प्रमुख संवाददाता
देहरादून। उत्तराखण्ड की अस्थाई राजधानी में आवाम व पर्यटकों को चौराहों पर लॉउडस्पीकर से आवाज सुनाई देती है कि स्मार्ट सिटी में आपका स्वागत है लेकिन एक ही बारिश में जिस तरह से स्मार्ट सिटी की काफी सडकें जलमग्न हो जाती हैं उसे देखकर यही सवाल खडा होता है कि सरकार कभी धरातल पर स्मार्ट सिटी का सच देखने के लिए सडकों पर भी उतर आओ तो उससे पता चल जायेगा कि शहर कितना स्मार्ट बन गया है? स्मार्ट सिटी एक मजाक बनकर रह गई है और जिस तरह से सडकों पर कई जगह मलवा और बडे-बडे गड्ढे आवाम व पर्यटकों के मन में स्मार्ट सिटी को लेकर बडी नाराजगी पैदा किये हुये है उसको देखते हुए सरकार कब इस स्मार्ट सिटी का असली रूप देखने के लिए बरसात के मौसम में सडक पर उतरेगी इस पर सबकी नजरें लगी हुई हैं?
उल्लेखनीय है कि कल से मौसम खराब चल रहा है और राजधानी में रूकरूक कर बरसात हो रही है और इस बरसात में कई स्थानों पर सडकें जलमग्न देखने को मिली तो कहीं सडकों में बडे गड्ढे और कहीं सडकों पर मलवा देखने को मिला। इस दृश्य को देखकर शहर के लोग और बाहर से आने वाले पर्यटकों के मन में एक ही सवाल तैरता हुआ दिखाई दे रहा है कि क्या बडे महानगरों में भी ऐसी स्मार्ट सिटी होती है जैसी उत्तराखण्ड की अस्थाई राजधानी देहरादून में देखने को मिलती आ रही है? शहर में जिस विजन के साथ उसे स्मार्ट बनाने का ढोल पीटा गया वह हवा हवाई से ज्यादा कुछ नजर नहीं आती? उत्तराखण्ड सरकार 2०25 तक राज्य को आदर्श राज्य बनाने का दम भर रही है ऐसे में उसे अस्थाई राजधानी में उन सडकों का भी सच देख लेना चाहिए जहां एक ही बारिश में वह जलमग्न हो जा रही हैं? सडकों पर बडे-बडे गड्ढे और वहां मलवे का जो ढेर आवाम और पर्यटकों को दिखाई दे रहा है उससे सवाल पनप रहे हैं कि सरकार कभी धरातल पर भी स्मार्ट सिटी के दर्शन कर लो?