देहरादून(संवाददाता)। उत्तराखण्ड के इतिहास में पहली बार राज्यवासियों को ऐसा मुख्यमंत्री मिला है जिन्होंने जनसेवा को ही अपना मूलमंत्र मान लिया है। युवा मुख्यमंत्री बच्चों से लेकर बडो के बीच अपनी फलावर छवि से उनके दिल अजीज बन चुके हैं और यही कारण है कि आज विपक्ष के बडे-बडे राजनेता मुख्यमंत्री की राजनीति में लम्बी उडान को देखकर हाफ्ते हुये नजर आ रहे हैं और उन्हें 2०27 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से ही एक बडा डर सता रहा है कि वह विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री की चाणक्य राजनीति को कैसे भेदकर सत्ता पर काबिज हो पायेंगे? मुख्यमंत्री ने फरियादियों के बीच अपने आपको एक मसीहा प्रस्तुत कर रखा है जिसके चलते आज जहां भी मुख्यमंत्री के कदम बढते हैं वहीं आवाम और फरियादी उनके सामने अपनी फरियाद लेकर पहुंच जाते हैं और मुख्यमंत्री भी उनकी फरियाद पर तुरंत एक्शन करने के लिए हुक्म दे देते हैं जिससे मुख्यमंत्री आज उत्तराखण्ड की राजनीति के हीरो बन गये हैं।
मुख्यमंत्री आज युवाओं, बुजुर्गों, मातृशक्ति के बीच अपनी जो पहचान बना चुके हैं उससे वह हमेशा इस बात का सुकून महसूस करते हैं कि उन्होंने सरकार चलाने के लिए जो विजन अपने मन में संजोया था उस पर वह खरा उतर रहे हैं। मुख्यमंत्री जिस जनपद में भी अपने कदम रखते हैं वहां उनसे रूबरू होने के लिए इलाके के लोग अपनी फरियाद लेकर उनके पास यही सोचकर जाते हैं कि मुख्यमंत्री के दर से वह मायूस नहीं लौटेंगे। मुख्यमंत्री भी अपने मन में एक प्रण कर चुके हैं कि जनसेवा ही उनका पहला और आखिरी मूलमंत्र है और उसी मंत्र पर वह सरकार चलाने के लिए हमेशा आगे बढते रहेंगे। हल्द्वानी में मुख्यमंत्री की मौजूदगी और उसके बाद उनसे मिलने वालों का लगा तांता यह बताने के लिए काफी है कि आज राज्य की जनता उन्हें अपना राजनीतिक मसीहा मान चुकी है और उसी के चलते हर कोई फरियादी मुख्यमंत्री के पास अपनी फरियाद लेकर आने में कभी हिचकिचाहट नहीं दिखाता। मुख्यमंत्री ने फरियाद लेकर आये हर फरियादी की फरियाद सुनकर अफसरों को आदेश दिये कि सबकी समस्याओं का हल तत्काल रूप से किया जाये जिससे कि आवाम के बीच संदेश जाता रहे कि सरकार मौके पर ही फैसला लेने के लिए आगे खडी रहती है।
मुख्यमंत्री ने साफ संदेश मे कहा कि जनसेवा ही उनका पहला और आखिरी मूलमंत्र है और इसी मूलमंत्र पर वह हमेशा सरकार चलाते रहेंगेे। मुख्यमंत्री से मिलने आये फरियादियों ने मन मे यह धारणा बना रखी है कि उनकी समस्या पर जल्द एक्शन होगा क्योंकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कभी भी हवाबाजी में कोई आदेश नहीं करते और उनके राज में अफसरशाही को यह इल्म हो चुका है कि अगर उनके पास मुख्यमंत्री का लिखा कोई पत्र आया है तो उसका चंद समय के भीतर ही उन्हें निस्तारण कर उस इंसान का विश्वास हासिल करना है जिसने उम्मीद के साथ अपनी फरियाद मुख्यमंत्री को बताई है। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने सीएम पोर्टल पर आने वाली शिकायतों पर अपनी पैनी नजर बना रखी है और वह अकसर सीएम पोर्टल पर आने वाली शिकायतों की समीक्षा करने के लिए आगे बढ़ते हैं और कुछ फरियादियों को वह फोन करके उनसे फीडबैक लेते हैं कि उन्होंने जो शिकायत सीएम पोर्टल पर दर्ज कराई थी उस शिकायत का निस्तारण हुआ कि नहीं? मुख्यमंत्री की चौकस निगाहों से अफसरों में भी एक डर बना हुआ है कि उन्होंने फरियादियों की फरियाद पर एक्शन नहीं लिया तो उनके खिलाफ मुख्यमंत्री का एक्शन उन्हें झेलना पडेगा। आज उत्तराखण्ड के अन्दर हर तरफ एक ही आवाज सुनने को मिल रही है कि मुख्यमंत्री जनसेवा के मूलमंत्र पर सरकार चला रहे हैं।

