पुरोला साम्प्रदायिक घटना के खिलाफ माकपा का डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन

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देहरादून(नगर संवाददाता)। माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने आज पुरोला में साम्प्रदायिक तनाव के चलते अल्पसंख्यकों के पुरोला पलायन के परिणामस्वरूप तथा अल्पसंख्यकों के खिलाफ निरन्तर बयानबाजी तथा दुकानों को जबरन बन्द करवाने के खिलाफ जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर जिला प्रशासन के माध्यम से राज्यपाल ,मुख्यमंत्री आदि को ज्ञापन प्रेषित किया । यहां बडी संख्या में पार्टी के कार्यकर्ता जिलाधिकारी कार्यालय में इकटठा हुए और वहां पर प्रदर्शन किया और कहा कि हिन्दूवादी संगठनों द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ अर्नगल बयान के परिणामस्वरूप प्रदेशभर में फैल रहे तनाव पर अंकुश लगाने की मांग की तथा राज्यपाल के नाम प्रभारी जिलाधिकारी कार्यालय शालिनी नेगी को ज्ञापन दिया ।
इस अवसर पर ज्ञापन में कहा गया कि भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी ) उत्तराखण्ड राज्य कमेटी नगर पंचायत पुरोला जनपद उत्तरकाशी,जहाँ दशकों से हिन्दु मुस्लिम परिवार आपसी सदभाव से अपना जीवन यापन कर रहे थे किन्तु 26 मई 2०23 की घटना के बाद अब अल्पसंख्यक समुदाय के परिवार भारी मन से पुरोला खाली कर चुके हैं जिनकी संख्या लगभग दो सौ बताई जा रही है, उनका दशकों पुराना व्यवसाय एवं आशियाना उजड़ चुका है । जो कि बेहद चिन्ताजनक है । ज्ञापन में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के अन्तर्गत राज्य हरेक व्यक्ति की रोजी रोटी की सुरक्षा के लिये जबाबदेह होगा किन्तु पुरोला वाले मामले में राज्य की भूमिका एकदम उलट है, यहाँ राज्य यानि सरकार की भूमिका न्यायोचित नहीं है । ज्ञापन में कहा गया कि अनुच्छेद 21 में हर व्यक्ति को जीवन यापन का अधिकार देता है ,यदि उसकी रोजी रोटी कमाने में कोई बाधक बनता है तो राज्य ऐसे तत्वों के खिलाफ कार्यवाही करेगा तथा पीडि़त के शान्तिपूर्ण जीवन जीने का वातावरण सुनिश्चित करेगा । पुरोला की घटना के दिन व उसके बाद वहाँ का स्थानीय प्रशासन, पुलिस उपद्रवियों को रोकने के बजाय मूकदर्शक बना रहा । ज्ञापन में कहा गया कि पुलिस के पास उपद्रवियों की वीडियोग्राफी होने के बावजूद भी उपद्रव का मुकदमा अज्ञात लोगों के खिलाफ लिखकर अल्पसंख्यकों में भय का माहौल बनाया गया तथा उन्हें उनके रहमोकरम पर छोड़ दिया गया ।पुरोला में उपद्रव करने वालों में किसी की भी गिरफ्तारी न होना दुखद है । हरिद्वार धर्म संसद में सुप्रीम कोर्ट के हेटस्पीच पर तल्ख टिप्पणी एवं कोर्ट के राज्य सरकार को आवश्यक दिशानिर्देशों की लगातार अनदेखी की जा रही है । बल्कि स्वयं राज्य सरकार लव जेहादियों एवं लैण्ड जेहादियों के नारा को तुल देकर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ दिख रही है ।
ज्ञापन में कहा गया कि पुरोला घटना में प्रमुख अभियुक्त हिन्दू समाज से है । डबल इन्जन सरकार ने चुनाव से पूर्व मतदाताओं से जो लोक लुभावन वायदे किये थे, जिसमें सबका साथ, सबका विकास तथा सबका विश्वास का नारा था किन्तु आपके कार्यकाल में बेरोजगारों की समस्या, अंकिता भण्डारी जधन्य हत्याकांड एवं जोशीमठ भूधंसाव तथा हल्द्वानी वनफूलापुरा बस्ती के आन्दोलन का सम्मानजनक हल न निकलना गम्भीर चिन्ता का बिषय है । ज्ञापन में कहा गया कि पुरोला घटना से ऐसा सन्देश जा रहा है कि आपकी सरकार 2०24 लोकसभा चुनाव को मद्देनजर साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के फिराक में है तथा भाजपा नेताओं द्वारा इस घटना को मुद्दा बनाकर उत्तरकाशी जिले के बड़कोट, चिन्यालीसौड़, नौगांव, डामटा, बरडीगाढ़, नेटवार, भटवाड़ी आदि अनेक कस्वों से लेकर राज्य के अनेक हिस्सों तक अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ उग्र प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं तथा सदियों से चले आ रहे साम्प्रदायिक सौहार्द को बिगाडऩे का कार्य कर रहे हैं । पहाड़ में हिन्दू एवं मुस्लिम आबादी का इतिहास काफी पुराना है । बावजूद इसके जिम्मेदार लोगों द्वारा बार बार लवजेहाद एवं लेण्डजेहाद के नारा देकर पुरोला घटना का राजनैतिक लाभ उठाने के फिराक में हैं । राज्य में धर्मांतरण जैसी घटनाओं को तबतक नहीं रोका जा सकता जब तक सदियों से अनूसूचित जाति, जनजाति के लोगों के साथ सामाजिक भेदभाव की घटनाऐं नहीं रोकी जा सकती ।
