हरिद्वार प्रशासन की नाक के नीचे ही पनप रहा था लैंड जेहाद

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देहरादून(संवाददाता)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अफसरों को आदेश दिया है की सभी प्रकार की अवैध मजारों को तोड़ा जाए। जिसको की लैंड जेहाद का नाम दिया जा रहा है लेकिन इस प्रकार के लोगो ने अमन और शांति भरे उत्तराखंड के माहौल में अब जहर घोलने ने के लिए नया प्लान ईजाद कर दिया है की विभिन्न तीर्थ स्थलों पर दुकानदारी के माध्यम से दिए जमा कर वहां नाम बदलकर रोजगार करने का बहाना याद किया है इस आढ़ में यह लोग अपनी को पूराना समय का स्थापित हो ना दर्शा कर तथा अपने पूजा स्थल बनाकर भविष्य की योजना पर काम कर रहे हैं।
हरिद्वार की हर की पौड़ी छेत्र में सीमित दायरे के तहत किसी भी कर हिंदू का स्थापित होना बाय लॉज के मुताबिक प्रति अधिक के बावजूद धरती होने सो जाने वाला प्रमुख द्वार पूलों की निकट ही अपनी असल पहचान छुपाकर हिंदू नामों से अवैध ठीए लगाकर कई प्रकार की विधर्मी कार में लिप्त हैं। इस सब का खुलासा तब हुआ जब हर की पोड़ी की प्रबंधकारिणी संस्था श्री गंगा सभा (रजि०), हरिद्वार द्वारा यह सारा मामला उजागर किया गया। हर की पौड़ी क्षेत्र के सीसीआर टावर जो की कुंभ मेला नियंत्रण कक्ष से लेकर सभी प्रशासनिक बैठकों का केंद्र है, के पास नाम बदलकर रह रहे मुस्लिम ठीएदारों को श्री गंगा सभा के स्वागत मंत्री डॉक्टर सिद्धार्थ चक्रपाणि एवं गंगा सेवक दल के सचिव उज्ज्वल पंडित ने पकड़कर पुलिस के सुपुर्द किया। तथा तुरंत ही ठियों को हटवा दिया। दरअसल श्री गंगा सभा के पदाधिकारियों को जानकारी मिली थी की कुछ गैर हिन्दू मुस्लिम लोगों ने ठिए जमा लिए हैं। यहां इसी की आड़ में कई विधर्मी कार्य कर रहे हैं । आज श्री गंगा सभा के स्वागत मंत्री डॉ० सिद्धार्थ चक्रपाणि एवं गंगा सेवक दल सचिव उज्ज्वल पंडित पहुंचे ओर नाम पता किया तो किसी ने अपना नाम अशोक पुत्र धर्मपाल बताया तो किसी ने अपने पिता का श्री कल्लन बताया और किसी ने अपना निवास भीम गौडा बताया। जब इनके आधार कार्ड वा नाम सक्ती से पूछे तो एक का नाम अजमल तो एक का उस्मान तो एक का कल्लन अहमद निकला जिसकी सूचना तुरंत गंगा सभा के महामनत्री तन्मय वशिष्ठ को दी गई जिन्होंने एसपी सिटी स्वतंत्र कुमार से बात की एसपी सिटी ने पुलिस को भेज कर सभी को गिरफ्तार करवा लिया गया। स्थानीय लोगो का कहना है की यह बहुत गंभीर विषय है और बिना जांच के ही ये ठिए लगवाए जा रहे हैं। जबकि हर की पोड़ी पूर्व से सुरक्षा लिहाज से संदिग्ध परिस्थितियों का केंद्र रहा है। ऐसे में प्रशासन की इतनी बड़ी भूल मुख्यमंत्री धामी के मिशन को तो चुनौती है ही भविष्य में किसी भी बड़े घटनाक्रम की ओर इशारा करती है।

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