देहरादून(नगर संवाददाता)। स्वामी भगवान सिंह का उन पर हो रहे जुल्मों का आज दर्द छलक गया और उन्होंने कहा है कि दर्जाधारी राज्यमंत्री विश्वास डाबर सहित अन्य लोगों पर अभी तक किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई है जो चिंता का विषय है और मेरे विरूद्ध एक झूठी प्राथमिकी 233/2०24, अन्तर्गत धारा 354, 42० 4०4, 5०6, 5०9 आईपीसी थाना राजपुर में दर्ज करा दी गयी है तथा सम्पत्ति रिक्त न करने के कारण कई अन्य मुकदमों में फंसाने की धमकियां दी जा रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस द्वारा दी गई सुरक्षा को भी वापस ले लिया है जिससे उनकी जान पर खतरे के बादल मंडरा रहे है। यहां मसूरी रोड़ स्थित आश्रम में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि जून, 2०24 में उपरोक्त व्यक्तिगण उक्त सम्पत्ति पर आये और मुझ पर पर किसी महिला के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप लगाने लगे और जबरन सम्पत्ति खाली करने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि मेरे द्वारा जब उन्हें कहा गया कि उक्त सम्पत्ति उनकी निजी सम्पत्ति है तथा उनका नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज व अंकित है तथा उक्त सम्पत्ति पर उसके नाम से बिजली व पानी का बिल आदि संयोजित है तो इस पर उक्त दर्जाधारी राज्य मंत्री विश्वास डाबर द्वारा कहा गया कि बिजली व पानी का बिल दो मिनट में कटवा देंगें।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति जिस पर मुकदमा है अथवा जमानत पर है उनके लिए यह कानून बनाया हुआ है कि जिस पर कोई मुकदमा है अथवा बेल पर है उसे उत्तराखण्ड में रहने नही दिया जायेगा तथा यदि कोई ऐसा करता है तो उसे तुरन्त पैर में गोली मारने के आदेश दिये हुए है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार दर्जाधारी राज्य मंत्री विश्वास डाबर कहते है कि 18० लोगों को पैर में गोली मारकर इन्काउन्टर किया हुआ है। उनके द्वारा स्पष्ट किया कि जब तक प्रार्थी पर मुकदमा चल रहा है वह तब तक उत्तराखण्ड में नहीं आ सकता है, यदि प्रार्थी शराफत से नहीं गया तो पुलिस उसे घसीटते हुए लेकर जायेगी और उत्तराखण्ड से बाहर कर देगी। उन्होंने कहा कि उक्त घटना का वीडियों सोशल मीडिया में भी अत्यधिक वायरल हुआ है।
उन्होंने कहा कि मेरे द्वारा निरन्तर पुलिस के उच्च अधिकारियों व शासन प्रशासन में शिकायत कर उचित कार्यवाही करने तथा मेरी सुरक्षा सुनश्चित करने की गुहार लगायी गयी थी परन्तु उपरोक्त व्यक्तियों द्वारा अपने प्रभाव का प्रयोग करते हुए मेरे विरूद्ध एक झूठी प्राथमिकी 233/2०24, अन्तर्गत धारा 354, 42० 4०4, 5०6, 5०9 आईपीसी थाना राजपुर में दर्ज करा दी गयी है तथा सम्पत्ति रिक्त न करने के कारण मुझे कई अन्य मुकदमों में फंसाने की धमकियां दी जाने लगी। उन्होंने कहा कि तत्पश्चात मेरे द्वारा उच्च न्यायालय के समक्ष सुरक्षा उपलब्ध कराये जाने हेतु याचिका समर्पित की गयी थी जिसमें 13 मई 2०25 को शासकीय अधिवक्ता द्वारा प्रार्थी को अंतरिम सुरक्षा प्रदान किये जाने की अण्डरटेकिंग दी गयी थी। चूंकि वर्तमान में प्रार्थी के आश्रम में चौमास के उपलक्ष्य में निरन्तर रक्षाबंधन के पर्व तक भण्डारे का आयोजन किया जाना प्रस्तावित