को कहा। वहीं सबकी नजरें न्यायालय के रूख पर लगी हुई थी।
सबसे बडा सवाल यह खडा हुआ कि आखिरकार जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने का ऐलान किया हुआ था तो फिर पुलिस प्रशासन ने शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव सम्पन्न कराने के लिए क्या कोई बडा खाका तैयार नहीं किया था जिसके चलते चुनाव के अन्दर एक बडा बखेडा खडा हो गया और पुलिस को चुनौती देते हुए जिस तरह से बेतालघाट में गोलियां दागी गई उससे पुलिस महकमे की छवि पर आज कई सवाल खडे हो गये? सवाल यह है कि राज्य के अन्दर पंचायत चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने का दायित्व भी पुलिस मुखिया के पास था तो फिर उन्होंने पहले से ही पुलिस महकमे को अलर्ट क्यों नहीं किया कि अगर कोई भी चुनाव में गडबडी करने का प्रयास करे तो उसके खिलाफ सख्त एक्शन किया जाये।

