देहरादून(संवाददाता)।कबिले को स्वच्छ, सुरक्षित और सुव्यवस्थित रखना, एक मुखिया का पहला कर्तव्य होता है। यह मुखिया का ही दयित्व होता है कि उसके कबिले से जुड़ा प्रत्येक जनमानस इस विश्वास के साथ अपने जीवन का यापन करता है कि उसके कबिले की कमान एक मजबूत और जांबाज मुखिया के हाथ में है। कबिला जितना बड़ा होता है, मुखिया की जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी होती है। एक कबिले के तर्ज पर ही किसी प्रदेश को स्वच्छ, सुरक्षित और सुव्यवस्थित रखने की जिम्मेदारी भी उसके मुखिया यानि कि उस प्रदेश के मुख्यमंत्री की होती है। पिछले चार साल से, या यूं कहें कि उससे भी कुछ माह पूर्व से उत्तराखण्ड जैसे विषम भौगोलिक स्थिति वाले प्रदेश की कमान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हाथों में है और अपने इस कार्यकाल में वह एक जांबाज मुखिया के रूप में उभर कर सामने आए हैं और उत्तराखण्ड का एक विकसित राज्य बनाने की दिशा में लगातार कार्य करते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की कार्यशैली के मुरीद तो भाजपा हाईकमान के शीर्ष नेता भी हैं। अकसर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह, धामी की तारीफों के पुल बांधते नहीं थकते। इसका प्रमुख कारण यह है कि सीएम धामी हमेशा उन दोनों के विश्वास पर खरे उतरे हैं। अपने शासनकाल में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऐसे ऐतिहासिक फैसले लिए हैं, जो इस बात का प्रमाण देता है कि वे कितने बड़े जनप्रिय नेता हैं। सीएम धामी एक बहुमुखी नेता है और उनकी प्रतिभा, भारत के कई नेताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती रही है। इसीलिए पूरे देश में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मिसाल एक जांबाज मुखिया के रूप में दी जाती है।
मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड की सियासत के वो सितारे हैं जिसकी रोशनी राज्य से लेकर देश के अन्दर खूब चमकती हुई नजर आ रही है। देश के प्रधानमंत्री से लेकर गृहमंत्री की राजनीतिक पाठशाला में हमेशा अव्वल आने वाले मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने अपने चार साल के कार्यकाल में पारदर्शिता और स्वच्छता के साथ सरकार चलाने का जो हुनर दिखाया उससे आज वह एक जाबांज मुखिया के रूप में अपनी बडी पहचान बना चुके हैं। चार साल से मोदी और शाह के विश्वास पर हमेशा खरा उतरने वाले मुख्यमंत्री पर राज्य की जनता आज अभेद भरोसा कर रही है और उन्हें विश्वास है कि मुख्यमंत्री सियासत के वो सितारे हैं जो हमेशा अपनी रोशनी से आम जनमानस को प्रकाश दिखाते रहेंगे। मुख्यमंत्री ने अपने चार साल के कार्यकाल में एक के बाद एक एतिहासिक फैसले लिये और उन फैसलों को उन्होंने धरातल पर उतारा तो उससे वह सच्चे जनप्रेमी के रूप में अपनी एक बडी छवि बना चुके हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर ंिसह धामी ने अपने चार साल के कार्यकाल में वो सबकुछ कर दिखाया जो बाइस सालों से राज्य का कोई भी पूर्व मुख्यमंत्री सम्भवत: नहीं कर पाया था। मुख्यमंत्री ने आवाम के दिलों में जो अपनी जगह बनाई उसी का परिणाम है कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जितने भी चुनाव हुये हैं उनमें भाजपा को फतेह मिली और हर तरफ कमल खिलता हुआ ही नजर आया जिससे दिल्ली में मुख्यमंत्री की राजनीतिक धमक खूब बुलंद होती जा रही है। मुख्यमंत्री के काम करने का अंदाज बिल्कुल स्वच्छ है लेकिन भाजपा के ही कुछ राजनेताओं को उनकी तेजी के साथ बढती लोकप्रियता रास नहीं आ रही है और यही कारण है कि वह समय-समय पर मुख्यमंत्री को पर्दे के पीछे रहकर निशाने पर लेने से नहीं चूक रहे हैं? मुख्यमंत्री की सत्ता अभेद है और भाजपा के दिग्गज नेताओं को यह इल्म है कि मुख्यमंत्री अपनी दबंग और धाकड सत्ता चलाने के स्टाइल के चलते आवाम के दिलों में बस गये हैं। चार साल का कार्यकाल बेदाग होना मुख्यमंत्री के सिर पर स्वच्छता और पारदर्शिता से सरकार चलाने का ताज पहना रहा है। अब मुख्यमंत्री 2०27 को फतेह करने के मिशन पर अपनी टीम के साथ आगे बढ रहे हैं।

