देहरादून(नगर संवाददाता)। कांग्रेस पूर्व सैनिक विभाग के अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सेनि कर्नल रोहित चौधरी ने पुलवामा हमले में हुए 4० जवानों की शहादत पर जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सतपाल मलिक के खुलासे के बाद कहा कि केन्द्र सरकार को पुलवामा हमले पर श्वेत पत्र जारी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी।
यहां कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हुए महत्वपूर्ण तथ्यों एवं सवालों के साथ पत्रकार से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि पुलवामा 2०19 एक ऐसी चूक जिसका कोई जिम्मेदार नहीं है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार को खुफिया, सुरक्षा और प्रशासनिक विफलताओं की जवाबदेही तय करने के लिए एक श्वेत पत्र प्रकाशित करना चाहिए जिसके कारण 4० जवान शहीद हुए थे। उन्होंने कहा कि 14 फरवरी 2०19 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों द्वारा सेना के 78 वाहनों के काफिले पर लगभग 3०० किलोग्राम विस्फोटक भरी कार से किए गए हमले में सीआरपीएफ के 4० जवान शहीद हो गए। उन्होंने कहा कि पुलवामा हमले के समय जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल रहे सत्यपाल मलिक ने हाल ही में एक वेब चैनल को दिए अपने इंटरव्यू में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसके बाद 17 अप्रैल 2०23 को द टेलीग्राफ को दिए एक इंटरव्यू में पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल शंकर रॉय चौधरी ने भी गंभीर चिंता जताई है, जिन्होंने जम्मू कश्मीर में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए अपनी सेवाएं दी है।
उन्होंने कहा कि मलिक और जनरल रॉयचौधरी ने जो चिंताएं जताई हैं वो चिंताएं रक्षा बिरादरी समेत पूरे देश की हैं। हम प्रधानमंत्री मोदी से पांच सवालों के जवाब मांगें हैं। उन्होंने कहा कि जनरल रॉय चौधरी कहते हैं, अगर सैनिकों ने हवाई मार्ग से यात्रा की होती, तो जनहानि से बचा जा सकता थाष्, और नागरिक उड्डयन विभाग, वायु सेना या बीएसएफ के पास विमान उपलब्ध हैं। उनके अनुरोध के बावजूद 2,5०० सीआरपीएफ जवानों को एयरक्राफ्ट क्यों नहीं दिए गए और केन्द्र की मोदी सरकार ने अनुमति क्यों नहीं दी और क्या 4० लोगों की जान नहीं बचाई जा सकती थी। उन्होंने कहा कि जनरल रॉय चौधरी खुफिया विफलता की ओर इशारा करते हैं। 2 जनवरी 2०19 से 13 फरवरी 2०19 के बीच आतंकवादी हमले की चेतावनी वाली खुफिया सूचनाओं को नजरअंदाज क्यों किया गया। उन्होंने कहा कि आतंकियों ने करीब 3०० किलो विस्फोटक कैसे खघ्रीद लिया? दक्षिण कश्मीर, विशेष रूप से पुलवामा- अनंतनाग-अवंतीपोरा बेल्ट में भारी सुरक्षा के बावजूद विस्फोटक की इतनी बड़ी मात्रा कैसे छिपी रह सकती है। उन्होंने कहा कि जनरल रॉयचौधरी कहते हैं, पुलवामा में जानमाल के नुकसान की प्राथमिक जिम्मेदारी प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार की है। वह आगे कहते हैं कि उन्हें सलाह देने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को भी खुफिया विफलता के लिए दोषी ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एनएसए अजीत डोभाल, तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए क्या जिम्मेदारियां तय की गई हैं।
उन्होंने कहा कि जनरल रॉयचौधरी को लगता है कि यह एक ऐसी चूक है जिससे सरकार हाथ धोने की कोशिश कर रही है। हमले के चार साल बाद जांच कितनी आगे बढ़ी है। जांच की प्रक्रिया पूरी होने और देश को इसके निष्कर्ष बताने में देरी क्यों हो रही है। उन्होंने कहा कि 2०11 के मुंबई और 2०16 के पठानकोट जैसे पहले के हमलों के बाद पूछताछ की गई और निष्कर्ष सार्वजनिक किए गए। ऐसा सच्चाई को सामने रखने, जिम्मेदारी तय करने और भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बेहद आवश्यक था। पुलवामा मामले में भी, इन गंभीर सवालों को ष्आप चुप रहोष् और ष्ये कोई और चीज हैष् कहकर दबाने के बजाय इन प्रश्नों के जवाब दिए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि इसलिए, हम मांग करते हैं कि भारत सरकार पुलवामा हमलों पर एक श्वेत पत्र प्रकाशित करे, जिसमें हमले कैसे हुए, खुफिया विफलताएं क्या थीं, सैनिकों को विमान से जाने क्यों नहीं दिया गया, किस वजह से सुरक्षा में चूक हुई, सीआरपीएफ, गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और प्रधानमंत्री कार्यालय की भूमिका क्या है, विशेष रुप से दायित्वों के निर्वहन में विफल होने एवं इस पूरे मामले को दबाने में लगे है। इस अवसर पर पत्रकार वार्ता में पूर्व काबीना मंत्री एवं अनुशासन समिति के अध्यक्ष नवप्रभात उपाध्यक्ष संगठन, मथुरा दत्त जोशी, पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष सेनि कैप्टन बलबीर सिंह रावत, मुख्य प्रवक्ता गरिमा माहरा दसौनी, राजनीतिक सलाहकार अमरजीत ंिसह, प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल सिंह बिष्ट उपस्थित रहे।