ऋषिकेश(संवाददाता)। तीर्थ नगरी में इस बार आसमान से आग बरसने के संकेत मिलने लगे हैं।अप्रैल माह के मध्य में आचानक जिस प्रकार मौसम का मिजाज गर्म हुआ है उससे लगने लगा है कि इस बार भंयकर गर्मी का प्रकोप लोगों को झेलना होगा।जानकर इसे शहर में विकास के नाम पर अंधाधुंध कटे वृक्षों को गर्मी बढऩे की वजह मान रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त धार्मिक एवं पर्यटन नगरी ऋषिकेश तेजी से कंकरीट के जंगल के रूप में तब्दील हुई है।एक दौर था जब यहाँ हरे भरे वृक्ष गर्मी के मौसम में स्थानीय लोगों एवं बाहर से आने वाले तीर्थ यात्रियों को सुकून दिया करते थे।मगर अब ऐसा नही है।वृक्षों की कमी के चलते गर्मी बहुत अधिक बढ़ रही है, कुछ वर्ष पहले वृक्षों की संख्या बहुत अधिक थी परंतु देखा जा रहा है कि कुछ समय से पेड़ों की संख्या कम होती जा रही है। इससे साफ नजर आ रहा है कि विकास के नाम पर वृक्षों की कटाई लगातार की जा रही है। वृक्ष लगाएं, जीवन बचाएं, वृक्ष हमारी धरोहर है, वृक्षों के बिना हमारा जीवन संभव नहीं। यह बातें मात्र अधिकारियों द्वारा मीटिंग व कार्यशालाओं तक ही सीमित रहती है। परंतु जब किसी वृक्ष को काटा जाता है तब यह उनकी नजरों में दिखाई नहीं देता। नगर व आसपास के क्षेत्रों में ऐसा ही चल रहा है जहां वृक्षों की कटाई का सिलसिला निरंतर जारी है। परंतु संबंधित विभाग इस विषय पर मौन है, आखिर क्यों? विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा समय-समय पर पौधरोपण आदि कार्यक्रमों का आयोजन कर सामाजिक जनचेतना को जगाने का प्रयास किया जाता है परंतु विकास के नाम पर उस चेतना को गर्त में डालने का लगातार प्रयास किया जा रहा है।अंतरराष्ट्रीय गढ़वाल महासभा के अध्यक्ष डॉ राजे नेगी का कहना है कि वृक्षों पर आरियां चलने से मौसम में आए दिन बदलाव आ रहे हैं। मौसम में परिवर्तन होने से जहां आम जनमानस परेशान है वहीं प्राकृतिक संतुलन भी गड़बड़ा जाता है।इस पर जल्द रोक ना लगी तो इसके भंयकर परिणाम हम सबको भुगतने होंगे।रोटरी क्लब के अध्यक्ष राकेश अग्रवाल की माने तो शहर में तेजी से कराए जा रहे विकास कार्यों और सड़कों के चौड़ा करने के नाम पर पेड़ कटते रहे इसके गंभीर परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं।युवा व्यवसायी दुष्यंत सेठी व लांयस क्लब रााँयल के सचिव सुुुमित चोपड़ा के मुताबिक वृक्षों के कटान से शहर के अंदर हरियाली कम दिखाई दे रही है। इसका असर मौसम पर दिखाई देने लगा है। बारिश कम हो रही है और तापमान व प्रदूषण बढ़ता जा रहा है।समय की मांग है कि सड़कों के किनारे पौधरोपण के साथ-साथ ग्रीन क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा पौधे रोपे जाएं। ये पौधे छायादार होंगे, जो लंबे समय तक हरियाली देते रहेंगे।