धराली में जीवन बचाने के लिए खुद मोर्चे पर डा0 आर राजेश
धामी के स्वास्थ्य महकमे को गुलजार करने में जुटे सचिव
प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड का इतिहास गवाह है कि राज्य को एक से एक पूर्व मुख्यमंत्री मिले और स्वास्थ्य महकमे को एक नई पहचान दिलाने के लिए उन्होंने बडे-बडे दावे किये थे लेकिन धरातल पर उनके दावे टॉय-टॉय फिस्स ही नजर आये। स्वास्थ्य महकमे की कमान संभालने वाले अधिकांश स्वास्थ्य सचिवों ने अपने आपको एसी रूम मे ही कैद रखा और वहीं से वह हवाबाजी में राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की डुगडुगी बजाते चले गये थे जिसके चलते डेंगू जैसी बीमारी में लोगों की मौत ने स्वास्थ्य महकमे को कटघरे में लाकर खडा कर दिया था कि जब इतना बडा स्वास्थ्य महकमा डेंगू जैसी बीमारी को काबू करने में सफल नहीं है तो फिर कैसे स्वास्थ्य महकमा आवाम को बेहतर इलाज दे पायेगा यह हमेशा एक बडा सवाल राज्य के अन्दर तैरता रहा था। अब जबसे उत्तराखण्ड की कमान युवा मुख्यमंत्री के हाथों में है तो उन्होंने स्वास्थ्य महकमे को एक नई पहचान देने के लिए स्वास्थ्य सचिव के रूप में ऐसे अफसर की तैनाती की हुई है जिन्होंने रात-दिन पहाड से लेकर मैदान तक का सफर तय करके सरकारी अस्पतालों को एक नई पहचान देकर वहां आने वाले मरीजों को यह संदेश दे रखा है कि अब उत्तराखण्ड के सरकारी अस्पतालों में इलाज प्राईवेट अस्पतालों से बेहतर मिलेगा। वहीं उत्तरकाशी के धराली मे आई बडी आपदा में एक-एक जीवन को बीमारियों से बचाने के लिए मुख्यमंत्री ने बडा संकल्प लिया और उसके चलते उन्होंने स्वास्थ्य सचिव को मैदान मे उतारा कि वह मोर्चे पर डटे जिससे कि धराली में किसी का जीवन भी इलाज के अभाव में संकट में न फस सके। मुख्यमंत्री के विजन को धरातल पर उतारने के लिए जिस जज्बे के साथ स्वास्थ्य सचिव धराली के आपदाग्रस्त इलाकों में मोर्चा संभाले हुये हैं उससे साफ नजर आ रहा है कि मुख्यमंत्री को भरोसा है कि उनके स्वास्थ्य सचिव इस आपदा की धडी में एसी कमरों में न बैठकर पथरीले रास्तों पर एक-एक जीवन बचाने के लिए आगे मोर्चा संभालते रहेंगे।
धराली में आई आपदा के बाद से ही मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने स्वास्थ्य सचिव डा0 आर राजेश कुमार को आदेश दिये थे कि वह आपदाग्रस्त इलाकों में डाक्टरों की टीमों को सभी दवाइयों के साथ वहां रवाना करें और सभी डाक्टर हर आपदा पीडित के इलाज में कोई कसर न छोडे इसके लिए खुद स्वास्थ्य सचिव मॉनिटिरिंग करते हुए आगे बढे हुये थे। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी के विजन को धरातल पर उतारने के लिए स्वास्थ्य सचिव ने रात-दिन एक किया हुआ है और वह लगातार मोर्चे पर डटी अपनी टीमों को आदेश देते आ रहे हैं कि वह कैंप लगाकर हर मरीज का बेहतर इलाज करें जिससे कि किसी के जीवन पर कोई संकट आकर न खडा हो। स्वास्थ्य सचिव डा0 आर राजेश कुमार ने साफ संदेश दिया हुआ है कि मुख्यमंत्री का विजन है कि आपदाग्रस्त इलाकों में फंसे एक-एक जीवन की रक्षा करना सरकार का दायित्व है और इस दायित्व निभाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें डटी हुई हैं और सभी आवश्यक दवाईयां आपदा पीडितों के इलाज के लिए वहां मौजूद हैं। स्वास्थ्य सचिव ने एक कदम आगे बढकर धराली में खुद मोर्चे पर डटने के लिए अपने आपको आगे किया और वह बडे जज्बे के साथ धराली में मेडिकल कैम्पों में आपदा पीडितों का इलाज देखने के लिए वह खुद मोर्चा संभाल रहे हैं। स्वास्थ्य सचिव का धराली में खुद डटे रहना यह साबित कर रहा है कि वह मुख्यमंत्री के विजन को धरातल पर उतारने के लिए कोई कमी नहीं रखना चाहते।
उत्तराखण्ड के अन्दर पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि एक स्वास्थ्य सचिव खुद किसी भी आपदा के दौरान मोर्चे पर डटने से पीछे नहीं हटते और मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने उन्हें जो बडी जिम्मेदारी सौंप रखी है उस जिम्मेदारी को वह एक इच्छाशक्ति के साथ पूरी करने के मिशन में हसते हुए निभा रहे है उसे देखकर हर कोई यह कहने से नहीं चूक रहा है कि काश उत्तराखण्ड को वर्षों पूर्व ऐसा स्वास्थ्य सचिव मिल जाता तो उत्तराखण्ड के सरकारी अस्पतालों की तस्वीर ही बदल जाती।