ज्ञापन में कहा गया कि उत्तराखंड में जिस तरह से भीड़ हिंसा और सांप्रदायिक उन्माद की घटनाएं सिलसिलेवार तरीके से हो रही हैं, वह बेहद अफसोसजनक है. इससे अधिक निंदनीय, उनमें शासन और प्रशासनिक मशीनरी की भूमिका है, जो किसी भी तरह इस तरह के उन्माद को रोकने की कोशिश नहीं कर रही है , जिनके निशाने पर राज्य में रहने वाले अल्पसंख्यक हैं । ज्ञापन में कहा गया कि पुरोला का घटनाक्रम चिंताजनक और हैरत में डालने वाला है और पुरोला में दो व्यक्ति, एक नाबालिग बच्ची के साथ थे और आरोप है कि यह दोनों लोग नाबालिग को भगा कर ले जा रहे थे। आरोपियों में एक मुस्लिम और एक हिंदू हैं दोनों की गिरफ्तारी हो गयी, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि धर्म के स्वयंभू ठेकेदारों को मौका मिल गया कि वह खुलकर उन्माद फैलाने की राजनीति कर सकें. घटना और उसमें कार्यवाही हुए आधा महीना हो चुका है। ज्ञापन में कहा गया कि लेकिन उसके बावजूद पुरोला और पूरी यमुना घाटी में तनाव का माहौल बनाए रखने के प्रयास निरंतर जारी हैं. आरोपियों का किसी तरह का बचाव न किए जाने के बावजूद, निरंतर उग्र माहौल बनाए रखना और इसके लिए विभिन्न बाजारों को बंद रखना, एक सुनियोजित कार्यवाही प्रतीत होती है, जिसके निशाने पर अलपसंख्यक समाज के वे लोग भी हैं, जिनका कोई अपराध ही नहीं ह। ज्ञापन में कहा गया कि सभी अल्पसंख्यकों की दुकानों पर दुकान खाली करने का पोस्टर चस्पा करना, असंवैधानिक,गैरकानूनी और आपराधिक कृत्य है. इस पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए,पुरोला छोड़कर जा चुकी अल्पसंख्यकों की वापसी सुनिश्चित हो ,सरकार उनकी छति की भरपाई करे । धार्मिक घृणा के प्रसारक संगठनों को यह फैसला करने का अधिकार दिया जाना चाहिए ।
ज्ञापन में कहा गया कि सत्यापन या कोई भी अन्य प्रशासनिक कार्य भी धार्मिक आधार पर न किया जाए। पुरोला में सामान्य स्थिति बहाल करने और निर्दोष अल्पसंखयकों की रक्षा के लिए तत्काल ठोस उपाय किए जाएं और किसी को भी भीड़ हिंसा और नफरत फैलाने की अनुमति न दी जाय। साथ ही राज्य सरकार द्वारा अतिक्रमण हटाने के अभियान को भी, जिस तरह से सांप्रदायिक विभाजन के औजार की तरह प्रयोग किया, उस पर भी तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए। ज्ञापन में कहा गया कि उच्चतम न्यायालय द्वारा भीड़ हिंसा रोकने के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर नोडल अफसर नियुक्त करने के निर्देशों का तत्काल प्रभावी तौर पर अनुपालन सुनिश्चित करवाया जाये । इस अवसर प्रदर्शन करने वालों में पार्टी के राज्य सचिव राजेन्द्र नेगी ,जिला सचिव राजेंद्र पुरोहित ,देहरादून महानगर सचिव अनन्त आकाश ,पछवादून सचिव कमरूद्दीन,त्रिलोचन भट्ट,पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शिव प्रसाद देवली ,सामाजिक कार्यकर्ता गीता गैरोला,महिला मंच की निर्मला बिष्ट , महिला समिति की उपाध्यक्ष इन्दुनौडियाल सीटू महामंत्री लेखराज ,एआई एम के नईम,एडवोकेट विनोदकुमार मौहम्मद इन्तजार मलिक,नजाकत, पीएसएम के विजय भट्ट ,इन्देश नौटियाल, लक्ष्मी पन्त ,नुरैशा अंसारी ,सैदुल्लाह ,रविन्द्र नौडियाल ,रामसिंह भण्डारी ,यू एन बलूनी ,एन एस पंवार आदि बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शामिल थे ।

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