है जिसके चलते प्रार्थी द्वारा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के समक्ष 29 मई 2०25 को सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक आवेदन दिया गया था। जिस पर उनके द्वारा थाना राजपुर को प्रार्थी को निजी सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया गया परन्तु पिछले दो दिनों से थाने द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के प्रार्थी की सुरक्षा वापस ले ली गयी है जिसके चलते प्रार्थी की सुरक्षा का भय बना हुआ है तथा उच्च न्यायालय के आदेशों की भी अवहेलना है। उन्होंने कहा कि अनेकों शिकायत के उपरान्त भी दर्जाधारी राज्य मंत्री विश्वास डाबर व उसके गुर्गों के विरूद्ध कोई कार्यवाही नही हो रही है। इस अवसर पर स्वामी भगवान सिंह वह अमरजीत सिंह का चेला है और वह निवासी ऋषि आश्रम अगवारलोपो जगरांव, पंजाब मसूरी रोड़, देहरादून पर स्थित सम्पत्ति ऋषि आश्रम, मौजा भण्डारगांव, तहसील व जिला देहरादून का स्वामी, सह स्वामी है। उन्होंने कहा कि उक्त सम्पत्ति में मेरे साथ स्वामी जगदीश हरी भी सह स्वामी है। उन्होंने कहा कि उक्त सम्पत्ति मूल रूप से जगदीश हरी, अवतार हरी, अमरजीत हरि द्वारा द्वारा वर्ष 1967 में क्रय की गयी थी।
उन्होंने कहा कि अवतार हरी का देहान्त वर्ष 2००1 में हो गया था व तत्पश्चात उनका भाग जगदीश हरी एवं अमरजीत हरि को प्राप्त हुआ। ततपश्चात अमरजीत सिंह हरि का देहान्त वर्ष 2००9 में हो गया था। उनके देहान्त के उपरान्त उक्त सम्पत्ति में उनका भाग उनकी अंतिम वसीयत के आधार पर मुझे प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि मेरी व जगदीश हरी का नाम उक्त सम्पत्ति के बाबत राजस्व अभिलेखों में दर्ज व अंकित है तथा निरन्तर सम्पत्ति के स्वामित्व व अध्यासन में है। उन्होंने कहा कि उक्त सम्पत्ति पर निरन्तर साधु सन्तों का आना जाना रहता है। निरन्तर सत्संग, संगत की सेवा और लंगर आदि का आयोजन होता है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से उक्त सम्पत्ति पर असमाजिक तत्वों की बुरी नजर है। जिनमें प्रमुख रूप से राज्य सरकारी में दर्जाधारी मंत्री विश्वास डाबर पुत्र त्रिलोक चन्द डाबर निवासी 16, तिलक रोड़, फॉरेस्ट ऑफिस के समीप, देहरादून, दलबीर जुनेजा पुत्र खेरातीलाल जुनेजा निवासी अलीगढ़, उत्तर प्रदेश, तुलसीदास पुत्र जसवन्त सिंह निवासी हनुमानगढ़, चन्दरभान पुत्र दासू राम निवासी वार्डन नंबर 13, गजसिंह पुर, राजस्थान, देवेन्दर जुनेजा पुत्र गोपाल दास, निवासी गंगानगर, राजस्थान, ललित कुमार पुत्र दसूराम निवासी विंग नंबर सात, गजसिंह पुर राजस्थान है। जिनके द्वारा जगदीश हरी के साथ मिलकर निरन्तर सम्पत्ति हड़पने के दृष्टिकोण से मुझे सम्पत्ति को खाली करने के लिए धमकाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उपरोक्त परिस्थितियों के दृष्टिगत प्रार्थी अपना सत्संग व डेरा पंजाब में वापस स्थानान्तरित करने का विचार बना रहे थे जिसके चलते आश्रम की भूमि को रखने के इच्छुक नही थे। जिसके चलते कुछ स्थानीय नेताओं एव व्यक्तियों की आश्रम पर गिद्ध दृष्टि पड़ गयी और वही लोग यह जमीन उन्हें बेचने के लिये दबाव बनाने लगे है और उन्होंने कहा कि वह किसी भी कीमत में जमीन नहीं देंगेें।

